Yantras and their meanings

Yantras and their meanings

Yantra is a mechanic

Shree Yantra

It is the most popular yantra dedicated to Goddess Lakshmi(Wealth). It helps in materialistic gains and makes a person rich by the positive diversion of the energies.

Kuber Yantra

This yantra is dedicated to Lord Kuber, it can be placed in your house or workplace(office) for financial gains in the property.

Lakshmi Yantra

This yantra like Shree Yantra is dedicated to Goddess Lakshmi and brings prosperity and removes poverty from life.

Mahamrithyunjay Yantra

This yantra belongs to Lord Shiva.

Saraswati Yantra

This yantra is dedicated to Goddess Saraswati(Knowledge). It will help the student to get good marks by increasing their concentration and memory.

Naveh / Navgriha Yantra

It is dedicated to all nine Planets. This yantra ward off the unfavorable influences caused by these planets and magnify the positive effects, making the life peaceful.

Vyapaar Vridhi Yantra

This is used to boost business. It is auspicious to keep these yantras in the office.

Yantras for each Planet

These Yantras are separately used to please all the Nine planets (Sun, Moon, Mercury, Mars, Jupiter, Venus, Saturn. Rahu (North node), Ketu. These Yantras removes/dilutes the bad effects of these particular planets.

Ganesh Yantra

This yantra is dedicated to God Ganesh which helps in fulfilling all the wishes and brings prosperity in life.

Evils and the Moon

Yantra Symbols

Rahu and Saturn in 8th house

Yantra For Enhancement

Yantra For Enhancement

Yantra (यन्त्र) (Sanskrit) (literally “machine, contraption” is a mystical diagram, mainly from the Tantric traditions of the Indian religions. They are used for the worship of deities in temples or at home; as an aid in meditation; used for the benefits given by their supposed occult powers based on Hindu astrology and tantric texts. They are also used for the adornment of temple floors, due mainly to their aesthetic and symmetric qualities. Specific yantras are traditionally associated with specific deities.

Representations of the yantra ( Yantra For Enhancement )in India have been considered to date back to 11,000-10,000 years BP. The Baghor stone, found in an upper-paleolithic context in the Son River valley, is considered the earliest example by Sharma, who was involved in the excavation of the stone. The triangular-shaped stone, which includes triangular engravings on one side, was found daubed in ochre, in what was considered a site related to worship. Worship of goddesses in that region was found to be practiced in a similar manner to the present day. Kenoyer, who was also involved in the excavation, considered it to be associated with Shakti.

  • Mantras Yantras frequently include mantras written in Sanskrit. Madhu Khanna writes that, “Yantra and mantra are always found in conjunction. Sound is considered as important as form in yantra, if not more important, since form in its essence is sound condensed as matter.”
  • Color Use of colors in traditional yantra is entirely symbolic, and not merely decorative or artistic. Each color is used to denote ideas and inner states of consciousness. White/Red/Black is one of the most significant color combinations, representing the three qualities or gunas of nature (prakriti). White represents sattwa or purity; red represents rajas or the activating quality; black represents tamas or the quality of inertia. Specific colors also represent certain aspects of the goddess. Not all texts give the same colors for yantras. Aesthetics and artistry are meaningless in a yantra if they are not based on the symbolism of the colors and geometric shapes.
  • Bindu The central point of traditional yantras have a bindu or point, which represents the main deity associated with the yantra. The retinue of the deity is often represented in the geometric parts around the center. The bindu in a yantra may be represented by a dot or small circle, or may remain invisible. It represents the point from which all of creation emanates. Sometimes, as in the case of the Linga Bhairavi yantra, the Bindu may be presented in the form of a linga.
  • Triangle Most Hindu yantras include triangles. Downward pointing triangles represent feminine aspect of God or Shakti, upward pointing triangles represent masculine aspect such as Shiva.
  • Hexagram Hexagrams as shown in yantras are two equilateral triangles intertwined, representing the union of male and female aspects of divinity, or Shiva and Shakti.
  • Lotus Mandalas and yantras both frequently include lotus petals, which represent purity and transcendence. Eight-petaled lotuses are common, but lotuses in yantras can include 2, 4, 8, 10, 12, 16, 24, 32, 100, 1000 or more petals.
  • Circle Many mandalas have three concentric circles in the center, representing manifestation.
  • Outer square Many mandalas have an outer square or nested squares, representing the earth and the four cardinal directions. Often they include sacred doorways on each side of the square.
  • Pentagram Yantras infrequently use a pentagram. Some yantras of Guhyakali have a pentagram, due to the number five being associated with Kali.
  • Octagon Octagons are also infrequent in yantras, where they represent the eight directions.


