Which rudraksha is best, Rudraksha price, Rudraksha benefits by Mukhi

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Which rudraksha is best for you?

One Mukhi Rudraksha

First a fall rudraksha is a fruit of god Shiva. One Mukhi Rudraksha is represented by Sun- the center of the Solar system around which all the planets revolve. This mukhi is effective controls the malefic effects of Sun and cure diseases of the right eye, head, ear, bowel, and bones. Psychologically the confidence, charisma, leadership qualities and prosperity of the person increases as the Sun is pleased with native.

Two Mukhi Rudraksha

The ruling planet of this Mukhi Rudraksha is the Moon. This effectively controls the malefic effects of the Moon and diseases of the left eye, kidney, intestines, etc, as a result, Emotionally, there is harmony in relationships.

Three Mukhi Rudraksha

The ruling planet of this Rudraksha is Mars which astrologically represent Agni or fire. Malefic effects are diseases of the blood, blood pressure, weakness, disturbed menstrual cycle, kidney, etc, as a result, other malefic effects are depression, negative and guilty feelings, inferiority complexes and these malefic effects can be lessened by wearing this mukhi.

Four Mukhi Rudraksha

Almost The ruling planet is Mercury, representing Goddess Saraswati and Vishnu. Malefic effects of Mercury include intellectual dullness, lack of grasping and understanding power, difficulty in effective communication and also neurotic conditions of the mind. 
This Mukhi nullifies the malefic effects of Mercury and pleases Goddess Saraswati and Lord Vishnu. It also governs logical and structural thinking.

Five Mukhi Rudraksha

The ruling planet of this Rudraksha is Jupiter. This mukhi is used to sublimate the malefic effects of Jupiter such as lack of peace, poverty, lack of harmony, etc. The native’s wisdom and intelligence shall increase.

Six Mukhi Rudraksha

The ruling planet of this Rudraksha is Venus. as a result, Venus governs genital organs, throat, valor, sexual pleasure, love music, etc. by these results wearing this Rudraksha you will get maximum pleasure.
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Retrograde Saturn in Different Houses

Retrograde Saturn in Different Houses

Therefore, Retrograde Saturn in Different Houses, retrograde Saturn in the 1st house

Retrograde Saturn in the 1st house

Ascendant: Retrograde Saturn in the 1st house shows that the individual did not develop flexibility in the previous life and set his own ways on the basis of his own ways on the basis of his personal opinion.

However, It may be borne in mind that even the Sign in which retrograde Saturn is posited has to have a telling effect on the native. The native will have problems with ego and thereby the individual would not have developed good character and personality. The native will have a tendency to be sober, serious and contemplative.

Retrograde Saturn in the 2nd house

Also, Saturn in retrogression posited in the 2nd house reflects that the native in the past life was highly materialistic, emphasizing solely on possession on self-centered attitude having no regard for the material aspect of others. Despite denials, limitations and disappointment, retrograde Saturn in the 2nd will enable the native to manage and set side sizeable earning by way of accumulation. The exertion undergone by the native would be remarkable.

Retrograde Saturn in the 3rd house

However, There was undoubtedly an avoidance of responsibility concerning brothers and sisters. The native’s mental attitude would have been wanting since he would not have made an effort for self-development and communicating with others.

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Saturn Retrograde in the 4th house

The failure would have been related to mother, education, residence etc. The native would have neglected or abused human feelings. Regardless of the effort required, the individual should establish proper home facilities and create a constructive atmosphere at home and surroundings.

5th house Saturn Retrograde

There is a possibility for denial of children, with a rare chance of limited progeny and that such a child can be differently abled. Such a native should cultivate the habit to be very good to young folks.

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In 6th House

Presence of retrograde Saturn in the 6th will make the native shirk responsibility and moreover, he would have earned the displeasure of the public, due to his negligence.

In 7th house Retrograde

Partnership in matrimony or in business would have gone haywire by lack of faith in each other. Carnal and material desire left in doldrums can force a person to carry forward the retrogression of Saturn in the 7th in the following birth. 

