Dhumavati Astak in Hindi

Dhumavati Astak in Hindi

धूमावती अष्टक स्तोत्रं
।।अथ स्तोत्रं।।
प्रातर्या स्यात्कुमारी कुसुमकलिकया जापमाला जपन्ती,
मध्याह्ने प्रौढरूपा विकसितवदना चारुनेत्रा निशायाम्।
सन्ध्यायां वृद्धरूपा गलितकुचयुगा मुण्डमालां,
वहन्ती सा देवी देवदेवी त्रिभुवनजननी कालिका पातु युष्मान्।।1।।
बद्ध्वा खट्वाङ्गकोटौ कपिलवरजटामण्डलम्पद्मयोने:,
कृत्वा दैत्योत्तमाङ्गैस्स्रजमुरसि शिर शेखरन्तार्क्ष्यपक्षै:।
पूर्णं रक्तै्सुराणां यममहिषमहाशृङ्गमादाय पाणौ,
पायाद्वो वन्द्यमानप्रलयमुदितया भैरव: कालरात्र्याम्।।2।।
चर्वन्तीमस्थिखण्डम्प्रकटकटकटाशब्दशङ्घातम्,
उग्रङ्कुर्वाणा प्रेतमध्ये कहहकहकहाहास्यमुग्रङ्कृशाङ्गी।
नित्यन्नित्यप्रसक्ता डमरुडिमडिमां स्फारयन्ती मुखाब्जम्,
पायान्नश्चण्डिकेयं झझमझमझमा जल्पमाना भ्रमन्ती।।3।।
टण्टण्टण्टण्टटण्टाप्रकरटमटमानाटघण्टां वहन्ती,
स्फेंस्फेंस्फेंस्कारकाराटकटकितहसा नादसङ्घट्टभीमा।
लोलम्मुण्डाग्रमाला ललहलहलहालोललोलाग्रवाचञ्चर्वन्ती,
चण्डमुण्डं मटमटमटिते चर्वयन्ती पुनातु।।4।।
वामे कर्णे मृगाङ्कप्रलयपरिगतन्दक्षिणे सूर्यबिम्बङ्कण्ठे,
नक्षत्रहारंव्वरविकटजटाजूटके मुण्डमालाम्।
स्कन्धे कृत्वोरगेन्द्रध्वजनिकरयुतम्ब्रह्मकङ्कालभारं,
संहारे धारयन्ती मम हरतु भयम्भद्रदा भद्रकाली।।5।।
तैलाभ्यक्तैकवेणी त्रपुमयविलसत्कर्णिकाक्रान्तकर्णा,
लौहेनैकेन कृत्वा चरणनलिनकामात्मन: पादशोभाम्।
दिग्वासा रासभेन ग्रसति जगदिदंय्या यवाकर्णपूरा,
वर्षिण्यातिप्रबद्धा ध्वजविततभुजा सासि देवि त्वमेव।।6।।
सङ्ग्रामे हेतिकृत्वैस्सरुधिरदशनैर्यद्भटानां,
शिरोभिर्मालामावद्ध्य मूर्ध्नि ध्वजविततभुजा त्वं श्मशाने प्रविष्टा।
दृष्टा भूतप्रभूतैः पृथुतरजघना वद्धनागेन्द्रकाञ्ची,
शूलग्रव्यग्रहस्ता मधुरुधिरसदा ताम्रनेत्रा निशायाम्।।7।।
दंष्ट्रा रौद्रे मुखेऽस्मिंस्तव विशति जगद्देवि सर्वं क्षणार्द्धात्,
संसारस्यान्तकाले नररुधिरवशा सम्प्लवे भूमधूम्रे।
काली कापालिकी साशवशयनतरा योगिनी योगमुद्रा रक्तारुद्धिः,
सभास्था भरणभयहरा त्वं शिवा चण्डघण्टा।।8।।
धूमावत्यष्टकम्पुण्यं सर्वापद्विनिवारकम्,
य: पठेत्साधको भक्त्या सिद्धिं व्विन्दन्ति वाञ्छिताम्।।9।।
महापदि महाघोरे महारोगे महारणे,
शत्रूच्चाटे मारणादौ जन्तूनाम्मोहने तथा।।10।।
पठेत्स्तोत्रमिदन्देवि सर्वत्र सिद्धिभाग्भवेत्,
देवदानवगन्धर्वा यक्षराक्षसपन्नगा:।।11।।
सिंहव्याघ्रादिकास्सर्वे स्तोत्रस्मरणमात्रत:,
दूराद्दूरतरं य्यान्ति किम्पुनर्मानुषादय:।।12।।
स्तोत्रेणानेन देवेशि किन्न सिद्ध्यति भूतले,
सर्वशान्तिर्ब्भवेद्देवि ह्यन्ते निर्वाणतां व्व्रजेत्।।13।।
।।इत्यूर्द्ध्वाम्नाये धूमावतीअष्टक स्तोत्रं समाप्तम्।।

