Ganesh Chauth 2018

Ganesh Chauth 2018

गणेश चतुर्थी पूजन सरल विधि

*गणेश चतुर्थी गणेश जी का जन्म दिन है। गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था।*

गणेश जी बुद्धि, सौभाग्य, समृद्धि, ऋद्धि सिद्धि देने वाले तथा विघ्नहर्ता यानि संकट दूर करने वाले माने जाते है । विनायक, गजानन, लम्बोदर, गणपति आदि सब गणेश जी के ही नाम है।

सफलता या लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सम्पूर्ण ज्ञान हासिल करना, अपनी त्वरित बुद्धि से विवेकपूर्ण निर्णय करना, लगातार मेहनत और प्रयास करते रहना, जरुरी होते है । इसी वजह से गणेश जी को सबसे पहले पूजा जाता है।

ग्यारवें दिन किसी जलाशय, नदी या समुद्र में मूर्ती को विसर्जित किया जाता है। गाजे बाजे के साथ नाचते गाते लोग गणेश विसर्जन में हिस्सा लेते है। हर तरफ “गणपति बाप्पा मोर्या” जैसे शब्द गूंजते नजर आते है।

 

*गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले कई जगह मंदिरों में सिंजारा मनाया जाता है जिसमे गणेश जी को मेहंदी अर्पित की जाती है।* महिलाएं भजन गाती है। प्रसाद आदि वितरित किये जाते है।

*इस दिन चाँद को देखना अशुभ माना जाता है। कहते है चाँद को गणेश जी का श्राप लगा हुआ है। इस दिन चाँद को देखने से झूठा कलंक लग सकता है।*

*भगवान श्री कृष्ण को भी चाँद देखने पर मणि चोरी के झूठे कलंक का सामना करना पड़ा था। ये धार्मिक मान्यताएं है।*

*गणेश जी का पूजन करने की सामग्री:–*

१. चौकी या पाटा
२. जल कलश
३. लाल कपड़ा
४. पंचामृत
५. रोली, मोली, लाल चन्दन
६. जनेऊ
७. गंगाजल
८. सिन्दूर
९. चांदी का वर्क
१०. लाल फूल या माला
११. इत्र
१२. मोदक या लडडू
१३. धानी
१४. सुपारी
१५ लौंग
१६. इलायची
१७. नारियल
१८. फल
१९. दूर्वा – दूब
२०. पंचमेवा
२१. घी का दीपक
२२. धूप, अगरबत्ती
२३. कपूर

Ganesh Chauth 2018 Pujan VIdhi

गणेश पूजन की विधि

सुबह नहा धोकर *शुद्ध लाल रंग के कपड़े पहने। गणेश जी को लाल रंग प्रिय है।*

*पूजा करते समय आपका मुँह पूर्व दिशा में या उत्तर दिशा में होना चाहिए।*

१. सबसे पहले गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं ।

२. उसके बाद गंगा जल से स्नान कराएं ।

३. गणेश जी को चौकी पर लाल कपड़े पर बिठाएं।

४. ऋद्धि सिद्धि के रूप में दो सुपारी रखें।

५. गणेश जी को *सिन्दूर लगाकर चांदी का वर्क लगाएं।*

६. लाल चन्दन का टीका लगाएं।

७. अक्षत (चावल) लगाएं।

८. *मौली और जनेऊ* अर्पित करें।

९. लाल रंग के पुष्प या माला आदि अर्पित करें।

१०. इत्र अर्पित करें।

११. दूर्वा अर्पित करें।

१२. नारियल चढ़ाएं।

१३. पंचमेवा चढ़ाए।

१४. फल अर्पित करेँ।

१५. मोदक और लडडू आदि का भोग लगाएं।

१६. लौंग इलायची अर्पित करें।

१७. दीपक, अगरबत्ती, धूप आदि जलाएं।

१८. गणेश मन्त्र उच्चारित करें:–

*ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ।।*

१९. कपूर जलाकर आरती करें। गणेश जी की आरती गाएँ।

जय गणेशाय नमः

 

