Sawan Somvar 2019 start date in Hindi

Sawan Somvar 2019 start date in Hindi

Sawan Somvar 2019 start date in Hindi

सावन के चार सोमवार

22 जुलाई: सावन का पहला सोमवार।

29 जुलाई: सावन का दूसरा सोमवार।

05 अगस्त: सावन का तीसरा सोमवार।

12 अगस्त: सावन का चौथा सोमवार।

सावन के चार मंगलवार

23 जुलाई: सावन का पहला मंगलवार।

30 जुलाई: सावन का दूसरा मंगलवार।

06 अगस्त: सावन का तीसरा मंगलवार।

13 अगस्त: सावन का चौथा मंगलवार।

देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु के 4 मास तक क्षीर सागर में शयन के दौरान भगवान शिव इस जगत के पालनहार होते हैं। भगवान शिव का प्रिय मास सावन भी इन्हीं चार मासों में आता है। इस वर्ष सावन मास का प्रारंभ 17 जुलाई दिन बुधवार से हो रहा है। 15 अगस्त दिन गुरुवार को सावन मास का अंतिम दिन होगा। इस वर्ष सावन मास पूरे 30 दिन का है।

इस वर्ष सावन मास में चार सोमवार और चार मंगलवार पड़ रहे हैं। सावन के सोमवार व्रत से भगवान शिव को प्रसन्न कर मनचाहा आर्शीवाद प्राप्त किया जाता है, वहीं सावन का मंगलवार माता पार्वती के लिए समर्पित होता है, इस दिन माता पार्वती की पूजा कर जीवन में कल्याण और मंगल की प्राप्ति होती है। भगवान शिव की आराधना से संतान, वर, धन, मोक्ष आदि की प्राप्ति होती हैं।

 

Budha Purnima 2019 Importance of Budha Purnima

Budha Purnima 2019 Importance of Budha Purnima

बुद्ध पूर्णिमा 2019

पूरी दुनिया महात्मा बुद्ध को सत्य की खोज के लिये जाना जाता है। राजसी ठाठ बाट छोड़कर सिद्धार्थ सात सालों तक सच को जानने के लिये वन में भटकते रहते हैं। उसे पाने के लिये कठोर तपस्या करते हैं और सत्य को खोज निकालते हैं। फिर उस संदेश को पूरी दुनिया तक ले जाते हैं। सबको मानवता का पाठ पढ़ाते हैं, सृष्टि को समझने की एक नई नज़र पैदा करते हैं। दु:खों का कारण और निवारण बताते हैं।

भगवान बुद्ध के जन्म, बुद्धत्व की प्राप्ति व महापरिनिर्वाण का दिन

ऐसी महान आत्मा जिन्हें आज भगवान बुद्ध कहा जाता है का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा को हुआ। इसी कारण वैशाख मास की इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। लेकिन बुद्ध पूर्णिमा का संबंध बुद्ध के साथ केवल जन्म भर का नहीं है बल्कि इसी पूर्णिमा तिथि को वर्षों वन में भटकने व कठोर तपस्या करने के पश्चात बोधगया में बोधिवृक्ष नीचे बुद्ध को सत्य का ज्ञान हुआ। कह सकते हैं उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति भी वैशाख पूर्णिमा को हुई। इसके पश्चात महात्मा बुद्ध ने अपने ज्ञान के प्रकाश से पूरी दुनिया में एक नई रोशनी पैदा की और वैशाख पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। कुल मिलाकर जन्म, सत्य का ज्ञान और महापरिनिर्वाण के लिये भगवान गौतम बुद्ध को एक ही दिन हुआ। वैशाख पूर्णिमा के दिन।

स्नान का महत्त्व

हिंदुओं में हर महीने की पूर्णिमा विष्णु भगवान को समर्पित होती है. इस दिन तीर्थ स्थलों में गंगा स्नान का लाभदायक और पाप नाशक माना जाता है. लेकिन वैशाख पूर्णिमा का अपना-अलग ही महत्व है. इसका कारण यह बताया जाता है‍ कि इस माह होने वाली पूर्णिमा को सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होता है. इतना ही नहीं चांद भी अपनी उच्च राशि तुला में होता है. कहते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन लिया स्नान कई जन्मों के पापों का नाश करता

बुद्ध पूर्णिमा 2019

18 मई

पूर्णिमा तिथि आरंभ – 04:10 (18 मई 2019)