Dhumavati Kavach

धूमावती कवचम्

श्रीपार्वत्युवाच
धूमावत्यर्चनं शम्भो श्रुतम् विस्तरतो मया।
कवचं श्रोतुमिच्छामि तस्या देव वदस्व मे।।1।।
श्रीभैरव उवाच
शृणु देवि परङ्गुह्यन्न प्रकाश्यङ्कलौ युगे।
कवचं श्रीधूमावत्या: शत्रुनिग्रहकारकम्।।2।।
ब्रह्माद्या देवि सततम् यद्वशादरिघातिन:।
योगिनोऽभवञ्छत्रुघ्ना यस्या ध्यानप्रभावत:।।3।।
ॐ अस्य श्री धूमावती कवचस्य पिप्पलाद ऋषि: निवृत छन्द:, श्री धूमावती देवता, धूं बीजं, स्वाहा शक्तिः, धूमावती कीलकं, शत्रुहनने पाठे विनियोग:।।
ॐ धूं बीजं मे शिरः पातु धूं ललाटं सदाऽवतु।
धूमा नेत्रयुग्मं पातु वती कर्णौ सदाऽवतु।।1।।
दीर्ग्घा तुउदरमध्ये तु नाभिं में मलिनाम्बरा।
शूर्पहस्ता पातु गुह्यं रूक्षा रक्षतु जानुनी।।2।।
मुखं में पातु भीमाख्या स्वाहा रक्षतु नासिकाम्।
सर्वा विद्याऽवतु कण्ठम् विवर्णा बाहुयुग्मकम्।।3।।
चञ्चला हृदयम्पातु दुष्टा पार्श्वं सदाऽवतु।
धूमहस्ता सदा पातु पादौ पातु भयावहा।।4।।
प्रवृद्धरोमा तु भृशं कुटिला कुटिलेक्षणा।
क्षुत्पिपासार्द्दिता देवी भयदा कलहप्रिया।।5।।
सर्वाङ्गम्पातु मे देवी सर्वशत्रुविनाशिनी।
इति ते कवचम्पुण्यङ्कथितम्भुवि दुर्लभम्।।6।।
न प्रकाश्यन्न प्रकाश्यन्न प्रकाश्यङ्कलौ युगे।
पठनीयम्महादेवि त्रिसन्ध्यन्ध्यानतत्परैः।।7।।
दुष्टाभिचारो देवेशि तद्गात्रन्नैव संस्पृशेत्।।8।।
।।इति भैरवीभैरवसम्वादे धूमावतीतन्त्रे धूमावतीकवचं सम्पूर्णम्।।
Gupt dhan prapti mantra

Gupt dhan prapti mantra

Turant dhan prapti

सपनों या दूसरे चिन्हों के आधार पर आपको गड़े धन वाले स्थान का पता चल जाए तो इसके लिए आपको पहले पता करना होगा कि क्या वाकई जहां आप गड़े धन की संभावना देख रहे हैं, वहां गड़ा धन है भी या नहीं  इसके लिए आपको धन का अंदेशा होने वाले स्थान पर 40 दिन तक शु्द्ध घी का दीप एक लौंग के साथ जलाना चाहिए। 40 दिन के अंदर ही आपको सपने में इस बात के संकेत मिल जाएंगे कि आपको उस स्थान की खुदाई करनी है या नहीं

