Dussehra date in India 2018, 2019, 2020

Dussehra date in India 2018, 2019, 2020

Dussehra date in India 2018

19th October 2018 (Friday)
Vijay Muhurat = 14:05 to 14:51
Duration = 0 Hours 45 Mins
Aparahna Puja Time = 13:20 to 15:37
Duration = 2 Hours 17 Mins

Dussehra date in India 2019

8th October 2019 (Tuesday)
Vijay Muhurat = 14:11 to 14:57
Duration = 0 Hours 46 Mins
Aparahna Puja Time = 13:24 to 15:44
Duration = 2 Hours 19 Mins

Dussehra date in India 2020

25th October 2020 (Sunday)
Vijay Muhurat = 14:03 to 14:48
Duration = 0 Hours 45 Mins
Aparahna Puja Time = 13:18 to 15:33
Duration = 2 Hours 15 Mins

Vijayadashami also known as DasaharaDussheraDussehra or Dashain is a major Hindu festival celebrated at the end of Navratri every year. It is observed on the tenth day in the Hindu calendar month of Ashvin, the seventh month of the Hindu Luni-Solar Calendar, which typically falls in the Gregorian months of September and October.

Vijayadashami

is observed for different reasons and celebrated differently in various parts of the Indian subcontinent. In the southern, eastern and northeastern states of India, Vijayadashami marks the end of Durga Puja, remembering goddess Durga’s victory over the buffalo demon Mahishasura to help restore dharma. In the northern and western states, the festival is synonymously called Dussehra (also spelled Dasara, Dashahara). In these regions, it marks the end of “Ramlila” and remembers God Rama’s victory over the Ravana.

Ramlila

On the very same occasion; Arjuna alone defeated entire Kaurava army consisting of 100,000s of soldiers, Bhishma, Drona, Karna, Ashwatthama, Kripa, Duryodhana, Dushyasana, Shakuni etc. – there by significantly quoting a natural example of victory of Good (Dharma) over evil (Adharma). Alternatively it marks a reverence for one of the aspects of goddess Devi such as Durga or Saraswati.

Sastra Pujan

at the time of dussera many peoples perform Sastra pujan for protecting himself. We bond sastra by using the kalwa (Red Cotton Thread) tilaak by using asthagdnha. This Pujan is must for Kschtriya

 

Indra Ekadashi इंदिरा एकादशी

 Indra Ekadashi इंदिरा एकादशी

Date: 5 October 2018
Vedic lunar month: Ashvin
Paksha: Krishna paksha
Gregorian month: September – October
Presiding deity: Padmanabha

सतयुग

के समय में एक महिष्मति नाम की नगरी थी। जिसमें इंद्रसेन नाम का एक प्रतापी राजा धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करते हुए शासन करता था। वह राजा पुत्र, पौत्र और धन आदि से संपन्न और विष्णु का परम भक्त था। एक दिन जब राजा सुखपूर्वक अपनी सभा में बैठा था तो आकाश मार्ग से महर्षि नारद उतरकर उसकी सभा में आए। राजा उन्हें देखते ही हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और विधिपूर्वक आसन व अर्घ्य दिया।

सुख से बैठकर मुनि ने राजा से पूछा कि हे राजन! आपके सातों अंग कुशलपूर्वक तो हैं? तुम्हारी बुद्धि धर्म में और तुम्हारा मन विष्णु भक्ति में तो रहता है? देवर्षि नारद की ऐसी बातें सुनकर राजा ने कहा- हे महर्षि! आपकी कृपा से मेरे राज्य में सब कुशल है तथा मेरे यहाँ यज्ञ कर्मादि सुकृत हो रहे हैं। आप कृपा करके अपने आगमन का कारण कहिए। तब ऋषि कहने लगे कि हे राजन! आप आश्चर्य देने वाले मेरे वचनों को सुनो।