ट्रांसफर रुकवाने के उपाय

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Pitru Paksha 2018 Pitru Paksha 2019 Pitru Paksha 2020 Dates

Pitru Paksha 2018 Pitru Paksha 2019 Pitru Paksha 2020 Dates

Pitru Paksha 2018

24September(Monday)Purnima Shraddha
25September(Tuesday)Pratipada Shraddha
26September(Wednesday)Dwitiya Shraddha
27September(Thursday)Tritiya Shraddha
28September(Friday)Maha Bharani, Chaturthi Shraddha
29September(Saturday)Panchami Shraddha
30September(Sunday)Shashthi Shraddha
01October(Monday)Saptami Shraddha
02October(Tuesday)Ashtami Shraddha
03October(Wednesday)Navami Shraddha
04October(Thursday)Dashami Shraddha
05October(Friday)Ekadashi Shraddha
06October(Saturday)Magha Shraddha, Dwadashi Shraddha
07October(Sunday)Trayodashi Shraddha, Chaturdashi Shraddha
08October(Monday)Sarva Pitru Amavasya

 

pitru paksh 2018
pitru paksh 2018

Pitru Paksha 2019 Dates

13September(Friday)Purnima Shraddha
14September(Saturday)Pratipada Shraddha
15September(Sunday)Dwitiya Shraddha
17September(Tuesday)Tritiya Shraddha
18September(Wednesday)Maha Bharani, Chaturthi Shraddha
19September(Thursday)Panchami Shraddha
20September(Friday)Shashthi Shraddha
21September(Saturday)Saptami Shraddha
22September(Sunday)Ashtami Shraddha
23September(Monday)Navami Shraddha
24September(Tuesday)Dashami Shraddha
25September(Wednesday)Ekadashi Shraddha, Dwadashi Shraddha
26September(Thursday)Magha Shraddha, Trayodashi Shraddha
27September(Friday)Chaturdashi Shraddha
28September(Saturday)Sarva Pitru Amavasya

 

Pitru Paksha 2020 Dates

01September(Tuesday)Purnima Shraddha
02September(Wednesday)Pratipada Shraddha
03September(Thursday)Dwitiya Shraddha
05September(Saturday)Tritiya Shraddha
06September(Sunday)Chaturthi Shraddha
07September(Monday)Maha Bharani, Panchami Shraddha
08September(Tuesday)Shashthi Shraddha
09September(Wednesday)Saptami Shraddha
10September(Thursday)Ashtami Shraddha
11September(Friday)Navami Shraddha
12September(Saturday)Dashami Shraddha
13September(Sunday)Ekadashi Shraddha
14September(Monday)Dwadashi Shraddha
15September(Tuesday)Magha Shraddha, Trayodashi Shraddha
16September(Wednesday)Chaturdashi Shraddha
17September(Thursday)Sarva Pitru Amavasya

 

पहला श्राद्ध : 24 सितंबर 2018, सोमवार को

तिथि – पूर्णिमा, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध पितृ पक्ष के पहले दिन होता है.

श्राद्ध करने का सही समय

कुतुप मुहूर्त : 11:48 से 12:36 तक
रौहिण मुहूर्त : 12:36 से 13:24 तक
अपराह्न काल : 13:24 से 15:48 तक

महालय अमावस्या 
पितृ पक्ष के सबसे आखिरी दिन को महालय अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहते हैं. क्योंकि इस दिन उन सभी मृत पूर्वजों का तर्पण करवाते हैं, जिनका किसी न किसी रूप में हमारे जीवन में योगदान रहा है. इस दिन उनके प्रति आभार प्रक्रट करते हैं और उनसे अपनी गलतियों की माफी मांगते हैं. इस दिन किसी भी मृत व्यक्ति का श्राद्ध किया जा सकता है. खासतौर से वह लोग जो अपने मृत पूर्वजों की तिथि नहीं जानते, वह इस दिन तर्पण करा सकते हैं.

