Peer ko bulane ka mantra in Hindi

Peer ko bulane ka mantra in Hindi

Peer ko bulane ka mantra in Hindi

इबादत का मंत्र 

या ख्वाजा गरीब नवाज़  सरकार अल मदद 

ये अपने आप में चमत्कारिक है और इसका लगातार जाप करने से आप स्वयं पीर का दर्ज हासिल कर सकते है एक समय ऐसा आता है की आपको अजमेर शरीफ के मुरीदो के दर्शन प्राप्त होने लगेंगे  कई मंत्र आपको उनसे स्वयं मिलने लगेंगे |

जब जाप समाप्त करके उठने वाले हो तब ख्वाजा साहब को इस तरह सलाम पेश करे |

 साहब को  सलाम

शाहो के शाह को सलाम ,पीरने पीर को सलाम ,हिन्दल वली को सलाम आपके बुजुर्गाने दीं को सलाम , आपके चाहने वालो को सलाम , आपके पीर ओ मुर्शिद को सलाम 

जहां सभी तंत्रो में तीक्ष्ण सुलेमानी तंत्र को माना गया है क्यू के इस में सिद्धि जल्द और तीक्ष्ण होती है ऐसा नहीं है के बाकी तंत्र प्रभावकारी नहीं क्यू के तंत्र का अर्थ ही तंत्र है जहां मंत्रो से प्रार्थना की जाती है और तंत्र  होने के कारण समस्या का निवारण करता ही है क्यू के किरिया का अर्थ करना मतलव काम किया और हो गया इस लिए तंत्र दीनता नहीं सिखाता मतलव समस्या के आगे झुकना नहीं जहां एक बहुत ही प्रभाव कारी साधना दे रहा हु जो सुलेमानी साधना जैसी है|

 यह एक बहुत ही पाक पंज तन पाक का कलाम है इसे पूर्ण पावित्रता से करे, ये साधना आपको तंत्र बाधाओं से बचा कर रखेगी और आपको जीवन में सफलता का मार्ग दिखाएगी

जिस कमरे में आप साधना कर रहे हो उसे अशी तरह साफ करे पोचा वैगरा लगा कर जा धो ले फिर शूकल पक्ष के प्रथम जुम्मा को इस साधना को शुरू करे और 21 दिन करनी है

वस्त्र सफ़ेद पहने और सफ़ेद आसान का उपयोग करे  दिशा पशिम और इस तरह बैठे जैसे नवाज के वक़्त बैठा जाता है  सिर टोपी जा सफ़ेद रुमाल से ढक कर बैठे अगरवती लगा दे और साधना के वक़्त जलती रहनी चाहिए दिये की कोई जरूरत नहीं है फिर भी लगाना चाहे तो तेल का दिया लगा सकते है सर्व पर्थम गुरु पूजन कर आज्ञा ले

एक माला गुरु मंत्र

फिर एक माला गुरु मंत्र करे और निमन मंत्र की पाँच माला जप सफ़ेद हकीक माला से करे साधना के बीच बहुत अनुभव हो सकते है मन को सथिर रखते हुए जप पूर्ण करे जिस कमरे में साधना कर रहे हो वहां कोई शराब पीकर न आए इस बात का विशेष ख्याल रखे जप उल्टी माला से करे न माला हो तो एक घंटा करे|

Mata sham Kaur Mohini history

Mata sham Kaur Mohini history

देवी श्याम कौर मोहिनी साधना

यह साधना मोहिनी एकादशी को ,बृहस्पतिवार को,कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रात 10 बजे से शुरू करके 4 बजे तक सुबह के पूर्ण करें।

यह सिद्धि सात्विक है किंतु सिद्ध होने के बाद इसके प्रयोग में तामसिक चीजो की जरूरत भी पड़ सकती है जैसे साधक कोई गलत कार्य करता है।इसमें मदिरा,अंडा,मांस,चिता की राख का भी प्रयोग होता है।

इस सिद्धि में चौमुखा दिया जलाया जाता है।
भोग में लौंग, इलायची,2 मीठे पान,मीठे बतासे,थोड़े से चावल,तुलसी पत्ते,मिश्री,माखन ,आटे का मीठा हलवा ,मिठाई,फल रखे जाते है।
सुगंध में साधक को चमेली के फूल,अगरबत्ती ,धूपबत्ती,इत्र रखना चाहिये।

 

काला कलवा चौसठ वीर, मेरा कलवा भागा तीर जहाँ जहाँ भेजू

वहां वहां जावे मेरे मन की आस पुरवे अपना मारा आप ही ढावे चालत

बान मारुं मन सावे इतना काम मेरा न करावे, अपनी माँ का दूध लजावे

नक्षत्र (ज्योतिषीय सिद्धान्त)