Writing Day Yantra For Enhancement

Write this Yantra on Holi, Deepawali, or any Guru Pushya Nakshatra, or any Hindu festival,

How to Write Yantra For Enhancement

Write this Yantra on AsthGandha, Keshar, Lal Chandan, on Bhojpatra by using Anar ki Kalam


Shiva Panchakshari Yantra

Shiva Panchakshari Yantra

Shiva Panchakshari Yantra

Shiva Panchakshari t

A gain in Progeny [Santan Prapti]
Finding suitable Bridegroom
Promotion and Advancement in the Job
Dhan Prapti [Gain of Money and Wealth]
Resolution of Problems and Obstacles
Spiritual Progress

yantra Shri Shani Yantram


Shri Ganesh Prashnavali Yantra श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र

Shri Ganesh Prashnavali Yantra श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र

Shri Ganesh Prashnavali Yantra श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र

ऊँ नम: शिवाय: मंत्र का जप करने के बाद 11 बार ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करें।

जिस कोष्ठक(खाने) पर कर्सर रुके, उस कोष्ठक में लिखे अंक के फलादेश को ही अपने अपने प्रश्न का उत्तर समझें।

1- आप जब भी समय मिले राम नाम का जप करें। आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।

2- आप जो कार्य करना चाह रहे हैं, उसमें हानि होने की संभावना है। कोई दूसरा कार्य करने के बारे में विचार करें। गाय को चारा खिलाएं।

3- आपकी चिंता दूर होने का समय आ गया है। कष्ट मिटेंगे और सफलता मिलेगी। आप रोज पीपल की पूजा करें।

4- आपको लाभ प्राप्त होगा। परिवार में वृद्धि होगी। सुख संपत्ति प्राप्त होने के योग भी बन रहे हैं। आप कुल देवता की पूजा करें।

5- आप शनिदेव की आराधना करें। व्यापारिक यात्रा पर जाना पड़े तो घबराएं नहीं। लाभ ही होगा।

6- रोज सुबह भगवान श्रीगणेश की पूजा करें। महीने के अंत तक आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी।

7- पैसों की तंगी शीघ्र ही दूर होगी। परिवार में वृद्धि होगी। स्त्री से धन प्राप्त होगा।

8- आपको धन और संतान दोनों की प्राप्ति के योग बन रहे हैं। शनिवार को शनिदेव की पूजा करने से आपको लाभ होगा।

9- आपकी ग्रह दिशा अनुकूल चल रही है। जो वस्तु आपसे दूर चली गई है वह पुन: प्राप्त होगी।

10- शीघ्र ही आपको कोई प्रसन्नता का समाचार मिलने वाला है। आपकी मनोकामना भी पूरी होगी। प्रतिदिन पूजन करें।

11- यदि आपको व्यापार में हानि हो रही है तो कोई दूसरा व्यापार करें। पीपल पर रोज जल चढ़ाएं। सफलता मिलेगी।

12- राज्य की ओर से लाभ मिलेगा। पूर्व दिशा आपके लिए शुभ है। इस दिशा में यात्रा का योग बन सकता है। मान-सम्मान प्राप्त होगा।

13- कुछ ही दिनों बाद आपका श्रेष्ठ समय आने वाला है। कपड़े का व्यवसाय करेंगे तो बेहतर रहेगा। सब कुछ अनुकूल रहेगा।

14- जो इच्छा आपके मन में है वह पूरी होगी। राज्य की ओर से लाभ प्राप्ति का योग बन रहा है। मित्र या भाई से मिलाप होगा।

15- आपके सपने में स्वयं को गांव जाता देंखे तो शुभ समाचार मिलेगा। पुत्र से लाभ मिलेगा। धन प्राप्ति के योग भी बन रहे हैं।

16- आप देवी मां पूजा करें। मां ही सपने में आकर आपका मार्गदर्शन करेंगी। सफलता मिलेगी।

17- आपको अच्छा समय आ गया है। चिंता दूर होगी। धन एवं सुख प्राप्त होगा।

18- यात्रा पर जा सकते हैं। यात्रा मंगल, सुखद व लाभकारी रहेगी। कुलदेवी का पूजन करें।

19- आपके समस्या दूर होने में अभी करीब डेढ़ साल का समय शेष है। जो कार्य करें माता-पिता से पूछकर करें। कुल देवता व ब्राह्मण की सेवा करें।

20- शनिवार को शनिदेव का पूजन करें। गुम हुई वस्तु मिल जाएगी। धन संबंधी समस्या भी दूर हो जाएगी।