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Vaibhav Lakshmi Fast, Pujan, Vrat Katha, Aarti

 

Vaibhav Lakshmi Fast, Pujan, Vrat Katha, Aarti

Vaibhav Lakshmi Fast, Pujan, Vrat Katha, Aarti :उद्देश्य सुख और सम्रिधि के लिए

Vaibhav Lakshmi Fast, Pujan, Vrat Katha, Aarti

शुक्रवार को लक्ष्मी देवी का भी व्रत रखा जाता है। इसे वैभवलक्ष्मी व्रत भी कहा जाता है। इस दिन स्त्री-पुरुष देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हुए श्वेत पुष्प, श्वेत चंदन से पूजा कर तथा चावल और खीर से भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस व्रत के दिन उपासक को एक समय भोजन करते हुए खीर अवश्य खानी चाहिए।

वैभवलक्ष्मी व्रतकथा Vaibhav Vrat Katha 

किसी शहर में लाखों लोग रहते थे। सभी अपने-अपने कामों में रत रहते थे। किसी को किसी की परवाह नहीं थी। भजन-कीर्तन, भक्ति-भाव, दया-माया, परोपकार जैसे संस्कार कम हो गए। शहर में बुराइयाँ बढ़ गई थीं। शराब, जुआ, रेस, व्यभिचार, चोरी-डकैती वगैरह बहुत से गुनाह शहर में होते थे। इनके बावजूद शहर में कुछ अच्छे लोग भी रहते थे।

ऐसे ही लोगों में शीला और उनके पति की गृहस्थी मानी जाती थी। शीला धार्मिक प्रकृति की और संतोषी स्वभाव वाली थी। उनका पति भी विवेकी और सुशील था। शीला और उसका पति कभी किसी की बुराई नहीं करते थे और प्रभु भजन में अच्छी तरह समय व्यतीत कर रहे थे। शहर के लोग उनकी गृहस्थी की सराहना करते थे।

देखते ही देखते समय बदल गया। शीला का पति बुरे लोगों से दोस्ती कर बैठा। अब वह जल्द से जल्द करोड़पति बनने के ख्वाब देखने लगा। इसलिए वह गलत रास्ते पर चल पड़ा फलस्वरूप वह रोडपति बन गया। यानी रास्ते पर भटकते भिखारी जैसी उसकी हालत हो गई थी।

शराब, जुआ, रेस, चरस-गाँजा वगैरह बुरी आदतों में शीला का पति भी फँस गया। दोस्तों के साथ उसे भी शराब की आदत हो गई। इस प्रकार उसने अपना सब कुछ रेस-जुए में गँवा दिया।

शीला को पति के बर्ताव से बहुत दुःख हुआ, किन्तु वह भगवान पर भरोसा कर सबकुछ सहने लगी। वह अपना अधिकांश समय प्रभु भक्ति में बिताने लगी। अचानक एक दिन दोपहर को उनके द्वार पर किसी ने दस्तक दी। शीला ने द्वार खोला तो देखा कि एक माँजी खड़ी थी। उसके चेहरे पर अलौकिक तेज निखर रहा था। उनकी आँखों में से मानो अमृत बह रहा था। उसका भव्य चेहरा करुणा और प्यार से छलक रहा था। उसको देखते ही शीला के मन में अपार शांति छा गई। शीला के रोम-रोम में आनंद छा गया। शीला उस माँजी को आदर के साथ घर में ले आई। घर में बिठाने के लिए कुछ भी नहीं था। अतः शीला ने सकुचाकर एक फटी हुई चद्दर पर उसको बिठाया।

माँजी बोलीं- क्यों शीला! मुझे पहचाना नहीं? हर शुक्रवार को लक्ष्मीजी के मंदिर में भजन-कीर्तन के समय मैं भी वहाँ आती हूँ।’ इसके बावजूद शीला कुछ समझ नहीं पा रही थी। फिर माँजी बोलीं- ‘तुम बहुत दिनों से मंदिर नहीं आईं अतः मैं तुम्हें देखने चली आई।’