8th House Retrograde

A neglected pursuit of metaphysical teaching, higher truthlearning, astrology and so forth, and also having gained these, misusedthe knowledge would have resulted in Saturn occupying the 8th housein retrogression affecting the nature of life.

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Therefore Saturn Retrograde in 9th House

The philosophy of life had been left in the lurch while masquerading in the previous life with scant respect for dharma, leave alone karma.




Effects of venus in different houses in Hindi

Effects of venus in different houses in Hindi

Effects of venus in different houses in Hindi,Venus in 6th House

Venus in 6th House

1-शुक्र की दशा मेष राशि वालों अच्छी नहीं होती है। यदि कुण्डली में शुक्र छठें, आठवें, बारहवें व पाप ग्रहों से युक्त व दृष्ट हो व्यक्ति को शुक्र से सम्बन्धित कई रोगों का सामना करना पड़ता है।
2-अगर सप्तम भाव में बुध व शुक्र हो तो एक स्त्री होती है और सप्तमेश व द्वितीयेश शुक्र के साथ अथवा पाप ग्रहोे के साथ होकर छठे, आठवें व बारहवें भाव में स्थित हो तो एक स्त्री मर जाती है। फिर दूसरा विवाह होता है।
3-मिथुन लग्न हो, लग्न में बुध, शुक्र, केतु व राहु हो तथा सप्तमेश गुरू दूसरे स्थान में पाप ग्रह के साथ हो व शनि सातवें भाव को देख रहा हो तो दो विवाह होते है लेकिन दोनों स्त्रियॉ मर जाती है।
विवाह उतना ही जल्दी होता है
7-लग्नेश से शुक्र जितना नजदीक होता है विवाह उतना ही जल्दी होता है।
8-शुक्र व मंगल लग्न, चतुर्थ, छठें, सातवें, आठवें व बारहवें हो तो जातक का प्रेम विवाह होता है।
9-शुक्र मंगल के साथ छठें भाव में हो तो मनुष्य कामी होता है। शुक्र मिथुन या तुला राशि में हो तो स्त्री-पुरूष दोनों कामी होते है।
शुक्र ग्रह से होने वाले रोग
1-छठें भाव का मालिक शुक्र के साथ लग्न या अष्टम भाव में हो तो ऑख के रोग होते है।
2-सिंह राशि में सूर्य को शुक्र देख रहा हो तो पाइल्स रोग हो सकता है।
3-शुक्र अस्त हो, छठेें, आठवेे, बारहवेें भाव में हो तो मूत्र रोग, पथरी, वीर्य की कमी, कान रोग, शीघ्र पतन, स्वपन दोष व क्षय रोग आदि होते है।
4-शुक्र व चन्द्र अपने शत्रु के साथ हो तो व्यक्ति को कम सुनाई देता है।
मंगल तथा सप्तम में गुरू
5-लग्न में मंगल तथा सप्तम में गुरू व मंगल हो तो सिर में चोट-चपेट लग सकती है।
6-अष्टमेश पर शुक्र की दृष्टि तथा सूर्य के साथ शनि व राहु हो तो सिर का बड़ा आपरेशन होने की आशंका रहती है।
7-मेष या कर्क राशि में होने पर दॉतों में पायरिया रोग हो जाता है।
पाप ग्रहों से दृष्ट हो
8-शुक्र षष्ठेश होकर लग्न में हो व पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो जातक को मुख में सूजन हो सकती है। 12वें स्थान में शुक्र, पंचम, नवम में शनि व सप्तम में सूर्य हो दन्त रोग हो सकता है।
9-नीच राशि में शुक्र के साथ राहु हो तो कान में चोट लगती है एंव तृतीयेश शुक्र के साथ हो तो कम सुनाई देता है।
10-दशम स्थान में शुक्र व राहु एक साथ हो तो सर्प से भय रहता है। जानवरों से भी चोट-चपेट लग सकती है।

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Sagittarius Ascendant Vedic Astrology


Result of Shani Mahadasha in different different Antardasha

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शनि महादशा में विभिन्न अन्तर्दशा के फल