पूर्णिमा तिथि समाप्त – 02:41 (19 मई 2019

 

Retrograde Saturn in Different Houses

Mahavir Jayanti 2019 Anmol Vichar of Mahavir

Mahavir Jayanti 2019 Anmol Vichar of Mahavir

Mahavir Jayanti 2019 Anmol Vichar of Mahavir

About The Mahavir Jayanti

आज 17 अप्रैल को महावीर जयंती का पर्व पूरे देश में मनाया जा रहा है। महावीर जयंती जैन समुदाय का सबसे प्रमुख त्योहार है। महावीर स्वामी का जन्म दिवस चैत्र की शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है।

भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, जिन्होंने दुनिया को सत्य और अहिंसा का संदेश दिया। एक राज परिवार में जन्म लेने वाले वर्धमान ने राज-पाठ, परिवार, धन-संपदा छोड़कर युवावस्था में ही लोगों को सत्य, अहिंसा और प्रेम का मार्ग दिखाया।

30 वर्ष की आयु में ज्ञान के लिए घर छोड़ा
वर्धमान ने 30 वर्ष की आयु में ज्ञान प्राप्त करने के लिए घर-परिवार छोड़ दिया और सत्य, अहिंसा और प्रेम की शक्ति को महसूस किया। वर्धमान में क्षमा करने का एक अद्भुत गुण था और कहा जाता है कि क्षमा वीरस्य भूषणम। जिसके बाद उन्हें महावीर कहा जाने लगा। तीर्थंकर महावीर ने अपने सिद्धांतों को जनमानस के बीच रखा। उन्होंने ढोंग, पाखंड, अत्याचार, अनाचारत व हिंसा को नकारते हुए दृढ़तापूर्वक अहिंसक धर्म का प्रचार किया।

महावीर ने समाज को अपरिग्रह, अनेकांत और रहस्यवाद का मौलिक दर्शन समाज को दिया। कर्मवाद की एकदम मौखिक और वैज्ञानिक अवधारणा महावीर ने समाज को दी। उस समय भोग-विलास एवं कृत्रिमता का जीवन ही प्रमुख था, मदिरापान, पशुहिंसा आदि जीवन के सामान्य कार्य थे। बलिप्रथा ने धर्म के रूप को विकृत कर दिया था।

Anmol Vichar of Mahavir

1. मनुष्य के दुखी होने की वजह खुद की गलतियां ही हैं जो मनुष्य अपनी गलतियों पर काबू पा सकता है वही मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति भी कर सकता है।

2. आपात स्थिति में मन को डगमगाना नहीं चाहिए।

3. आत्मा अकेले आती है, अकेले चली जाती है, न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है।

4. खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है।

5. आपने कभी किसी का भला किया हो तो उसे भूल जाओ और कभी किसी ने आपका बुरा किया हो तो उसे भूल जाओ।

Chaitra Navratri 2019: Navaran Mantra Sadhna At Navratri Pujan

Shree Sharp Suktam Hindi, Sarpa suktam benefits

Ramnavmi 2019: Pujan Time and Importance

Ramnavmi 2019: Pujan Time and Importance

Ramnavmi 2019: Pujan Time and Importance

इस दिन विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है. भक्‍त अपने आराध्‍य मर्यादा पुरुषोत्तम राम के लिए दिन भर उपवास रखते हैं. घरों में रामलाल के जन्‍मोत्‍सव के मौके पर उन्‍हें पालने में झुलाया जाता है और विशेष रूप से खीर का भोग लगाने की परंपरा है. इसी दिन चैत्र नवरात्रि का नौवां यानी कि अंतिम दिन होता है जिसका समापन कन्‍या पूजन के साथ किया जाता है. इस दिन हजारों की संख्‍या में भक्‍त भगवान राम की जन्‍म स्‍थली अयोध्‍या पहुंचर सरयू नदी में स्‍नान करते हैं. मान्‍यता है कि इस दिन सरयू नदी में स्‍नान करने से सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं और भक्‍तों को भगवान राम की असीम कृपा प्राप्‍त होती है. कहा जाता है कि राम नवमी के दिन भगवान राम की विधि-विधान से पूजा करने पर मोक्ष की प्राप्‍ति होती है.