माँजी के अति प्रेमभरे शब्दों से शीला का हृदय पिघल गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए और वह बिलख-बिलखकर रोने लगी। माँजी ने कहा- ‘बेटी! सुख और दुःख तो धूप और छाँव जैसे होते हैं। धैर्य रखो बेटी! मुझे तेरी सारी परेशानी बता।’ माँजी के व्यवहार से शीला को काफी संबल मिला और सुख की आस में उसने माँजी को अपनी सारी कहानी कह सुनाई।

कहानी सुनकर माँजी ने कहा- ‘कर्म की गति न्यारी होती है। हर इंसान को अपने कर्म भुगतने ही पड़ते हैं। इसलिए तू चिंता मत कर। अब तू कर्म भुगत चुकी है। अब तुम्हारे सुख के दिन अवश्य आएँगे। तू तो माँ लक्ष्मीजी की भक्त है। माँ लक्ष्मीजी तो प्रेम और करुणा की अवतार हैं। वे अपने भक्तों पर हमेशा ममता रखती हैं। इसलिए तू धैर्य रखकर माँ लक्ष्मीजी का व्रत कर। इससे सब कुछ ठीक हो जाएगा।’

शीला के पूछने पर माँजी ने उसे व्रत की सारी विधि भी बताई। माँजी ने कहा- ‘बेटी! माँ लक्ष्मीजी का व्रत बहुत सरल है। उसे ‘वरदलक्ष्मी व्रत’ या ‘वैभवलक्ष्मी व्रत’ कहा जाता है। यह व्रत करने वाले की सब मनोकामना पूर्ण होती है। वह सुख-संपत्ति और यश प्राप्त करता है।’

शीला यह सुनकर आनंदित हो गई। शीला ने संकल्प करके आँखें खोली तो सामने कोई न था। वह विस्मित हो गई कि माँजी कहाँ गईं? शीला को तत्काल यह समझते देर न लगी कि माँजी और कोई नहीं साक्षात्‌ लक्ष्मीजी ही थीं।

दूसरे दिन शुक्रवार था। सबेरे स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनकर शीला ने माँजी द्वारा बताई विधि से पूरे मन से व्रत किया। आखिरी में प्रसाद वितरण हुआ। यह प्रसाद पहले पति को खिलाया। प्रसाद खाते ही पति के स्वभाव में फर्क पड़ गया। उस दिन उसने शीला को मारा नहीं, सताया भी नहीं। शीला को बहुत आनंद हुआ। उनके मन में ‘वैभवलक्ष्मी व्रत’ के लिए श्रद्धा बढ़ गई।

शीला ने पूर्ण श्रद्धा-भक्ति से इक्कीस शुक्रवार तक ‘वैभवलक्ष्मी व्रत’ किया। इक्कीसवें शुक्रवार को माँजी के कहे मुताबिक उद्यापन विधि कर के सात स्त्रियों को ‘वैभवलक्ष्मी व्रत’ की सात पुस्तकें उपहार में दीं। फिर माताजी के ‘धनलक्ष्मी स्वरूप’ की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करने लगीं- ‘हे माँ धनलक्ष्मी! मैंने आपका ‘वैभवलक्ष्मी व्रत’ करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है। हे माँ! मेरी हर विपत्ति दूर करो। हमारा सबका कल्याण करो। जिसे संतान न हो, उसे संतान देना। सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना। कुँआरी लड़की को मनभावन पति देना। जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना। सभी को सुखी करना। हे माँ! आपकी महिमा अपार है।’ ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के ‘धनलक्ष्मी स्वरूप’ की छबि को प्रणाम किया।