Nandipur Shakti Peeth

मोहिनी  वशीकरण के लिए साबर मंत्र भी काफी असरकारी होता है। इसके प्रयोग के लिए कोई भी रविवार उपयुक्त है। विधि की शुरुआत रात बारह बजे शांत-एकांत कमरे या खुले में उत्तर दिशा की ओर लाल रंग का आसन बिछा कर की जाती है। आवश्यक सामाग्री के तौर पर दो लौंगी, गूगल या लौबान की अगरबत्ती, दीपक, सरसों का तेल, पांच गुलाब के फूल और पांच किस्म की मिठाई है।आसन पर बैठकर अपने सामने फूल, लौंग, मिठाई रखें और सरसो तेल का दीपक जलाने के बाद गूगल या लौबान की अगरबत्ती जलाई जाती है। पूजन के इस साधारण तरीके के बाद प्रिय के नाम 41 बार साबर मंत्र का जाप किया जाता है। मंत्र जाप के बाद लौंगों पर फूंक मारना जरूरी है। फिर लौंग को संभालकर रख ली जाती है, जबकि फूल और मिठइयों को नदी में बहा दिया जाता है।

ग्रहयोग और व्यवसाय निर्धारण 

Simple Tantric Remedies 

Karveer shakti Peeth

Urvashi Apsara Sadhna Deeksha 

Mahakal Bhairav Sadhana, Kaal bhairav mantra

Mahakal Bhairav Sadhana, Kaal bhairav mantra

भैरव आराधना के विशेष मंत्र
  1. ‘ॐ कालभैरवाय नम:।’
  2.  ‘ॐ भयहरणं च भैरव:।’
  3. ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्‍।’
  4. ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:।’
  5.  ‘ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं।’
उक्त समस्त मंत्र चमत्कारिक रूप से सिद्धि प्रदान करते हैं। इनका प्रयोग अति शुद्धता से करना चाहिए।
काल भैरव की आराधना के लिए मंत्र है- ।। ॐ भैरवाय नम:।।

भैरव आराधना 

 एकमात्र भैरव की आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है। आराधना का दिन रविवार और मंगलवार नियुक्त है। पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह को भैरव पूजा के लिए अति उत्तम माना गया है। उक्त माह के रविवार को बड़ा रविवार मानते हुए व्रत रखते हैं। आराधना से पूर्व जान लें कि कुत्ते को कभी दुत्कारे नहीं बल्कि उसे भरपेट भोजन कराएं। जुआ, सट्टा, शराब, ब्याजखोरी, अनैतिक कृत्य आदि आदतों से दूर रहें। दांत और आंत साफ रखें। पवित्र होकर ही सात्विक आराधना करें। अपवि‍त्रता वर्जित है।

kaal bhairav shabar mantra in hindi

भैरव तंत्र : योग में जिसे समाधि पद कहा गया है, भैरव तंत्र में भैरव पद या भैरवी पद प्राप्त करने के लिए भगवान शिव ने देवी के समक्ष 112 विधियों का उल्लेख किया है जिनके माध्यम से उक्त अवस्था को प्राप्त हुआ जा सकता है।
लोक देवता : लोक जीवन में भगवान भैरव को भैरू महाराज, भैरू बाबा, मामा भैरव, नाना भैरव आदि नामों से जाना जाता है। कई समाज के ये कुल देवता हैं और इन्हें पूजने का प्रचलन भी भिन्न-भिन्न है, जो कि विधिवत न होकर स्थानीय परम्परा का हिस्सा है। यह भी उल्लेखनीय है कि भगवान भैरव किसी के शरीर में नहीं आते।
पालिया महाराज : सड़क के किनारे भैरू महाराज के नाम से ज्यादातर जो ओटले या स्थान बना रखे हैं दरअसल वे उन मृत आत्माओं के स्थान हैं जिनकी मृत्यु उक्त स्थान पर दुर्घटना या अन्य कारणों से हो गई है। ऐसे किसी स्थान का भगवान भैरव से कोई संबंध नहीं। उक्त स्थान पर मत्था टेकना मान्य नहीं है।
भैरव चरित्र : भैरव के चरित्र का भयावह चित्रण कर तथा घिनौनी तांत्रिक क्रियाएं कर लोगों में उनके प्रति एक डर और उपेक्षा का भाव भरने वाले तांत्रिकों और अन्य पूजकों को भगवान भैरव माफ करें। दरअसल भैरव वैसे नहीं है जैसा कि उनका चित्रण किया गया है। वे मांस और मदिरा से दूर रहने वाले शिव और दुर्गा के भक्त हैं। उनका चरित्र बहुत ही सौम्य, सात्विक और साहसिक है।

bhairav raksha mantra

” ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम: “

साधना विधि : – रविवार की रात से इस काल भैरव साधना की शुरुआत करें  रात्रि को एक समय और एक स्थान सुनिश्चित कर प्रतिदिन मंत्र जप का द्रढ़ संकल्प लेकर अपनी साधना शुरू करें।

