ज्योतिष योग

राजयोग चित्र योग परिभाषा :यदि द्वितीयेश नवमस्थ हो, नवमेश एकादशस्थ हो और एकादशेश उच्च हो तो चित्र योग का निर्माण होता है. (ज्योतिष रत्नाकर) फल:ऐसा जातक बहुत तीछ्ण बुद्धि वाला, अनेक विद्याओं का जानने वाला एवं विळ्ान में प्रवीण होता है.  राजयोग चामर योग परिभाषा :यदि...

नवग्रह-कवच

नवग्रह-कवच नीचे  ‘यामलतन्त्र’ का एक ‘नवग्रह-कवच’ दिया जा रहा है। इसका श्रदधापूर्वक पाठ करने तथा इसे ताबीजमें रखकर भुजामें धारण करनेसे बहुत लाभ होता है। ॐ शिरो मे पातु मार्त्तण्डः कपालं रोहिणीपतिः । मुखमङगारकः पातु कण्ठं च शशिनन्दनः।। बुद्धि जीवः सदा पातु हदयं...

दत्तात्रेय वशीकरण प्रयोग

दत्तात्रेय वशीकरण प्रयोगः भगवान दत्तात्रेय एक अवतारी हैं, इसलिए उपासना या उनके मंत्रों की साधना तंत्रिक कामन पूर्ति के लिए की जाती है। इसे मोहन प्रयोग आर्थात वशीकरण या सम्मोहन के लिए किया जा सकता है, जो काफी सरल और सहज अचूक है। इससे संबंधित उपाय इस तरह बताए गए हैंः-...

योग (yog)

योग (yog) सूर्य और चन्द्र  निश्वित्त समय में आकाशीय वतुंलमार्ग (क्रान्तिघृत्त) के आरम्भ स्थान से जितने अंश के अन्तर में हों, उन दोनों के अंशो’ को जोड़ कर उसमें १ ३ अंश २० क्ला का भाग देने से प्राप्त सख्वा३ अगर ७ और ८ के मध्य हो तो आठवाँ योग चलता है अगर...

नक्षत्र (Nakstra)

सूर्यं और चन्द्र जिस अस्काशीय वृत्ताकार (वतुंलाकार) मार्ग से गति कस्ते हैं, उस वतुंल के एक समान २७ विभाग की सकल्पना३ है जैसे साईकिल के पहिये में आरे लगे होत्ते हैं, ठीक उसी प्रकार की यह रचना है । यह प्र…येकदृ विभाग नक्षत्र का विभाग कहलाता है आकाश में तारों के अनेक...