दूसरा तरीका

आप धन होने की संभावना वाली जगह पर एक लकड़ी की चौकी रखें। उस पर पान या पीपल का पत्ता रख कर उस पर एक सुपारी रखें। फिर हल्दी, कुंकुम, अक्षत और सुपारी रख कर घी का दीप जलाएं।

40 दिन तक करें

ऐसा 40 दिन तक करें। बाद में सारे पत्ते और सुपारी को विसर्जित करते हुए|
ये प्रार्थना करें कि कोई अज्ञात शक्ति आपको गड़े धन का संकेत दे।
अगर उस स्थान पर धन होगा तो आपको सपने में या फिर किसी दूसरी तरह से संकेत मिल जाएगा।

तीसरा तरीका

यदि आपको ऐसा लगता है कि किसी स्थान पर धन गढ़ा हुआ है और आप वह धन प्राप्त करना चाहते हैं|
तो इसके लिए एक मंत्र है ‘मंत्र: ऊं नमो विघ्नविनाशाय निधि दर्शन कुरु कुरु स्वाहा।’ gupt dhan prapti mantra
इसे दस हजार बार विधिवत जपने के बाद किसी जानकार से उक्त भूमि की शुद्धि करायी जाती है |
वहां से सभी तरह की आपदा को हटाया जाता है।
लेकिन यदि जानकार सही नहीं है तो इसके दुष्‍परिणाम भी भुगतने होते हैं।

चौथा तरीका

जानबूझकर छिपाकर रखे गए अधिकतर धन के भंडार को मंत्रों से बांधा गया है।
ऐसे धन को प्राप्त करने के लिए किसी जानकार से उक्त मंत्रों को जानकर ही उस खजाने को पाया जा सकता है।
कहते हैं ऐसे कुछ बंधन के रक्षक कोई भूत या प्रेत भी हो सकते हैं।
खजाने के मालिक किसी जानकार से जमीन में गाड़ने के बाद उस जमीन के आस-पास तंत्र-मंत्र द्वारा ‘नाग की चौकी’ या ‘भूत की चौकी’ बिठा देते थे।
हालांकि ऐसे धन को प्राप्त करना खतरनाक होता है।

Bandhi dukan kholne ka mantra

Bandhi dukan kholne ka mantra

ॐ नमो आदेश तू ज्या नावें भूत पले प्रेत पले

खबीस पले अरिष्ट पले न पले तर

गुरु की गोरखनाथ की बिदयां ही चले

अथवा

गुरु संगत, मेरी भगत चले मन्त्र ईश्वरी वाचा.

1008 बार इस दोनों मन्त्रों में से किसी एक का जप करने के बाद जल में फूंक मारे अब काले घोड़े की नाल को अपनी दुकान के सामने ऐसे लगा दें की जो भी आपकी दुकान पर आये उसकी नजर इस पर जरूर पड़े

kholne ka mantra

  • अब जल लें और उसे पूरी दुकान में छिडक दें तथा जो जल बच गया हैं उसे चौराहे पर डाल दें
  • अब काली उडद की दाल की कटोरी लें और दाल को भी चौराहे पर डाल दें
  • इस उपाय को करने से आपकी दुकान पहले की भांति चलने लगेगी
  • बंधी हुई दुकान को खोलने के लिए आप निम्बू तथा हरी मिर्च का भी प्रयोग कर सकते हैं
  • इस उपाय को करने के लिए शनिवार के दिन एक निम्बू और सात हरी मिर्च को अपनी दुकान पर लटका दें
  • दुकान को खोलने के लिए आप नागदमन के पौधे की जड़ का भी इस्तेमाल कर सकते हैं
  • इस उपाय को करने के लिए नागदमन के पौधे की जड को दुकान के बाहर लटका दें. इसे लटकाने से बंधी हुई दुकान खुल जाती हैं