मैं एक समय ब्रह्मलोक से यमलोक को गया, वहाँ श्रद्धापूर्वक यमराज से पूजित होकर मैंने धर्मशील और सत्यवान धर्मराज की प्रशंसा की। उसी यमराज की सभा में महान ज्ञानी और धर्मात्मा तुम्हारे पिता को एकादशी का व्रत भंग होने के कारण देखा। उन्होंने संदेशा दिया सो मैं तुम्हें कहता हूँ। उन्होंने कहा कि पूर्व जन्म में ‍कोई विघ्न हो जाने के कारण मैं यमराज के निकट रह रहा हूँ, सो हे पुत्र यदि तुम आश्विन कृष्णा इंदिरा एकादशी का व्रत मेरे निमित्त करो तो मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है।

महर्षि

इतना सुनकर राजा कहने लगा कि हे महर्षि आप इस व्रत की विधि मुझसे कहिए। नारदजी कहने लगे- आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन प्रात:काल श्रद्धापूर्वक स्नानादि से निवृत्त होकर पुन: दोपहर को नदी आदि में जाकर स्नान करें। फिर श्रद्धापूर्व पितरों का श्राद्ध करें और एक बार भोजन करें। प्रात:काल होने पर एकादशी के दिन दातून आदि करके स्नान करें, फिर व्रत के नियमों को भक्तिपूर्वक ग्रहण करता हुआ प्रतिज्ञा करें कि ‘मैं आज संपूर्ण भोगों को त्याग कर निराहार एकादशी का व्रत करूँगा।

हे अच्युत! हे पुंडरीकाक्ष! मैं आपकी शरण हूँ, आप मेरी रक्षा कीजिए, इस प्रकार नियमपूर्वक शालिग्राम की मूर्ति के आगे विधिपूर्वक श्राद्ध करके योग्य ब्राह्मणों को फलाहार का भोजन कराएँ और दक्षिणा दें। पितरों के श्राद्ध से जो बच जाए उसको सूँघकर गौ को दें तथा ध़ूप, दीप, गंध, ‍पुष्प, नैवेद्य आदि सब सामग्री से ऋषिकेश भगवान का पूजन करें।

रात में भगवान के निकट जागरण करें। इसके पश्चात द्वादशी के दिन प्रात:काल होने पर भगवान का पूजन करके ब्राह्मणों को भोजन कराएँ। भाई-बंधुओं, स्त्री और पुत्र सहित आप भी मौन होकर भोजन करें। नारदजी कहने लगे कि हे राजन! इस विधि से यदि तुम आलस्य रहित होकर इस एकादशी का व्रत करोगे तो तुम्हारे पिता अवश्य ही स्वर्गलोक को जाएँगे। इतना कहकर नारदजी अंतर्ध्यान हो गए।

नारदजी

के कथनानुसार राजा द्वारा अपने बाँधवों तथा दासों सहित व्रत करने से आकाश से पुष्पवर्षा हुई और उस राजा का पिता गरुड़ पर चढ़कर विष्णुलोक को गया। राजा इंद्रसेन भी एकादशी के व्रत के प्रभाव से निष्कंटक राज्य करके अंत में अपने पुत्र को सिंहासन पर बैठाकर स्वर्गलोक को गया।

हे युधिष्ठिर! यह इंदिरा एकादशी के व्रत का माहात्म्य मैंने तुमसे कहा। इसके पढ़ने और सुनने से मनुष्य सब पापों से छूट जाते हैं और सब प्रकार के भोगों को भोगकर बैकुंठ को प्राप्त होते हैं।

गरुड़ पुराण अध्याय 2

Laxmi Puja 2019,2020,2021,2022

Laxmi Puja 2019,2020,2021,2022

Lakshmi Puja (Sanskrit: लक्ष्मी पूजा, IAST: Lakṣmī Pūjā), is a Hindu religious festival that falls on Amavasya (new moon day) of Krishna Paksha (dark fortnight) in the Vikram Samvat Hindu calendar month of Ashwin, on the third day of Tihar and is considered as the main festive day of Deepawali.

According to legend, Lakshmi, the goddess of wealth and Lord Vishnu’s wife, visits her devotees and bestows gifts and blessings upon each of them.