ज्योतिष में माना जाता है कि पूर्व जन्म के पाप-पुण्य का फल वर्तमान के ग्रहों की दशादि से प्रकट होता है। एेसे में अनिष्ट को रोकने एवं अच्छे फल के लिए दशाभुक्ति का ज्ञान होना जरूरी है। ज्योतिष ग्रन्थ जातक पारिजात के अनुसार किसी व्यक्ति के जीवन में मिलने वाले फल दशाआें से उसी प्रकार निर्धारित होते हैं, जैसे वर्ण व्यवस्था में भोग व्यवस्था होती है। ज्योतिष ग्रन्थ सारावली के अनुसार सभी ग्रह अपनी दशा मे अपने गुण-दोष के आधार पर शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं। ऐसे में पापग्रह माने जाने वाले शनि की दशाआें का विवेचन ज्योतिषियों ने गहन शोध एवं अनुभव के आधार पर किया है। एेसा इसलिए कि शनि अनुकूल होने पर सुख की झडी लगा देता है, तो प्रतिकूल होने पर भयंकर कष्ट देता है।

शनि की साढेसाती, ढैैैैया, कंटक, महादशा, अंतर्दशा और यहां तक कि प्रत्यंतर्दशा भी घातक होती है। शनि के प्रकोप से ही राजा विक्रमादित्य को भयंकर कष्ट भोगने पडे। भगवान राम को वनवास भोगना पडा। वैसे, शनि को न्याय का देवता कहा जाता है। अत: इसकी दशा इत्यादि में अच्छे ज्योतिष से परामर्श लेकर उचित उपाय किए जाएं तो शनिदेव का कोप कुछ शांत भी किया जा सकता है।

जानते है की शनि की महादशा के अन्तर्गत शनि, बुध, केतु, शुक्र, सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, राहु एवं बृहस्पति की अन्तर्दशाएं आती हैं। देखते हैं इन अन्तर्दशाआें के परिणाम-

शनि की अन्तर्दशा

शनि महादशा में जब शनि की अन्तर्दशा में जातक पर दु:खों यानी कष्टों का पहाड टूट पडता है। उसको बार-बार अनादर यानी अपमान का सामना करना पडता है। वह समाज विरोधी और घूमंतु हो जाता है। उसके कारण पत्नी-पुत्र दु:खी होते हैं। जातक लंबी बीमारियों से भी परेशान रहता है।

बुध की अन्तर्दशा

जब शनि महादशा में जब बुध क अन्तर्दशा आती है, तब जातक के भाग्य मेें वृद्धि होती है। सुख-संपत्ति और सम्मान में बढोतरी होती है। वह आनंद का अनुभव करता है। जातक सदाचार की ओर प्रवृत्त होता है। चित्तवृत्ति कोमल निर्मल हो जाती है।Shree Sharp Suktam Hindi, Sarpa suktam benefits

शनि में केतु की अन्तर्दशा

शनि महादशा में केतु की अन्तर्दशा में पत्नी और सन्तान से वैचारिक मतभेद उभरते हैं। जातक के मन में भय बढता है। पित्त एवं वातजनित बीमारियों से वह परेशान रहता है। बुरे-बुरे सपने देखता है और अनिद्रा का शिकार होता है। यानी उसे पूरी नींद नहीं आती। रातभर बुरे भाव मन में आते रहते हैं और आशंकाएं उभरती रहती हैं।

शुक्र की अन्तर्दशा

जब  शनि महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा में व्यक्ति के दु:खों का अंत होकर सुख मिलने लगता है। उसके संपर्क में उसके हित में सोचने वाले आते हैं। यश और सम्मान की प्राप्ति होती है। शत्रुआें का शमन होता है। पुत्र एवं कार्यक्षेत्र यानी प्रोफेशन एवं नौकरी से सुख प्राप्त होता है।

