by Gaurav Arya | Oct 31, 2016 | English
संतोषी माता की आरती (Shri Santoshi Mata Ji Ki Aarti) जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता । अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता ॥ जय सुंदर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो । हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो ॥ जय गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे । मंद हँसत करूणामयी, त्रिभुवन जन...
by Gaurav Arya | Oct 31, 2016 | English
आरती कुंजबिहारी(Arti Kunj Bihari ki ) आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली । लतन में ठाढ़े बनमाली;भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,...
by Gaurav Arya | Oct 31, 2016 | English
श्री सरस्वती आरती (Shri Saraswati Aarti) कज्जल पुरित लोचन भारे, स्तन युग शोभित मुक्त हारे | वीणा पुस्तक रंजित हस्ते, भगवती भारती देवी नमस्ते॥ जय सरस्वती माता ,जय जय हे सरस्वती माता | दगुण वैभव शालिनी ,त्रिभुवन विख्याता॥ जय सरस्वती माता ,जय जय हे सरस्वती माता |...
by Gaurav Arya | Oct 31, 2016 | English
कालीमाता की आरती (Kali Mata Ji Aarti ) मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ,हाथ जोड तेरे द्वार खडे। पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेट धरेसुन।।1।। जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भडांर भरे। सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जै काली कल्याण करे ।।2।। बुद्धि विधाता तू जग माता...
by Gaurav Arya | Oct 31, 2016 | English
आरती बृहस्पति देवता की जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा । छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी । जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥ चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता । सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥ तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण...