अपनी रक्षा के लिए शाबर सुमेरु मंत्र और शाबर सुरक्षा कवच
मंत्र विद्या का प्रयोग करने बाले को भारतीय भाषा में ओझा, गुनी या सयाना कहा जाता है I अलग-अलग स्थानों पर इन शब्दों का प्रयोग मंत्र शक्ति से कार्य करानेवाले व्यक्ति को संबोधित करने के लिए होता है I यह ओझा जब घर से बाहर झाड़ फूँक के लिए कहीं जाता है तो चलते समय या उस स्थान पर पहुँचकर सबसे पहलेअपने शरीर की रक्षा के लिए ‘शरीर रक्षा’ का मंत्र पढता है I यह इसलिए कि यदि उस स्थान पर कोई भूत प्रेतादि का उपद्रव है तो वह उसे हानि न पहुँचा सके I कभी-कभी ओझाओं में भी वैमनस्य हो जाता है एक-दूसरे को क्षति पहुँचाने के लिए वह ‘मूठ’ या अन्य तान्त्रिक प्रयोग कर बैठते हैं ऐसे में यदि शरीर रक्षा का मंत्र पढ़करअपने को पहले से ही सुरक्षित कर जाए तो मंत्र तंत्र का कोई भी कुप्रभाव शरीर को हानि नहीं पहुँचा सकेगा I
शरीर रक्षा शाबर सुमेरु मंत्र (१)
एक हज़ार बार जप कर लेने से निम्न मंत्रो की सिद्धि होती है . इसके बाद मात्र तीन बार पाठ करने से शरीर रक्षा होती है
ॐ नमः वज्र का कोठा,
जिसमें पिण्ड हमारा पैठा I
ईश्वर कुंजी, ब्रह्म का ताला,
मेरे आठो याम का,
यती हनुमन्त रखवाला I
शरीर रक्षा मंत्र (२)
उत्तर बांधो, दक्खिन बांधो, बांधो मरी मसानी
डायन भूत के गुण बांधो, बांधो कुल परिवार
नाटक बांधो, चटक बांधो, बांधो भुइयां बैताल
नजर गुजर देह बांधो, राम दुहाई फेरों I
शरीर रक्षा मंत्र (३)
जल बांधो, थल बांधो, बांधो अपनी काया I
सात सौ योगिनी बांधो, बांधो जगत की माया I
दुहाई कामरु कामक्षा नैना योगिनी की I
दुहाई गौरा पारवती की, दुहाई वीर मसान की I
विधि : इन रक्षा मंत्रो को सिद्ध करने की एक विधि यह भी है कि किसी पर्वकाल में इनमे से एक मंत्र को अधिक-से-अधिक जप लें I पर्वकाल में जप करने से यहसिद्ध हो जाते है जब शरीर रक्षा कि आवश्यकता हो तब तीन बार पढ़कर हाथ कि हथेली पर नौ बार फूँक मारे और हथेली को पूरे शरीर पर फिरा दें, इससे देह बंध जाएगी I
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