शनि में सूर्य की अन्तर्दशा

शनि महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा आने पर जातक को विभिन्न प्रकार के संकटों का सामना करता पडता है। पत्नी, पुत्र, सम्मान, यश, संपत्ति एवं आत्मविश्वास का नाश होता है। नेत्र एवं उदर रोग परेशान करते हैं। दरअसल, शनि और सूर्य घोर शत्रुु माने गए हैं। इसलिए शनि में सूर्य की अंतर्दशा कष्टकारी रहती है।

चन्द्रमा की अन्तर्दशा

जब शनि महादशा में चन्द्रमा की अन्तर्दशा में सुखों का क्षरण होता है यानी सुख में कमी आती है। जातक को पत्नी वियोग झेलना पड सकता है। आत्मीयजनों से संबंध विच्छेद की स्थितियां बनती हैं। व्यक्ति को वातजन्य बीमारी घेरती है। हालांकि धनागम होता है यानी पैसा आता है।Astro Shop

मंगल की अन्तर्दशा

शनि महादशा में ङ्कंगल क अन्तर्दशा जातक को स्थानांतरण करवाती है। दूसरे शब्दों में पत्नी, पुत्र, मित्र इत्यादि से दूर जाना पडता है। जातक भयभीत और आशंकति-सा रहता है। यश में कमी आती है।

राहु की अन्तर्दशा

जब शनि महादशा में राहु की अन्तर्दशा में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है यानी यह अंतर्दशा रोग लाती है। सरकार और शत्रु से परेशानी होती है। संपत्ति एवं यश की हानि होती है। हर काम में बाधा आती है।

बृहस्पति की अन्तर्दशा

शनि महादशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा आमतौर पर श्रेष्ठ फल प्रदान करती है। जातक का गृहस्थी सुख बढता है। स्थाई संपत्ति में वृद्धि होती है। पदोन्नति होती है एवं सम्मानजनक पद की प्राप्ति होती है। इस दशा में जरूरत पडने पर जातक को सत्ता का संरक्षण भी मिलता है। जातक के मन में वरिष्ठजनों एवं धर्म के प्रति आदरभाव बढता है। वैसे, शनि महादशा मेें विभिन्न ग्रहों की अन्तर्दशाआें के उपरोक्त फल जन्मकुंडली मेें ग्रहाेें
के पारस्परिक संबंधों पर निर्भर है। इसलिए जन्मकुंडली में यह देखकर ही फलादेश किया जाना चाहिए।Pitru Paksha 2018 Pitru Paksha 2019 Pitru Paksha 2020 Dates

शनि के प्रकोप से बचने के उपाय

शनि की साढे साती, ढैया, महादशा एवं अन्तर्दशा में शनि के प्रकोप से बचने के लिए कई उपाय किए जाते हैं। निम्नलिखित उपायों में से अपनी श्रद्धा एवं क्षमतानुसार कोई उपाय करके शनिदेव को शान्त करने का प्रयास किया जा सकता है :

1. किसी शु्क्ल पक्ष के शनिवार से शुरू कर वर्षभर हर शनिवार को बन्दरों और काले कुत्तों को लड्डू खिलाएं।

2. शनिवार को काली गाय के मस्तक पर रोली का तिलक लगा, सींगों पर मौळी बांधकर पूजन करने के बाद गाय की परिक्रमा कर उसे बूंदी के चार लड्डू खिलाएं।

3. हर शनिवार बन्दरों को मीठी खील, केला, काले चने एवं गुड खिलाएं।

4. हर शनिवार को काले कुत्ते को तेल से चुपडी रोटी मिठाई सहित खिलाएं।

5. शनिवार को व्रत रखें। नमक रहित भोजन से व्रत खोलें। सूर्यास्त के बाद हनुमान जी का पूजन दीपक में काले तिल डालकर तेल का दीपक प्रज्वलित करके करें।

6. शनिवार को पीपल के वृक्ष के चारों ओर सात बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटें। इस दौरान ॐ शं शनैश्चाराय नमः: मंंत्र का उच्चारण करते रहें।