 

Goga Maharaj

Goga Maharaj

Gogaji (Hindi: गोगाजी) (Rajasthani: गुग्गो), also known as Jahar Veer Gogga is a folk deity, worshiped in northern states of India especially in Rajasthan, Himachal Pradesh Haryana, Uttarakhand, Punjab region Uttar Pradesh and Jammu and Kashmir. He is worshiped as a Veer among Hindus.

He is known as Gugga Ji (Gugga Gugga PirGugga JaharpirGugga ChohanGugga RanaGugga Vir,Raja Mandlik and various others) in Punjab, Haryana ,Himachal Pradesh and Jammu and Kashmir.

Although there are references to him in the folklore of Rajasthan, little historical knowledge of Gugga exists other than that he ruled the small kingdom of Dadrewa and was a contemporary of Prithviraj Chauhan.

Goga Maharaj Aarti

जय -जय जाहरवीर हरे,जय -जय गोगावीर हरे ,
धरती पर आकर के भक्तों के कष्ट हरे जय जय —-
जो कोई भक्ति करे प्रेम से , निसादिन करे प्रेम से ,भागे दुःख परे ,
विघ्न हरन  मंगल के दाता,जन -जन का कष्ट हरे ,
जेवर राव के पुत्र कहाए,रानी बाछल माता ,
बागड़ में जन्म लिया गुगा ने ,सब जय -जयकार करे ,जय जय ……
धर्म कि बेल बढाई निशदिन ,तपस्या रोज करे
दुष्ट जनों को दण्ड दिया ,जग में रहे आप खरे ,जय -जय ……
सत्य अहिंसा का व्रत धारा ,झुठ से सदा डरे
वचन भंग को बुरा समझ कर , घर से आप निकरे , जय-जय …
माडी में करी तपस्या अचरज सभी करे
चारों दिशाओं  से भगत आ रहे ,जोड़े हाथ खड़े ,जय-जय …….
अजर अमर है नाम तुम्हारा ,हे प्रसिद्ध जगत उजियारा
भुत  पिशाच निकट नहीं आवे , जो कोई जाहर  नाम गावे , जय जय ….
सच्चे मन से जो ध्यान लगावे ,सुख सम्पति घर आवे ,
नाम तुम्हारा जो कोई गावे ,जन्म जन्म के दुःख बिसरावे ,जय-जय …
भादो कृषण नोमी के दिन जो पुजे ,वह विघ्नों से नहीं डरे ,
जय-जय जाहर वीर हरे , जय श्री गोगा वीर हरे …..

Shoolini Mantra Benefits

Rajim Kumbh Mela

Goga Maharaj Photo

 

Guru Slokas

Madhumati Yogini Sadhana in Hindi

Madhumati Yogini Sadhana in Hindi

 मधुमति योगिनी- शुभ्र वर्ण वाली देवी अति सुंदर नाना प्रकार के अलंकारों से भूषित साधना के पश्चात सामने आकर किसी भी लोक की वस्तु प्रदान करती हैं। इनकी कृपा से पूर्ण आयु तथा अच्‍छा स्वास्‍थ्य प्राप्त होता है। राज्याधिकार प्राप्त होता है।

Madhumati Yogini Sadhana Mantra

मंत्र- ‘ॐ ह्रीं अनुरागिणी आगच्छ मैथुन प्रिये स्वाहा।’

Madhumati Yogini Sadhana Sankalp

ऊँ विष्णु र्विष्णुर्विष्णु : श्रीमद् भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्त्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेत वाराह कल्पै वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे युगे कलियुगे कलि प्रथमचरणे भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारत वर्षे भरत खंडे आर्यावर्तान्तर्गतैकदेशे —*— नगरे —**— ग्रामे वा बौद्धावतारे विजय नाम संवत्सरे श्री सूर्ये दक्षिणायने वर्षा ऋतौ महामाँगल्यप्रद मासोत्तमे शुभ भाद्रप्रद मासे शुक्ल पक्षे चतुर्थ्याम्तिथौ भृगुवासरे हस्त नक्षत्रे शुभ योगे गर करणे तुला राशि स्थिते चन्द्रे सिंह राशि स्थिते सूर्य वृष राशि स्थिते देवगुरौ शेषेषु ग्रहेषु यथा यथा राशि स्थान स्थितेषु सत्सु एवं ग्रह गुणगण विशेषण विशिष्टायाँ चतुर्थ्याम्शुभ पुण्य तिथौ — +– गौत्रः –++– अमुक दासो ऽहं मम आत्मनः मधुमति योगिनी पूजनं करिष्ये।इसके पश्चात्हाथ का जल किसी पात्र में छोड़ देवें।