21- आप जो भी कार्य करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। विदेश यात्रा के योग भी बन रहे हैं। आप श्रीगणेश का पूजन करें।

22- यदि आपके घर में क्लेश रहता है तो रोज भगवान की पूजा करें तथा माता-पिता की सेवा करें। आपको शांति का अनुभव होगा।

23- आपकी समस्याएं शीघ्र ही दूर होंगी। आप सिर्फ आपके काम में मन लगाएं और भगवान शंकर की पूजा करें।

24- आपके ग्रह अनुकूल नहीं है इसलिए आप रोज नवग्रहों की पूजा करें। इससे आपकी समस्याएं कम होंगी और लाभ मिलेगा।

25- पैसों की तंगी के कारण आपके घर में क्लेश हो रहा है। कुछ दिनों बाद आपकी यह समस्या दूर जाएगी। आप मां लक्ष्मी का पूजन रोज करें।

26- यदि आपके मन में नकारात्मक विचार आ रहे हैं तो उनका त्याग करें और घर में भगवान सत्यनारायण का कथा करवाएं। लाभ मिलेगा।

27- आप जो कार्य इस समय कर रहे हैं वह आपके लिए बेहतर नहीं है इसलिए किसी दूसरे कार्य के बारे में विचार करें। कुलदेवता का पूजन करें।

28- आप पीपल के वृक्ष की पूजा करें व दीपक लगाएं। आपके घर में तनाव नहीं होगा और धन लाभ भी होगा।

29- आप प्रतिदिन भगवान विष्णु, शंकर व ब्रह्मा की पूजा करें। इससे आपको मनचाही सफलता मिलेगी और घर में सुख-शांति रहेगी।

30- रविवार का व्रत एवं सूर्य पूजा करने से लाभ मिलेगा। व्यापार या नौकरी में थोड़ी सावधानी बरतें। आपको सफलता मिलेगी।

31- आपको व्यापार में लाभ होगा। घर में खुशहाली का माहौल रहेगा और सबकुछ भी ठीक रहेगा। आप छोटे बच्चों को मिठाई बांटें।

32- आप व्यर्थ की चिंता कर रहे हैं। सब कुछ ठीक हो रहा है। आपकी चिंता दूर होगी। गाय को चारा खिलाएं।

33- माता-पिता की सेवा करें, ब्राह्मण को भोजन कराएं व भगवान श्रीराम की पूजा करें। आपकी हर अभिलाषा पूरी होगी।

34- मनोकामनाएं पूरी होंगी। धन-धान्य एवं परिवार में वृद्धि होगी। कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाएं।

35- परिस्थितियां आपके अनुकूल नहीं है। जो भी करें सोच-समझ कर और अपने बुजुर्गो की राय लेकर ही करें। आप भगवान दत्तात्रेय का पूजन करें।

36- आप रोज भगवान श्रीगणेश को दुर्वा चढ़ाएं और पूजन करें। आपकी हर मुश्किल दूर हो जाएंगी। धैर्य बनाएं रखें।

37- आप जो कार्य कर रहे हैं वह जारी रखें। आगे जाकर आपको इसी में लाभ प्राप्त होगा। भगवान विष्णु का पूजन करें।

38- लगातार धन हानि से चिंता हो रही है तो घबराइए मत। कुछ ही दिनों में आपके लिए अनुकूल समय आने वाला है। मंगलवार को हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करें।

39- आप भगवान सत्यनारायण की कथा करवाएं तभी आपके कष्टों का निवारण संभव है। आपको सफलता भी मिलेगी।

40- आपके लिए हनुमानजी का पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। खेती और व्यापार में लाभ होगा तथा हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी।

41- आपको धन की प्राप्ति होगी। कुटुंब में वृद्धि होगी एवं चिंताएं दूर होंगी। कुलदेवी का पूजन करें।

42- आपको शीघ्र सफलता मिलने वाली है। माता-पिता व मित्रों का सहयोग मिलेगा। खर्च कम करें और गरीबों का दान करें।

43- रुका हुआ कार्य पूरा होगा। धन संबंधी समस्याएं दूर होंगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। सोच-समझकर फैसला लें। श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं।

44- धार्मिक कार्यों में मन लगाएं तथा प्रतिदिन पूजा करें। इससे आपको लाभ होगा और बिगड़ते काम बन जाएंगे।

45- धैर्य बनाएं रखें। बेकार की चिंता में समय न गवाएं। आपको मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। ईश्वर का चिंतन करें।

