दत्तात्रेय वशीकरण प्रयोग

दत्तात्रेय वशीकरण प्रयोगः भगवान दत्तात्रेय एक अवतारी हैं, इसलिए उपासना या उनके मंत्रों की साधना तंत्रिक कामन पूर्ति के लिए की जाती है। इसे मोहन प्रयोग आर्थात वशीकरण या सम्मोहन के लिए किया जा सकता है, जो काफी सरल और सहज अचूक है। इससे संबंधित उपाय इस तरह बताए गए हैंः-...

योग (yog)

योग (yog) सूर्य और चन्द्र  निश्वित्त समय में आकाशीय वतुंलमार्ग (क्रान्तिघृत्त) के आरम्भ स्थान से जितने अंश के अन्तर में हों, उन दोनों के अंशो’ को जोड़ कर उसमें १ ३ अंश २० क्ला का भाग देने से प्राप्त सख्वा३ अगर ७ और ८ के मध्य हो तो आठवाँ योग चलता है अगर...

नक्षत्र (Nakstra)

सूर्यं और चन्द्र जिस अस्काशीय वृत्ताकार (वतुंलाकार) मार्ग से गति कस्ते हैं, उस वतुंल के एक समान २७ विभाग की सकल्पना३ है जैसे साईकिल के पहिये में आरे लगे होत्ते हैं, ठीक उसी प्रकार की यह रचना है । यह प्र…येकदृ विभाग नक्षत्र का विभाग कहलाता है आकाश में तारों के अनेक...

तिथि (Thithi)

एक तिथि अर्थात् चन्द्र और सूर्यं के मध्य बारह अंश का कोणीय अन्तर होने में लगने वाला समय । क्लिरि भी तिथि के पूरी होने में लगने क्ला समय सदैव बदलता रहता है । वह कम से कम २० घण्टों का और’ अधिक से अधिक २७ घण्टों का हो सकता है जब सूर्य और चन्द्र के समय का कोणीय...

शनैश्चरस्तोत्रम्

शनैश्चरस्तोत्रम् ॥ शनैश्चरस्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीशनैश्चरस्तोत्रम् ॥  अस्य श्रीशनैश्चरस्तोत्रस्य दशरथ ऋषिः । शनैश्चरो देवता । त्रिष्टुप् छन्दः । । शनैश्चरप्रीत्यर्थ जपे विनियोगः। दशरथ उवाच — कोणोऽण्तको रौद्रयमोऽथ बभ्रुः कृष्णः शनिः पिंगलमन्दोसौरिः । नित्यं स्मृतो यो हरते च...