राम नवमी की तिथि और शुभ मुहूर्त 

नवमी तिथि प्रारंभ: 13 अप्रैल 2019 को सुबह 08 बजकर 15 मिनट से
नवमी तिथि समाप्‍त: 14 अप्रैल 2019 को सुबह 06 बजकर 04 मिनट तक
नवमी पूजन का शुभ मुहूर्त: 13 अप्रैल 2019 को सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक

राम नवमी की पूजन विधि 

– ब्रह्म मुहूर्त में स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें.
– अब भगवान राम का नाम लेते हुए व्रत का संकल्‍प लें.
– अब घर के मंदिर में राम दरबार की तस्‍वीर या मूर्ति की स्‍थापना कर उसमें गंगाजल छिड़कें.
– अब तस्‍वीर या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर रखें.
– अब रामलला की मूर्ति को पालने में बैठाएं.
– अब रामलला को स्‍नान कराकर वस्‍त्र और पाला पहनाएं.
– इसके बाद रामलला को मौसमी फल, मेवे और मिठाई समर्पित करें. खीर का भोग लगाना अति उत्तम माना जाता है.
– अब रामलला को झूला झुलाएं.
– इसके बाद धूप-बत्ती से उनकी आरती उतारें.
– आरती के बाद रामायण और राम रक्षास्‍त्रोत का पाठ करें.
– अब नौ कन्‍याओं को घर में बुलाकर उनको भोजन कराएं. साथ ही यथाशक्ति उपहार और भेंट देकर विदा करें.
– इसके बाद घर के सभी सदस्‍यों में प्रसाद बांटकर व्रत का पारण करें.

Chaitra Navratri 2019: Navaran Mantra Sadhna At Navratri Pujan

Chaitra Navratri 2019: Navaran Mantra Sadhna At Navratri Pujan

Navratri 2019: Navaran Mantra Sadhna At Navratri Pujan, Guru Pushya At this Navratri

Navratri 2019 Date and Time

जानें किस दिन होगी किस देवी की पूजा पहला नवरात्र 6 अप्रैल शनिवार को : घट स्थापन व मां शैलपुत्री पूजा, मां ब्रह्मचारिणी पूजा दूसरा नवरात्र 7 अप्रैल रविवार को : मां चंद्रघंटा पूजा तीसरा नवरात्र 8 अप्रैल सोमवार को

  1. मां कुष्मांडा पूजा चौथा नवरात्र 9 अप्रैल मंगलवार को
  2. मां स्कंदमाता पूजा पांचवां नवरात्र 10 अप्रैल बुधवार को
  3.  पंचमी तिथि सरस्वती आह्वाहन छष्ठ नवरात्र 11 अप्रैल वीरवार क
  4. कात्यायनी पूजा सातवां नवरात्र 12 अप्रैल शनिवार को
  5. मां कालरात्रि पूजा नवमी 14 अप्रैल रविवार को
  6. महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी, महानवमी घट स्थापना मुहूर्त इस साल 6 अप्रैल शनिवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं।

घट स्थापना मुहूर्त

शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट के बीच घट स्थापना करना बेहद शुभ होगा।

6 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि पर्व का शुभारम्भ हो रहा है। देवी आराधना का यह पर्व नवरात्रि साल में दो बार मनाई जाती है। पहला चैत्र और दूसरा शारदीय नवरात्रि। नौ दिनों तक शक्ति की उपासना देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों के रूप में की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना होती है फिर नौ दिनों तक देवी के नौ रूपों की विशेष पूजा और आराधना होती है। कलश स्थापना कर नवरात्रि पर समस्त देवीय शक्तियों का आह्रान कर उन्हें सक्रिय किया जाता है।

 

इस चैत्र नवरात्रि 2019 की खास बातें

– इस बार चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी और नवमी एक साथ मनाई जाएंगी।

– 14 अप्रैल को राम नवमी पर इस बार पुष्य नक्षत्र योग का संयोग बन रहा है। भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में ही हुआ था।

–  चैत्र नवरात्रि अष्टमी के दिन ही सुबह 8 बजकर 19 मिनट को नवमी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन सुबह 6 बजकर  4 मिनट तक रहेगी।

– भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में दोपहर को हुआ था इसलिए राम नवमी अष्टमी के दिन मनाना शुभ रहेगा।

– चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर 2076 शुरू होगा।

– इस बार चैत्र नवरात्रि रेवती नक्षत्र के साथ शुरू हो रही है।

– 9 दिनों के इस चैत्र नवरात्रि में पांच बार सर्वार्थ सिद्धि और दो बार रवियोग आएगा। जो ज्योतिष दृष्टि से बहुत ही शुभ माना गया है।