मुक्त करें पक्षियों को

हालांकि इस टोटके के बारे में आप जानते ही होंगे। पिंजरे में आप किसी पक्षी को ले जाते हुए देखें या कोई पक्षी पिंजरे में है तो आप उन पक्षियों को लेकर उन्हें आजाद कर दें। इस कार्य से आपके ऊपर कैसा भी कर्ज हो आप उससे मुक्त हो जाएंगे। लेकिन यदि आपने अपने घर में किसी पक्षी को पिंजरे में रख रखा है तो आप आज नहीं तो कल कभी भी भयंकर कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे।

हाजरात प्रत्यक्षीकरण प्रयोग Hajrat Sadhna

Shree Shani Samhita श्री शनि संहिता

नवांश कुंडली Navmansh Kundali

Divya drishti prapti mantra

divya drishti prapti mantra

bhavishya dekhne ka mantra

विनियोग

अनयोः शक्ति-शिव-मन्त्रयोः श्री दक्षिणामूर्ति ऋषिः, गायत्र्यनुष्टुभौ छन्दसी, गौरी परमेश्वरी सर्वज्ञः शिवश्च देवते, मम त्रिकाल-दर्शक-ज्योतिश्शास्त्र-ज्ञान-प्राप्तये जपे विनियोगः।

ऋष्यादि-न्यास

 श्री दक्षिणामूर्ति ऋषये नमः शिरसि, गायत्र्यनुष्टुभौ छन्दोभ्यां नमः मुखे, गौरी परमेश्वरी सर्वज्ञः शिवश्च देवताभ्यां नमः हृदि, मम त्रिकाल-दर्शक-ज्योतिश्शास्त्र-ज्ञान-प्राप्तये जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ।

कर-न्यास

(अंग-न्यास)ः- ऐं अंगुष्ठभ्यां नमः (हृदयाय नमः), ऐं तर्जनीभ्यां नमः (शिरसे स्वाहा), ऐं मध्यमाभ्यां नमः (शिखायै वषट्), ऐं अनामिकाभ्यां हुं (कवचाय हुं), ऐं कनिष्ठिकाभ्यां वौषट् (नेत्र त्रयाय वौषट्), ऐं करतल-करपृष्ठाभ्यां फट् (अस्त्राय फट्)।

ध्यान

उद्यानस्यैक-वृक्षाधः, परे हैमवते द्विज-
क्रीडन्तीं भूषितां गौरीं, शुक्ल-वस्त्रां शुचि-स्मिताम्।

देव-दारु-वने तत्र, ध्यान-स्तिमित-लोचनम्।।

चतुर्भुजं त्रि-नेत्रं च, जटिलं चन्द्र-शेखरम्।

शुक्ल-वर्णं महा-देवं, ध्याये परममीश्वरम्।।

मानस पूजनः- लं पृथिवी-तत्त्वात्मकं गन्धं समर्पयामि नमः। हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं समर्पयामि नमः। यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं घ्रापयामि नमः।

रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं दर्शयामि नमः। वं अमृत-तत्त्वात्मकं नैवेद्यं निवेदयामि नमः। शं शक्ति-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं समर्पयामि नमः।

bhavishya dekhne ka mantra

शक्ति-शिवात्मक मन्त्र

 “ॐ ऐं गौरि, वद वद गिरि परमैश्वर्य-सिद्ध्यर्थं ऐं। सर्वज्ञ-नाथ, पार्वती-पते, सर्व-लोक-गुरो, शिव, शरणं त्वां प्रपन्नोऽस्मि। पालय, ज्ञानं प्रदापय।”

इस ‘शक्ति-शिवात्मक मन्त्र’ के पुरश्चरण की आवश्यकता नहीं है।

केवल जप से ही अभीष्ट सिद्धि होती है। अतः यथाशक्ति प्रतिदिन जप कर जप फल देवता को समर्पित कर देना चाहिए।

