Narsingh Jayanti 2018: जानें तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और बीज मंत्र

Narsingh Jayanti 2018: जानें तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और बीज मंत्र

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नरसिंह जयंती मनाई जाती है. भगवान नरसिंह को नृसिंह भी कहा जाता है. पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार नृसिंंह भगवान विष्णु के अवतार हैं. नरसिंह अवतार लेकर भगवान विष्णु ने दैत्यों के राजा और महाशक्तिशाली हिरण्यकशिपु का वध किया था. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को ही भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था, इसलिए इस दिन को नरसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है. इस बार नरसिंह जयंती 28 अप्रैल को है.

महत्व

नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य और आधा शेर का शरीर धारण किया था. नरसिंह जयंती का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है. इस दिन विधिवत पूजा और उपवास रखने से शत्रुओं का नाश होता है. मां लक्ष्मी का आर्शीवाद प्राप्त होता है और जीवन में कोई कष्ट नहीं होता. इस दिन भगवान नरसिंह के साथ मां लक्ष्मी की पूजा भी करनी चाहिए. नरसिंह भगवान को प्रसन्न करने के लिए जातक मंत्रों का उच्चारण करते हैं.

शुभ मुहूर्त

इस साल नरसिंह जयंती 28 अप्रैल 2018, शनिवार को मनाई जाएगी.

मध्याह्न संकल्प का शुभ मुहूर्त: 11:00 से 01:37
सायंकाल पूजन का समय: 04:13 से 06:50
पूजा की अवधि: 2 घंटा 36 मिनट

भगवान नृसिंह का बीज मंत्र

नृसिंह मंत्र से तंत्र मंत्र बाधा, भूत पिशाच भय, अकाल मृत्यु, असाध्य रोग आदि से छुटकारा मिलता है तथा जीवन में शांति की प्राप्ति होती है. ‘श्रौं’/ क्ष्रौं (नृसिंह बीज) मंत्र का 40 दिनों तक जाप करें. आपकी सारी इच्छाएं पूरी होंगी. ध्यान रहे कि इस मंत्र का जाप रात में ही करें और जाप से पहले एक घी का दीपक जला लें.

पूजा विधि

– नरसिंह जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. भगवान नरसिंह और लक्ष्मीजी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें.

– इसके बाद वेद मंत्रों का उच्चारण करें. भगवान नृसिंह की पूजा के लिए फल, पुष्प, पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल, अक्षत व पीला वस्त्र रखें.

– नरसिंह जयंती के दिन हवन करना शुभ होता है. पूजन और हवन में गंगाजल, काले तिल, पंच गव्य आदि का प्रयोग जरूर करें.

– कुश के आसन पर बैठकर नृसिंह भगवान के मंत्र का जप करें. यदि आपके पास रुद्राक्ष की माला है तो उसी से जाप करें. इस बात का भी ध्यान रखें कि मंत्र का जाप शांति में ही करना चाहिए.