मांगलिक कार्यों के लिए सर्वोत्तम हैं नवरात्र के दिन

वास्तु शास्त्र की दृष्टि से किसी भी धार्मिक या पूजा  कार्य के लिए ईशान कोण को ही सबसे अच्छा माना गया है। इसलिए अगर संभव हो तो नवरात्र में घट स्थापना अपने घर या पूजा स्थल के ईशान कोण की ओर करें। पूर्व और उत्तर दिशा में भी घट स्थापना की जा सकती है।

 

Retrograde Saturn in Different Houses

Retrograde Saturn in Different Houses

What is Gudi Parva 2019: Why We Celebrate Gudi Parva, Gudi Parva Muhurt

What is Gudi Parva 2019: Why We Celebrate Gudi Parva, Gudi Parva Muhurt

What is Gudi Parva 2019: Why We Celebrate Gudi Parva, Gudi Parva Muhurt

What is Gudi Parva

हिन्दू नव वर्ष के शुरू होने का प्रतीक है गुड़ी पड़वा गुड़ी पड़वा का पर्व मुख्यतः महाराष्ट्र में हिन्दू नववर्ष के आरंभ की ख़ुशी में मनाया जाता है। यह त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होने वाले नए साल की शुरुआत के दिन ही मनाने की परंपरा है। गुड़ी पड़वा का पर्व महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गोवा सहित दक्षिण भारतीय राज्यों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। गुड़ी का मतलब ध्वज यानि झंडा और पड़वा यानी प्रतिपदा तिथि होती है। मान्यता है के इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसी दिन से चैत्र नवरात्र की भी शुरुआत होती है।Uchchhishta Ganapati Sadhna, Uchchhishta Ganapati Diksha

Gudi Parva 2019

भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार गुड़ी पड़वा का त्यौहार 6 अप्रेल को चैत्र मास की शुक्‍ल प्रतिपदा की तिथि को है। 6अप्रेल से ही चैत्र नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष की भी शुरुआत हो रही है। सभी युगों में प्रथम सतयुग की शुरुआत भी इसी तिथि से हुई। पौराणिक कथाओं के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन आदिशक्ति प्रकट हुई थी। भारतीय कैलेंडर के मुताबिक चैत्र का महीना साल का पहला महीना होता है। कहते हैं कि प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री भास्कराचार्य ने अपने अनुसंधान के फलस्वरूप सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीने और साल की गणना करते हुए भारतीय पंचांग की रचना की।

Gudi Parva Katha

दक्षिण भारत में गुड़ी पड़वा का त्यौहार काफी लोकप्रिय है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक सतयुग में दक्षिण भारत में राजा बालि का शासन था। जब भगवान श्री राम को पता चला की लंकापति रावण ने माता सीता का हरण कर लिया है तो उनकी तलाश करते हुए जब वे दक्षिण भारत पहुंचे तो यहां उनकी उनकी मुलाकात सुग्रीव से हुई। सुग्रीव ने श्रीराम को बालि के कुशासन से अवगत करवाते हुए उनकी सहायता करने में अपनी असमर्थता जाहिर की। इसके बाद भगवान श्री राम ने बालि का वध कर दक्षिण भारत के लोगों को उसके अांतक से मुक्त करवाया। मान्यता है कि वह दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का था। इसी कारण इस दिन गुड़ी यानि विजय पताका फहराई जाती है।

Why We Celebrate Gudi Parva?

स्वास्थ्य के नज़रिये से भी गुड़ी पड़वा का काफी महत्व है। इस दिन बनाए जाने वाले व्यंजन चाहें आंध्र प्रदेश में बनाई जाने वाली पच्चड़ी हो, या फिर महाराष्ट्र में बनाई जाने वाली पूरन पोली या पोरन पोली, सभी स्वास्थ्यवर्द्धक होते हैं। माना जाता है कि खाली पेट पच्चड़ी के सेवन से चर्म रोग दूर होने के साथ-साथ स्वास्थ्य बेहतर होता है। वहीं पूरन पोली में गुड़, नीम के फूल, इमली और आम का उपयोग होता है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से फायदेमंद होते हैं। इस दिन लोग सुबह में नीम की पत्तियां भी खाते हैं। माना जाता है कि इससे रक्त शुद्ध होता है।

The Fault in Our Stars