सिद्ध बीसायन्त्र प्रयोग विधि

“ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं भगवति मम सर्वं वांछितं देहि देहि स्वाहा।”

इस मन्त्रोच्चारणपूर १०८ बार बीसा यन्त्र लिख लेने के बाद उक्त मन्त्र से ही प्रत्येक यन्त्र का चन्दन, कुंकुम, पुष्प, धूप, दीप आदि प्रदान करके दक्षिणापूर्वक पूजा करें।

 यथा

bhavishya dekhne ka mantra

“ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं भगवति मम सर्वं वांछितं देहि देहि स्वाहा, विंशति यन्त्रराजाय चन्दनं समर्पयामि नमः।”
इस प्रकार १०८ यन्त्रों का पृथक्-पृथक् पूजन करके दूसरे दिन से मूलमन्त्र का जाप, हवनादि प्रारम्भ करें।
प्रथम दिन तो १०८ बीसा यन्त्रों के निर्माण, पूजन में ही व्यतीत हो जाएगा। दूसरे दिन से मूलमन्त्र जाप शुरु होगा। ८८ दिन तक जाप के प्रारम्भ में १०८ बीसा यन्त्रों का सामुहिकपूजन एवं धूप-दीप पूर्वक ही जाप प्रारम्भ करें।
यह प्रयोग ८८ दिन का है। प्रयोग की अवधि में दिन या रात को (निश्चित समय पर) प्रतिदिन मूल-मन्त्र की १० माला जाप करें। प्रतिदिन एक माला का हवन रात्रि को (जप के बाद) करें। हवनार्थ तांबे का हवनकुण्ड एवं आम की लकड़ी प्रयोग में लाएं। खीर, घी, शहद एवं बिल्वपत्र मिलाकर एक माला होम करें। हवन के बाद १० मूलमन्त्रों से कुशा द्वारा शरीर पर पानी छिड़कें, मार्जन करें। प्रतिदिन एक छोटी कन्या को ८८ दिन तक भोजन कराएं। इस प्रकार ८८ दिन तक प्रतिदिन १० माला जप, १ माला से हवन, १० मन्त्रों से मार्जन तथा १ कन्या को भोजन-यही क्रम चलेगा।

रात्रि में पूजनोपरान्त सात्विक भोजन करें। ८८ दिन भूशयन करें। मितभाषी तथा ब्रह्मचर्य का पालन करें। दिन में दूध-जल-फल प्रयोग में ला सकते हैं।

bhavishya dekhne ka mantra

दिन में अन्नग्रहण न करें।

इस प्रकार ८८ दिन का प्रयोग होने पर चमत्कार अनुभव होगा।

 प्रयोग के अन्त में कदाचित् भगवती का दर्शन भी सम्भव है। वाणी में अवन्ध्य प्रभाव आ जाता है।
प्रयोग पूर्ण होने पर यन्त्र प्रयोग के समय लिखित १०८ सुपूजित बीसा यन्त्रों को एक ही चाँदी या ताँबे के तावीज में मढ़ाकर पूजा स्थान में रखें। तन्त्र प्रयोग पूर्ण होने पर नित्यकर्म से निवृत्त होकर प्रतिदिन आम की लकड़ी से बने हुए पट्टे पर रोली (कुंकुम) बिछाकर सिद्ध बीसायन्त्र को अनार की कलम से ११ बार लिखें। प्रत्येक यन्त्र की मूलमन्त्र से पूजा करें। ऐसा करने पर सिद्धि एवं यन्त्र का प्रभाव बना रहेगा।

