कामिका एकादशी व्रत विधि एवं कथा

इस व्रत के करने तथा श्री हरि की पूजा से गंधर्वों, नागों सहित सभी देवता की पूजा हो जाती है। यह व्रत मनुष्य के पितरों के पाप को भी धो डालता है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को स्वर्ग की प्राप्ति होती है तथा उसके पितर भी स्वर्ग मे अमृतपान करते है। इस कामिका एकादशी के व्रत से मनुष्य को सभी दान से अधिक फल मिलता है। वनसहित पूरी पृथ्वी के दान के समान इस कामिका एकादशी व्रत का पुण्य है।‘कामिका’ एकादशी का व्रत करनेवाला मनुष्य रात्रि जागरण करके न तो कभी भयंकर यमराज का दर्शन करता है और न कभी दुर्गति में ही पड़ता है।

26th February 2018 (Monday) Time = 06:52 to 09:09

कामिका एकादशी की कथा

प्राचीन काल में एक गांव में एक ठाकुर जी रहते थे। ठाकुर जी का एक ब्राह्मण से झगड़ा हो गया और क्रोध में आकर ठाकुर ने ब्राह्मण की हत्या कर दी। बाद में उसे अपने किए पर पछतावा होने लगा। अपराध की क्षमा याचना के लिए ठाकुर ने ब्राह्मण का क्रिया कर्म करना चाहा। परन्तु पंडितों ने क्रिया कर्म में शामिल होने से मना कर दिया और वह ब्रह्म हत्या का दोषी बन गया। तब ठाकुर ने एक मुनि से निवेदन किया कि हे भगवान, मेरा पाप कैसे दूर हो सकता है।इस पर मुनि ने उसे कामिका एकादशी व्रत करने की सलाह दी। ठाकुर ने नियम पूर्वक एकादशी का व्रत किया। रात में भगवान की मूर्ति के पास जब वह सो रहा था, तभी उसे सपने में भगवान के दर्शन हुए। भगवान ने कहा कि मैंने तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दिया है। इस तरह ठाकुर ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो गया।

शास्त्र में कहा गया है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी का पत्ता चढ़ाएं तथा भगवान के सामने घी अथवा तिल का दीपक जलाना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसा करता है उसके पितृगण पितर लोक में आनंद मनाते हैं और उनकी सद्गगति होती है। ऐस व्यक्ति मृत्यु के बाद उत्तम लोक में जाता है।

कामिका एकादशी व्रत पूजन सामग्री

श्री विष्णु जी की मूर्ति
वस्त्र
पुष्प
पुष्पमाला
नारियल
सुपारी
अन्य ऋतुफल
धूप
दीप
घी
पंचामृत (दूध(कच्चा दूध),दही,घी,शहद और शक्कर का मिश्रण)
अक्षत
तुलसी दल
चंदनमिष्ठान

 

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