To welcome the Goddess, devotees clean their houses, decorate them with finery and lights, and prepare sweet treats and delicacies as offerings. Devotees believe the happier Lakshmi is with the visit, the more she blesses the family with health and wealth.

Laxmi Puja 2019 Date

13th October 2019 Sunday

Laxmi Puja 2019 Time

Kojagara Puja Nishita Time = 23:42 to 24:32+

 

Laxmi Puja 2020 Date

30th October 2020 Friday

Laxmi Puja 2020 Time

23:38 to 24:30+

Laxmi Puja 2021 Date

19th October 2021 (Tuesday)

Laxmi Puja 2021 Time

23:40 to 24:31+

Laxmi Puja 2022 Date

9th October 2022 (Sunday)

Laxmi Puja 2022 Time

23:43 to 24:33+

Kojagara Puja

Sharad Purnima is for Lakshmi Pujan

Sharad Purnima (also known as Kojagiri PurnimaNavanna Purnima, or Kaumudi Purnima) is a harvest festival celebrated on the full moon day of the Hindu lunar month of Ashvin (September to October), marking the end of the monsoon season.

The Kojagari Purnima concerns the observance of the Kojagara Vrata. People perform this Vrata under the moonlight after fasting for the day.  Lord Indra, the God of Rains, seated on his elephant, Airavata is also worshipped as also is Lord Shiva with his consort Parvati and carrier Nandi

Mahalaya Amavasya 2018, Mahalaya Chandi Path

Mahalaya Amavasya 2018, Mahalaya Chandi Path

Mahalaya Amavasya 2018

Date  8th October 2018 (Monday)

Mahalaya Amavasya 2018 Time

Kutup (कुतुप) Muhurat = 11:45 to 12:31
Duration = 0 Hours 46 Mins
Rohina (रौहिण) Muhurat = 12:31 to 13:17
Duration = 0 Hours 46 Mins
Aparahna (अपराह्न) Kaal = 13:17 to 15:36
Duration = 2 Hours 18 Mins

The Krishna Paksha in the month of Ashvin is also observed as Pitripaksha.

Which literally means ‘the fortnight of the forefathers’ a 16-day period when Hindus pay homage to their ancestors.

Mahalaya marks the end of this Pitripaksha.

Pitru Paksha

पितृ पक्ष also spelled as Pitri paksha, Pitr Paksha (literally “fortnight of the ancestors”) is a 16–lunar day period in Hindu calendar when Hindus pay homage to their ancestor (Pitrs), especially through food offerings. The period is also known as Pitru PakshyaPitri PokkhoSola Shraddha (“sixteen shraddhas”), KanagatJitiyaMahalaya Paksha and Apara paksha.

पितृ पक्ष 2018, क्यों कहते हैं कनागत, पितृ पक्ष का महत्व, Pitru Paksha 2018 dates

Pitru Paksha 2018 dates

Pitru Paksha is considered by Hindus to be inauspicious, given the death rite performed during the ceremony, known as Shraddha or Tarpan. In southern and western India, it falls in the 2nd paksha (fortnight) Hindu lunar month of Bhadrapada (September) and follows the fortnight immediately after the Ganesh festival.

Mahalya Other Names

It begins on the Pratipada (first day of the fortnight) ending with the no moon day known as Sarvapitri AmavasyaPitru AmavasyaPeddala AmavasyaMahalaya Amavasya or simply Mahalaya.

Most years, the autumnal equinox falls within this period, i.e. the Sun transitions from the northern to the southern hemisphere during this period. In North India and Nepal, and cultures following the purnimanta calendar or the solar calendar, this period may correspond to the waning fortnight of the lunisolar month Ashvin, instead of Bhadrapada.

vers perform a ritual called Tarpan — an offering made to the ancestors.

 

Mahalakshmi Vrat 2018

Mahalakshmi Vrat 2018

महालक्ष्मी व्रत का प्रारंभ भाद्रपद की शुक्ल अष्टमी के दिन से किया जाता है. यह व्रत सोलह दिनों तक चलता है. इस व्रत में धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजन की जाती है. महालक्ष्मी व्रत शुभ माना जाता है. इस व्रत को विवाहित जोड़े रखते हैं. इस दिन समृद्धि की प्रतिक मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है.