7. शनिवार को कच्चे दूध में काले तिल डालकर शिवलिंग पर अभिषेक करें।

8. रोजाना प्रात: शनि के इन दसनामों का उच्चारण करना चाहिए-
कोणस्थ, पिंंगल, बभ्रु, कृष्ण:, रौद्रान्तक:, यम:, शौरि:, शनैश्चर:, मन्द:, पिप्पलादेव संस्तुत:।

9. सूर्यास्त के बाद पीपल के वृक्ष के नीचे ॐ शं शनैश्चाराय नमः:मंत्र का जप करते हुए सरसों के तेल में काले तिल डाल आटे का चौमुखा दीपक प्रज्वलित कर पीपल क सात परिक्रमा करें।

10. झूठ न बोलें, चरित्र सही रखें और मांस अाैैैर मदिरा का सेवन न करें।

11. मंगलवार का व्रत करें। प्रत्येक मंगलवार को हनुमान मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति के आगे के पैैैर पर लगेे सिंंदूर का तिलक कर 11 बार बजरंग बाण का पाठ करें।

Navagraha Dhanya List Daan of Navgrah Shanti

Navagraha Dhanya List Daan of Navgrah Shanti

Navagraha Dhanya List Daan of Navgrah Shanti like as बृहस्पति धनु या मीन राशि में, बुध मिथुन राशि में, शुक्र वृष या तुला राशि में, मंगल मेष या वृश्चिक राशि में

नवग्रहों के वर्जित दान एवं कार्य

अक्सर अपने दैनिक जीवन में प्राय: हम एक कहावत विभिन्न अर्थों में सुनते हैं कि “नेकी कर दरिया में डाल” या नेकी करो और भूल जाओ. कभी-कभी अच्छे शब्दों में भी सुनते हैं, कि हम किसी के लिए कितना ही अच्छा क्यों न करें लेकिन बदले में हमेशा बुराई ही हाथ लगती है |

एक व्यक्ति किसी गरीब को भोजन कराता है, तो खाने वाला बीमार पड जाता है. किसी नें किसी को धन उधार दिया तो उसकी वसूली के समय देनदार नें कोई गलत कदम उठा लिया और बेचारा लेनदार बिना वजह मुसीबत में फँस गया | किसी की मदद करने चले तो उल्टा स्वयं ही अपने लिए मुसीबत मोल ले बैठे | अमूमन ऎसी सैकडों प्रकार की घटनायें आये दिन किसी न किसी प्रकार से किसी न किसी के साथ घटती ही रहती हैं |

दरअसल यह सब निर्भर करता है हमारी जन्मकुँडली में बैठे ग्रहों पर, जो यह संकेत करते हैं कि किस वस्तु का दान या त्याग करना अथवा कौन से कार्य हमारे लिए लाभदायक होगें और कौन सी चीजों के दान/त्याग अथवा कार्यों से हमें हानि का सामना करना पडेगा |

इसकी जानकारी निम्नानुसार है

जो ग्रह जन्मकुंडली में उच्च राशि या अपनी स्वयं की राशि में स्थित हों

उनसे सम्बन्धित वस्तुओं का दान व्यक्ति को कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए.
सूर्य मेष राशि में होने पर उच्च तथा सिँह राशि में होने पर अपनी स्वराशि का होता है. अत: आपकी जन्मकुंडली में उक्त किसी राशि में हो तो

  • लाल या गुलाबी रंग के पदार्थों का दान न करें
  • गुड, आटा, गेहूँ, ताँबा आदि किसी को न दें
  • खानपान में नमक का सेवन कम करें. मीठे पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए

चन्द्र वृष राशि में उच्च तथा कर्क राशि में स्वगृही होता है, यदि आपकी जन्मकुंडली में हो तो

  • दूध, चावल, चाँदी, मोती एवं अन्य जलीय पदार्थों का दान कभी नहीं करें
  • माता अथवा मातातुल्य किसी स्त्री का कभी भूल से भी दिल न दुखायें अन्यथा मानसिक तनाव
  • अनिद्रा एवं किसी मिथ्या आरोप का भाजन बनना पडेगा
  • किसी नल, टयूबवेल, कुआँ, तालाब अथवा प्याऊ निर्माण में कभी आर्थिक रूप से सहयोग न करें