संकल्प की आवश्कयता तभी है, जब पूजन को किसी विशेष समय तक किया जाये जैसे कुछ मास या कुछ वर्षो तक। अगर पूजन एक या दो बार करना है या कभीकभी करना है तो संकल्प की आवश्कयता नहीं है ।

पूजन करने से पूर्व गणपति के निम्न मंत्र को जापे और पूजन प्रारम्भ करें

 Urvashi Apsara Sadhna Deeksha

वक्रतुंडमहाकायसूर्यकोटिसमप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा

 

श्रीगणेशाय नमः

 

ऊँ गं गणपतये नम:”

Sade Sati Shani Remedies

क्षिप्र प्रसादाय नमः

 

श्रीम गम सौभाग्य गणपतये निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा

 

एकदंताय विद्यमहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दंती प्रचोदयात

Uchchhishta Ganapati Sadhna, Uchchhishta Ganapati Diksha

वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं वक्रतुण्डाय हुं

Madhumati Yogini Sadhana Diksha

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Urvashi Apsara Sadhna Deeksha

Urvashi Apsara Sadhna Deeksha

apsara sadhana

दीक्षा लेने के लिए निम्न जानकारी को दे

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पूजन के लिए स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ-सुथरे आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके बैठ जाएं। पूजन सामग्री अपने पास रख लें। बायें हाथ मे जल लेकर, उसे दाहिने हाथ से ढ़क लें। मंत्रोच्चारण के साथ जल को सिर, शरीर और पूजन सामग्री पर छिड़क लें या पुष्प से अपने को जल से छिडके।

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

(निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए शिखा/चोटी को गांठ लगाये / स्पर्श करे)

ॐ चिद्रूपिणि महामाये! दिव्यतेजःसमन्विते। तिष्ठ देवि! शिखामध्ये तेजोवृद्धिं कुरुष्व मे॥

(अपने माथे पर कुंकुम या चन्दन का तिलक करें)

ॐ चन्दनस्य महत्पुण्यं, पवित्रं पापनाशनम्। आपदां हरते नित्यं, लक्ष्मीस्तिष्ठति सर्वदा॥

(अपने सीधे हाथ से आसन का कोना जल/कुम्कुम थोडा डाल दे) और कहे

ॐ पृथ्वी! त्वया धृता लोका देवि! त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि! पवित्रं कुरु चासनम्॥

संकल्प:- दाहिने हाथ मे जल ले। मैं ……..अमुक……… गोत्र मे जन्मा,……… ………. यहाँ आपके पिता का नाम………. ……… का पुत्र ………………………..यहाँ आपका नाम…………………, निवासी…………………..आपका पता………………………. आज सभी देवी-देव्ताओं को साक्षी मानते हुए देवी तिलोत्त्मा अप्सरा की पुजा, गण्पति और गुरु जी की पुजा देवी तिलोत्त्मा अप्सरा के साक्षात दर्शन की अभिलाषा और प्रेमिका रुप मे प्राप्ति के लिए कर रहा हूँ जिससे देवी तिलोत्त्मा अप्सरा प्रसन्न होकर दर्शन दे और मेरी आज्ञा का पालन करती रहें साथ ही साथ मुझे प्रेम, धन धान्य और सुख प्रदान करें। जल और सामग्री को छोड़ दे।

गणपति का पूजन करें।

Puspadeh Apsara Sadhna Ganpati Pujan

ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात पर ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ॐ श्री गुरु चरणकमलेभ्यो नमः। ॐ श्री गुरवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि।

गुरु पुजन कर लें कम से कम गुरु मंत्र की चार माला करें या जैसा आपके गुरु का आदेश हो।

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नमोअस्तुते ॐ श्री गायत्र्यै नमः। ॐ सिद्धि बुद्धिसहिताय श्रीमन्महागणाधि पतये नमः। ॐ लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः। ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः। ॐ वाणीहिरण्यगर्भाभ्यां नमः। ॐ शचीपुरन्दराभ्यां नमः। ॐ सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः। ॐ सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नमः। ॐ भ्रं भैरवाय नमः का 21 बार जप कर ले।

अब अप्सरा का ध्यान करें और सोचे की वो आपके सामने हैं। दोनो हाथो को मिलाकर और फैलाकर कुछ नमाज पढने की तरफ बना लो। साथ ही साथ