46- धार्मिक यात्रा पर जाना पड़ सकता है। इसमें लाभ मिलने की संभावना है। रोज गायत्री मंत्र का जप करें।

47- प्रतिदिन सूर्य को अध्र्य दें और पूजन करें। आपको शत्रुओं का भय नहीं सताएगा। आपकी मनोकामना पूरी होगी।

48- आप जो कार्य कर रहे  हैं वही करते रहें। पुराने मित्रों से मुलाकात होगी जो आपके लिए फायदेमंद रहेगी। पीपल को रोज जल चढ़ाएं।

49- अगर आपकी समस्या आर्थिक है तो आप रोज श्रीसूक्त का पाठ करें और लक्ष्मीजी का पूजा करें। आपकी समस्या दूर होगी।

50- आपका हक आपको जरुर मिलेगा। आप घबराएं नहीं बस मन लगाकर अपना काम करें। रोज पूजा अवश्य करें।

51- आप जो व्यापार करना चाहते हैं उसी में सफलता मिलेगी। पैसों के लिए कोई गलत कार्य न करें। आप रोज जरुरतमंद लोगों को दान-पुण्य करें।

52- एक महीने के अंदर ही आपकी मुसीबतें कम हो जाएंगी और सफलता मिलने लगेगी। आप कन्याओं को भोजन कराएं।

53- यदि आप विदेश जाने के बारे में सोच रहे हैं तो अवश्य जाएं। इसी में आपको सफलता मिलेगी। आप श्रीगणेश का आराधना करें।

54- आप जो भी कार्य करें किसी से पुछ कर करें अन्यथा हानि हो सकती है। विपरीत परिस्थिति से घबराएं नहीं। सफलता अवश्य मिलेगी।

55- आप मंदिर में रोज दीपक जलाएं, इससे आपको लाभ मिलेगा और मनोकामना पूरी होगी।

56- परिजनों की बीमारी के कारण चिंतित हैं तो रोज महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। कुछ ही दिनों में आपकी यह समस्या दूर हो जाएगी।

57- आपके लिए समय अनुकूल नहीं है। अपने कार्य पर ध्यान दें। प्रमोशन के लिए रोज गाय को रोटी खिलाएं।

58- आपके भाग्य में धन-संपत्ति आदि सभी सुविधाएं हैं। थोड़ा धैर्य रखें व भगवान में आस्था रखकर लक्ष्मीजी को नारियल चढ़ाएं।

59- जो आप सोच रहे हैं वह काम जरुर पूरा होगा लेकिन इसमें किसी का सहयोग लेना पड़ सकता है। आप शनिदेव की उपासना करें।

60- आप अपने परिजनों से मनमुटाव न रखें तो ही आपको सफलता मिलेगी। रोज हनुमानजी के मंदिर में चौमुखी दीपक लगाएं।

61- यदि आप अपने करियर को लेकर चिंतित हैं तो श्रीगणेश की पूजा करने से आपको लाभ मिलेगा।

62- आप रोज शिवजी के मंदिर में जाकर एक लोटा जल चढ़ाएं और दीपक लगाएं। आपके रुके हुए काम हो जाएंगे।

63- आप जिस कार्य के बारे में जानना चाहते हैं वह शुभ नहीं है उसके बारे में सोचना बंद कर दें। नवग्रह की पूजा करने से आपको सफलता मिलेगी।

64- आप रोज आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं। आपकी हर समस्या का निदान स्वत: ही हो जाएगा।

मसानी मंत्र माता मसानी का मंत्र


Masan Rog Nivaran Yantra

Masan Rog Nivaran Yantra

What is Masan

How it is done and the result: In the ‘Masan’, the cremation ground of the cremation is converged with black mantras and given to the person by mixing things in the food. This ash is always in the stomach of that person if they do not treat any of them. Because of this ash in the stomach, a person can be constantly stomachache. It also affects the mind and the person starts behaving in a weird way. Every day he becomes weak. The person can be mad (mentally deranged) and he may also die in some days or months. In a particular kind of person, a person dies in 40 days if nothing is done.

Write this Yantra on Silver Plate by using Samshan Ash and put near the Patient.


Kundalini Yantra

Kundalini Yantra

A yantra is a geometrical pattern made of several concentric figures (squares, circles, lotuses, triangles, point). The point (bindu) at the center of the yantra signifies unity, the origin, the principle of manifestation and emanation. A yantra is the yogic equivalent of the Buddhist mandala.

When these concentric figures are gradually growing away from its center (bindu) in stages, this is for human beings a symbol of the process of macrocosmic evolution.

When they are gradually growing towards its center, this is for human beings a symbol of the process of microcosmic involution.