मंगल मेष या वृश्चिक राशि में हो तो स्वराशि का तथा मकर राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है

  • मसूर की दाल, मिष्ठान अथवा अन्य किसी मीठे खाद्य पदार्थ का दान नहीं करना चाहिए
  • घर आये किसी मेहमान को कभी सौंफ खाने को न दें अन्यथा वह व्यक्ति कभी किसी अवसर पर आपके खिलाफ ही कडुवे वचनों का प्रयोग करेगा
  • किसी भी प्रकार का बासी भोजन( अधिक समय पूर्व पकाया हुआ) न तो स्वयं खायें और न ही किसी अन्य को खाने के लिए दें

बुध मिथुन राशि में तो स्वगृही तथा कन्या राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है

यदि आपकी जन्मपत्रिका में बुध उपरोक्त वर्णित किसी स्थिति में है तो

  • हरे रंग के पदार्थ और वस्तुओं का दान नहीं करना चाहिए
  • साबुत मूँग, पैन-पैन्सिल, पुस्तकें, मिट्टी का घडा, मशरूम आदि का दान न करें अन्यथा सदैव रोजगार और धन सम्बन्धी समस्यायें बनी रहेंगी
  • न तो घर में मछलियाँ पालें और न ही मछलियों को कभी दाना डालें

बृहस्पति धनु या मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा कर्क राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है. ऎसी स्थिति में

  • पीले रंग के पदार्थों का दान वर्जित है
  • सोना, पीतल, केसर, धार्मिक साहित्य या वस्तुएं आदि का दान नहीं करना चाहिए. अन्यथा “घर का जोगी जोगडा, आन गाँव का सिद्ध” जैसी हालात होने लगेगी अर्थात मान-सम्मान में कमी रहेगी
  • घर में कभी कोई लतादार पौधा न लगायें

शुक्र वृष या तुला राशि में हो स्वराशि तथा मीन राशि में हो तो उच्च भाव का होता है

  • ऎसे व्यक्ति को श्वेत रंग के सुगन्धित पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए अन्यथा व्यक्ति के भौतिक सुखों में न्यूनता पैदा होने लगती है
  • नवीन वस्त्र, फैशनेबल वस्तुएं, कास्मेटिक या अन्य सौन्दर्य वर्धक सामग्री, सुगन्धित द्रव्य, दही, मिश्री, मक्खन, शुद्ध घी, इलायची आदि का दान न करें अन्यथा अकस्मात हानि का सामना करना पडता है
  • शनि यदि मकर या कुम्भ राशि में हो तो स्वगृही होता है तथा तुलाराशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है
  • काले रंग के पदार्थों का दान न करें
  • लोहा, लकडी और फर्नीचर, तेल या तैलीय सामग्री, बिल्डिंग मैटीरियल आदि का दान/त्याग न करें
  • भैंस अथवा काले रंग की गाय, काला कुत्ता आदि न पालें

राहु यदि कन्या राशि में हो तो स्वराशि का तथा वृष(ब्राह्मण/वैश्य लग्न में) एवं मिथुन(क्षत्रिय/शूद्र लग्न में) राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है

  • नीले, भूरे रंग के पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए
  • मोरपंख, नीले वस्त्र, कोयला, जौं अथवा जौं से निर्मित पदार्थ आदि का दान किसी को न करें अन्यथा ऋण का भार चढने लगेगा
  • अन्न का कभी भूल से भी अनादर न करें और न ही भोजन करने के पश्चात थाली में झूठन छोडें

केतु मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा वृश्चिक(ब्राह्मण/वैश्य लग्न में) एवं धनु (क्षत्रिय/शूद्र लग्न में) राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है