लक्ष्मी जी, भगवान विष्णु की पत्नी है, जिन्हें सुख-समृद्धि और एश्वर्य की देवी के रूप में पूजा जाता है. इस साल ये महालक्ष्मी व्रत आज यानी 1 अक्टूबर से शुरू है. यह व्रत 15 दिन चलता है. पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से गरीबी हमेशा के लिए दूर होती है.

16 days mahalakshmi vrat katha

प्राचीन समय की बात है, कि एक बार एक गांव में एक गरीब ब्राह्माण रहता था. वह ब्राह्माण नियमित रुप से श्री विष्णु का पूजन किया करता था. उसकी पूजा-भक्ति से प्रसन्न होकर उसे भगवान श्री विष्णु ने दर्शन दिये़. और ब्राह्माण से अपनी मनोकामना मांगने के लिये कहा, ब्राह्माण ने लक्ष्मी जी का निवास अपने घर में होने की इच्छा जाहिर की. यह सुनकर श्री विष्णु जी ने लक्ष्मी जी की प्राप्ति का मार्ग ब्राह्माण को बता दिया, मंदिर के सामने एक स्त्री आती है,जो यहां आकर उपले थापती है, तुम उसे अपने घर आने का आमंत्रण देना. वह स्त्री ही देवी लक्ष्मी है.

देवी लक्ष्मी जी के तुम्हारे घर आने के बार तुम्हारा घर धन और धान्य से भर जायेगा. यह कहकर श्री विष्णु जी चले गये. अगले दिन वह सुबह चार बचए ही वह मंदिर के सामने बैठ गया. लक्ष्मी जी उपले थापने के लिये आईं, तो ब्राह्माण ने उनसे अपने घर आने का निवेदन किया. ब्राह्माण की बात सुनकर लक्ष्मी जी समझ गई, कि यह सब विष्णु जी के कहने से हुआ है. लक्ष्मी जी ने ब्राह्माण से कहा की तुम महालक्ष्मी व्रत करो, 16 दिनों तक व्रत करने और सोलहवें दिन रात्रि को चन्द्रमा को अर्ध्य देने से तुम्हारा मनोरथ पूरा होगा.

ब्राह्माण ने देवी के कहे अनुसार व्रत और पूजन किया और देवी को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पुकारा, लक्ष्मी जी ने अपना वचन पूरा किया. उस दिन से यह व्रत इस दिन, उपरोक्त विधि से पूरी श्रद्वा से किया जाता है.

महालक्ष्मी व्रत के दौरान शाकाहारी भोजन करें

  • पान के पत्तों से सजे कलश में पानी भरकर मंदिर में रखें. कलश के ऊपर नारियल रखें
  • कलश के चारों तरफ लाल धागा बांधे और कलश को लाल कपड़े से सजाएं
  • श्री कलश पर कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं. माना जाता है, इससे पवित्रता और समृद्धि आती है
  • कलश में चावल और सिक्के डालें
  • श्री कलश को महालक्ष्मी के पूजास्थल पर रखें
  • कलश के पास हल्दी से कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति प्रतिष्ठित करें
  • इस दिन सोना खरीदने, हाथी पर रखने से पूजा का विशेष लाभ मिलता है
  • माता लक्ष्मी की मूर्ति के सामने श्रीयंत्र भी रखे
  • सोने-चांदी के सिक्के, मिठाई व फल भी रखें
  • माता लक्ष्मी के आठ रूपों की इन मंत्रों के साथ कुंकुम, चावल और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें

 

  •  धन लक्ष्मी मां,
  •  गज लक्ष्मी मां,
  •  वीर लक्ष्मी मां,
  •  ऐश्वर्या लक्ष्मी मां,
  •  विजय लक्ष्मी मां,
  • धान्य लक्ष्मी मां और
  •  संतान लक्ष्मी मां

