मस्तिष्क रेखा

देर से आरम्भ होने वाली मस्तिष्क रेखा


ऐसी मस्तिष्क रेखा को जीवन रेखा के अंदर या उससे ऊपर से आरम्भ न होकर शनि की उंगली के नीचे से आरम्भ होती है |कभी कभी यह दूसरी मस्तिष्क रेखा के साथ होती है इसको ढके रहती है |यह मस्तिष्क रेखा का दोष है |अतः दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा के फल को शनि के नीचे दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा पर लागू होते है यहाँ भी कहे जा सकते है |
देर से आरंभ होने वाली मस्तिष्क रेखा होने पर स्वयं या संतान की जिव्हा में कोई न कोई दोष तुतलाना या हकलाना अवश्यए होता है दोनों हाथो में यह लक्षण होने पर निच्छित रूप से कहा से जा सकता है |जीवन रेखा भी दोषपूर्ण होतो इस प्रकार का दोष अधिक प्रबल रूप में होता है |इनकी संतान के कान में भी दोष पाया जाता है |इनको जीवन साथी का स्वास्थ आरम्भ में कमजोर रहता है |किसी बचे को पोलियो का डर होता है परंतु इसके लिए जीवन रेखा के आरम्भ में दोष होना आवश्यक है |ऐसे व्यक्तियों पर किसी भी मादक द्रव्ये का प्रभाव जल्दी और ज्यादा होता है |तथा देर से तरक्की करते है |इन्हें आरम्भ में हर काम में रूकावट आती है और कुछ न कुछ दिक्कत रहती है जीवन भर

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मोटी मस्तिष्क रेखा

मस्तिष्क रेखा अन्य रेखा से मोटी दिखाई देने पर ,मोती मस्तिष्क रेखा कहलाती है |यह भी मस्तिष्क रेखा का दोष है |जितनी अधिक मोती यह मोटी होती है उतनी ही दोषपूर्ण होती है |मस्तिष्क रेखा अनेक बार पूरी मोटी न होकर इसका कुछ भाग मोटा देखा जाता है |जिस आयु तक यह मोटी होती है उसी समाये तक व्यक्ति को अशांति रहती है| इसके ठीक होने पर जीवन साधारण रूप से चलने लगता है |साधारणतया ही रेखाएं मोटी हो तो मस्तिष्क रेखा भी साधारण मस्तिष्क रेखा की तरह से फल देती है |मस्तिष्क रेखा का कुछ भाग मोटा तथा कुछ पतला होना भी दोष ही है |अतः दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा के सभी फल यहाँ भी लागु होते है |
ऐसी व्यक्ति क्रोधी,चिरचिरे साधु प्रवतृ सरल स्वभाव के व् ईमानदार होते है |फलस्वरूप जीवन में कई बार धोखा खाते है |इन्हें अधिक सोचने की आदत होती है |परंतु मस्तिष्क पर ज्यादा भर पद्मे का कोई अधिक दुःख होने पर ये असमान्य रूप से घबडाते है और नींद काम आने लगती है |इनमे काम की परवाह न करना बार बार काम बदलना अधिक खर्च करना तथा कोई न कोई एव जैसे जुए आदि की आदत पायी जाती है परंतु यह फल दोष की आयु तक ही नही होता है |

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मस्तिष्क रेखा का अंत सूर्य पर

मस्तिष्क रेखा का अंत सूर्य पर एक से अधिक मस्तिक रेखा होने पर कभी कभी ऐसा देखा जाता है कि मस्तिक्ष रेखा सूर्य पर चली जाती है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है ऐसे व्यक्ति सब गुणों से युक्त उत्तम विचार वाले बुद्धिजीवी और सम्मानित करने वाले होते हैं यह किसी भी कार्य को जल्द बाजी से नहीं करते स्वभाव के गर्म तथा नेत्रों के कमजोर होते हैं ऐसे व्यक्ति ठेकेदारी एजेंसी का कार्य करते हैं रेखाओं में दोस्त हो तो घमंडी होते हैं

 

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