यदि आपकी जन्मपत्रिका में केतु उपरोक्त स्थिति में है तो

  • घर में कभी पक्षी न पालें अन्यथा धन व्यर्थ के कामों में बर्बाद होता रहेगा
  • भूरे, चित्र-विचित्र रंग के वस्त्र, कम्बल, तिल या तिल से निर्मित पदार्थ आदि का दान नहीं करना चाहिए
  • नंगी आँखों से कभी सूर्य/चन्द्रग्रहण न देंखें अन्यथा नेत्र ज्योति मंद पड जाएगी अथवा अन्य किसी प्रकार का नेत्र सम्बन्धी विकार उत्पन होने लगेगा.
Sagittarius Ascendant Vedic Astrology

Sagittarius Ascendant Vedic Astrology

As a Result, Sagittarius Ascendant Vedic Astrology mention below

First house Sun

Sun is lord of 9th trikona house and is posting in friend’s house. It indicates long journeys, learning, wisdom, prudence, fortunate with strangers, foreigner’s, wife’s relations and voyages. Interest in science, invention, law, philosophy or political economy. Such persons are wealthy, respectable, and bless with power and authority. Long life, strained relations with friends.

First house Moon

First of all, Moon The eighth lord in Lagna if not afflicted, one will be blessed with long life. The affliction of the stomach is indicating. Fond of art, adulterous, sweet spoken but spendthrift. Gain through lawsuits and matters connected with the deceased. Accumulation of wealth and gain through the business of others. Likelihood of some wounds on the body. Devoid of comforts from parents until a young age. If Moon is afflicting, then it indicates short life, death by irregularity, trouble, and loss for others.

First house Mars 

Therefore The lord of 5th and 12th houses in friend’s camp. The complexion will be like copper. Many enemies and love affairs. Wealthy and man of power and authority. Afflicted health. A propensity to pleasure, a troubled life, on the whole, secret sorrows, limitations. All these difficulties minimize through occult or spiritual practice. The danger of imprisonment or disablement.

First house Mars Mercury

Therefore Mercury is lord of 7th house posited here in Lagna in enemy’s camp respecting its own 7th house. Lord of 10th house in Lagna is good and will confer dignities, honors through merit, intelligent, good-natured and of good behavior. Wealthy and blessed with the comforts of life. High ambitions, gain through Govt.; unions, partnership, love of women and gain through them. Connection with the process of law. Such persons are found well versed in Mathematics and are connecting with medical Science. One thing. I will say that since Mercury is lord of two kendras and so malefic but when afflicted will give the reverse results as indicated all the above.


As a result, Jupiter is also lord of two Kendra houses, 1st, and 4th but being Lagna lord it is a benefit, when posited in own house in the Ascendant will confer wealth, respect, rank and authority to the native. One will be blessed with long life, fortunate inheritance, gain through land, property, power over enemies, owner of property and conveyance, good health, harmony and triumph over difficulties. Religious, generous and charitable. Judge the reverse if afflicted or combust.

In contrast, Venus Lord of 6th and 11th houses (both malefic) in the Ascendant is in enemy’s house. This position being in Lagna will give an average length of life. Will hold a rank under the Govt; as a result kidney trouble in old age. Difficulties and reversals in life and may face debt. But the native meets with real friends and supporters can overcome enemies and obstacles through the support of acquaintances. Fortunate actions and hopes are attaining.

Saturn in Ascendant

Therefore is an enemy’s camp and lord of 2nd and 3rd houses. “Being lord of the 2nd house gives good results but the lord of 3rd malefic. Saturn weak in this case is very benefited and makes the person millionaire” vide author’s book, “Saturn, a friend or Foe?”.
So it will make one wealthy, of good position in life, comforts from wife and children, respected but devoid from the comforts of brothers, worried and gloomy face. Average intelligence helpful to others, any part of the body will become defective and worries on this account. Gain through writings and learnings.

Rahu in Lagna

of this ascendant confers honors, wealth and favor through religious, educational or scientific affairs. It adds power to the personality and gives the opportunity to self-expression. Foreign travel, a good progeny, respect and honor in foreign countries in old age.

Ketu in the Ascendant

As a result, Ketu is not good and gives a short life unless affecting with Jupiter. Hence One is devoid from comforts of ancestral property. Tribulations and difficulties in life may endanger face and eyes.