इस दिन खरीदा गया सोना बढ़ता है आठ गुना

वैसे तो इस समय श्राद्ध पक्ष चल रहा है जिसमें नई चीजों की खरीददारी वर्जित होती है। लेकिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की महालक्ष्मी पूजा पर यह दिन शुभ माना गया है। इस तिथि को माता लक्ष्मी जी का विशेष वरदान मिला हुआ है। इस दिन पर सोना खरीदने का महत्व है। ऐसी मान्यता है  इस दिन खरीदा गया सोना आठ गुना से बढ़ता है और जीवन मे सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए हाथी पर सवार माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है

पूजन विधि

इस दिन पूजा स्थल पर हल्दी से कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें और मूर्ति के सामने श्रीयंत्र, सोने-चांदी के सिक्के और फल फूल रखें। इसके बाद माता लक्ष्मी के आठ रूपों की मंत्रों के साथ कुंकुम, चावल और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें।

MahaLakshmi Vrat Katha, Pujan Vidhi

Pitru Paksha 2018 dates

Pitru Paksha 2018 dates

पितृ पक्ष 2018

24 सितंबर से 8 अक्तूबर

पूर्णिमा श्राद्ध – 24 सितंबर 2018

सर्वपितृ अमावस्या – 8 अक्तूबर 2018

पितृ पक्ष का महत्व

पौराणिक ग्रंथों में वर्णित किया गया है कि देवपूजा से पहले जातक को अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिये। पितरों के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में जीवित रहते हुए घर के बड़े बुजूर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध कर्म किये जाते हैं। इसके पिछे यह मान्यता भी है कि यदि विधिनुसार पितरों का तर्पण न किया जाये तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती और उनकी आत्मा मृत्युलोक में भटकती रहती है। पितृ पक्ष को मनाने का ज्योतिषीय कारण भी है। ज्योतिषशास्त्र में पितृ दोष काफी अहम माना जाता है। जब जातक सफलता के बिल्कुल नज़दीक पंहुचकर भी सफलता से वंचित होता हो, संतान उत्पत्ति में परेशानियां आ रही हों, धन हानि हो रही हों तो ज्योतिषाचार्य पितृदोष से पीड़ित होने की प्रबल संभावनाएं बताते हैं।

पूर्णिमा का श्राद्ध पितृ पक्ष 2018

सोमवार को प्रात: 7.17 बजे से पूर्णिमा का प्रारम्भ हो जाएगा। इसके बाद आप पूर्णिमा का श्राद्ध कर सकते हैं। अश्विन मास का कृष्ण पक्ष पितृ पक्ष को समर्पित है। इन सोलह दिनों में हमारे पूर्वज हमारे घरों पर आते हैं और तर्पण मात्र से ही तृप्त होते हैं। श्राद्ध पक्ष का प्रारम्भ भाद्रपद मास की पूर्णिमा से होता है।

क्यों कहते हैं कनागत पितृ पक्ष 2018

Pitru Paksha 2018 Pitru Paksha 2019 Pitru Paksha 2020 Dates

Pitru Paksha 2018 Pitru Paksha 2019 Pitru Paksha 2020 Dates

अश्विन मास के कृष्ण पक्ष के समय सूर्य कन्या राशि में स्थित होता है। सूर्य के कन्यागत होने से ही इन 16 दिनों को कनागत कहते हैं।

श्राद्ध क्या है पितृ पक्ष 2018

पितरों के प्रति तर्पण (पितृ पक्ष 2018)अर्थात जलदान पिंडदान पिंड के रूप में पितरों को समर्पित किया गया भोजन ही श्राद्ध कहलाता है। देव, ऋषि और पितृ ऋण के निवारण के लिए श्राद्ध कर्म है। अपने पूर्वजों का स्मरण करने और उनके मार्ग पर चलने और सुख-शांति की कामना ही वस्तुत: श्राद्ध कर्म है।

 

सम्पूर्ण सत्यनारायण व्रत कथा एवं पूजन विधि

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पितृ पक्ष 2018