Shani Samhita शनि संहिता

saSarvartha Siddhi Yoga Meaning

Vashikaran Mantra Hindi

Vashikaran Mantra Hindi

Krishna Vashikaran Mantra Hindi

ॐ कलीम कृष्णाय नमः

इस मंत्र का प्रयोग पति-पत्नी दोनों में कोई भी या कोई एक कर सकता है। इसके लिए आपको सिद्ध योग में निम्नलिखित मंत्र का 1100 जप कर प्रेमपूर्वक अपने लाइफ पार्टनर को पान खिलाए, इससे आपके लाइफ पार्टनर जीवन भर आपके वश में रहेंगे। इस उपाय को पति पत्नी के लिए अथवा पत्नी पति के लिए कर सकती है।

pati ko vash me karne ka totka

अमुक (लाइफ पार्टनर का नाम) जय जय सर्वव्यान्नमः स्वाहा।

इस मंत्र का प्रयोग पति-पत्नी दोनों में कोई भी या कोई एक कर सकता है। इसके लिए आपको सिद्ध योग में निम्नलिखित मंत्र का 1100 जप कर प्रेमपूर्वक अपने लाइफ पार्टनर को पान खिलाए, इससे आपके लाइफ पार्टनर जीवन भर आपके वश में रहेंगे। इस उपाय को पति पत्नी के लिए अथवा पत्नी पति के लिए कर सकती है।

अमुक (लाइफ पार्टनर का नाम) जय जय सर्वव्यान्नमः स्वाहा।

Vaibhav Lakshmi Fast, Pujan, Vrat Katha, Aarti

Vaibhav Lakshmi Fast, Pujan, Vrat Katha, Aarti

turant vashikaran mantra in hindi

लौंग के टोटके से आप किसी को भी अपने वश में कर सकते हैं।लेकिन लौंग वशीकरण टोटके के बारे में यह हिदायत दी गई है कि यह टोटका आप केवल किसी अच्छे कार्य के लिए करेंगे इसका दुरुपयोग नहीं करेंगे।सबसे पहले 3 लौंग, एक रुई की बाती के साथ 1 कटोरी देसी  घी, माचिस, एक गिलास पानी और एक डिब्बी सिंदूर की रख लेँ। इसके लिए शुक्रवार का दिन सबसे अच्छा बताया गया है। इस दिन सुबह के समय 3 बजे उठें। स्नानदि करके उपर बताई हुई चीजों को रख लें। turant vashikaran mantra in hindi

अब 3 लौंग को सिंदूर की डिब्बी में रखें। रुई की बत्ती को घी में डालकर जला लें। फिर लौंग को सिंदूर की डिब्बी से निकालकर उसे एक गिलास पानी में डूबो दें।
इसके बाद “ऊं तत भार्वय् नमो नम, या रुद्र या मोहिनी कर, मैं अमन (जिस पर वशीकरण करना हो उसका नाम) सिद्ध नमो स्वाहा” मंत्र का 1100 बार जाप करें।दूसरे शुक्रवार को सिद्ध लौंग में दोबारा 11 बार वशीकरण मंत्र पढ़े और तीसरे शुक्रवार को उस लौंग का इस्तेमाल करें। वशीकरण करने वाले व्यक्ति के आसपास लौंग को रख दें। या फिर उसे आप उसके खाने में दें। इससे वह आपकी बातें मानने लगेगा।

Why awaken kundalini?

Why awaken kundalini?

Why awaken kundalini?

Kundalini is hidden power inside our base chakra. It has lots of energy. Numerous scriptures are giving us an idea about kundalini awakening. Once ingla ,pingla and sushumna nadis activate the kundalini shakti or serpent power.
If you want to take up the practice of kundalini yoga, the most important thing is that you have a reason or an aim. If you want to awaken kundalini for psychic powers or you want to awaken kundalini in order to enjoy communion between Shiva and Shakti, the actual communion between the two great forces within you, and if you want to enter samadhi and experience the absolute in the cosmos, and if you want to understand the truth behind the appearance, and if the purpose of your pilgrimage is very great, then there is nothing that can come to you as an obstacle.
By means of kundalini awakening, you are compensating with the laws of nature and speeding up the pace of your physical, mental and spiritual evolution. Once the great shakti awakens, man is no longer a gross physical body operating with a lower mind and low voltage prana. Instead, every cell of his body is charged with the high voltage prana of kundalini. And when total awakening occurs, man becomes a junior god, an embodiment of divinity.

to be continued…

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