व्रत के प्रभाव से शीला का पति अच्छा आदमी बन गया और कड़ी मेहनत करके व्यवसाय करने लगा। उसने तुरंत शीला के गिरवी रखे गहने छुड़ा लिए। घर में धन की बाढ़ सी आ गई। घर में पहले जैसी सुख-शांति छा गई। ‘वैभवलक्ष्मी व्रत’ का प्रभाव देखकर मोहल्ले की दूसरी स्त्रियाँ भी विधिपूर्वक ‘वैभवलक्ष्मी व्रत’ करने लगीं। वैभवलक्ष्मी व्रत’ उद्यापन विधि सात, ग्यारह या इक्कीस, जितने भी शुक्रवारों की मन्नत माँगी हो, उतने शुक्रवार ‍तक यह व्रत पूरी श्रद्धा तथा भावना के साथ करना चाहिए। आखिरी शुक्रवार को इसका शास्त्रीय विधि के अनुसार उद्यापन करना चाहिए।

Apsara Vashikaran Mantra

आखिरी शुक्रवार को प्रसाद के लिए खी‍र बनानी चाहिए। जिस प्रकार हर शुक्रवार को हम पूजन करते हैं, वैसे ही करना चाहिए। पूजन के बाद माँ के सामने एक श्रीफल फोड़ें फिर कम से कम सात‍ कुँआरी कन्याओं या सौभाग्यशाली स्त्रियों को कुमकुम का तिलक लगाकर माँ वैभवलक्ष्मी व्रत कथा की पुस्तक की एक-एक प्रति उपहार में देनी चाहिए और सबको खीर का प्रसाद देना चाहिए। इसके बाद माँ लक्ष्मीजी को श्रद्धा सहित प्रणाम करना चाहिए।

फिर माताजी के ‘धनलक्ष्मी स्वरूप’ की छबि को वंदन करके भाव से मन ही मन प्रार्थना करें- ‘हे माँ धनलक्ष्मी! मैंने आपका ‘वैभवलक्ष्मी व्रत’ करने की मन्नत मानी थी, वह व्रत आज पूर्ण किया है। हे माँ! हमारी (जो मनोकामना हो वह बोले) मनोकामना पूर्ण करें। हमारी हर विपत्ति दूर करो। हमारा सबका कल्याण करो। जिसे संतान न हो, उसे संतान देना। सौभाग्यवती स्त्री का सौभाग्य अखंड रखना। कुँआरी लड़की को मनभावन पति देना। जो आपका यह चमत्कारी वैभवलक्ष्मी व्रत करे, उनकी सब विपत्ति दूर करना। सभी को सुखी करना। हे माँ! आपकी महिमा अपार है।’ आपकी जय हो! ऐसा बोलकर लक्ष्मीजी के ‘धनलक्ष्मी स्वरूप’ की छबि को प्रणाम करें।

श्री वैभव लक्ष्मी मंत्र (Shree Vaibhav Lakshmi Mantra)

या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

 

Chandi Havan Vidhi चण्डी हवन विधि

Chandi Havan Vidhi चण्डी हवन विधि

हवन कुण्ड का पंचभूत संस्कार करें। सर्वप्रथम कुश के अग्रभाग से वेदी को साफ करें। कुण्ड का लेपन करें गोबर जल आदि से। तृतीय क्रिया में वेदी के मध्य बाएं से तीन रेखाएं दक्षिण से उत्तर की ओर पृथक-पृथक खड़ी खींचें, चतुर्थ में तीनों रेखाओं से यथाक्रम अनामिका व अंगूठे से कुछ मिट्टी हवन कुण्ड से बाहर फेंकें। पंचम संस्कार में दाहिने हाथ से शुद्ध जल वेदी में छिड़कें। पंचभूत संस्कार से आगे की क्रिया में अग्नि प्रज्वलित करके अग्निदेव का पूजन करें।

इन मंत्रों से शुद्ध घी की आहुति दें

 

  • ॐ प्रजापतये स्वाहा। इदं प्रजापतये न मम।
  • ॐ इन्द्राय स्वाहा। इदं इन्द्राय न मम।
  • ॐ अग्नये स्वाहा। इदं अग्नये न मम।ॐ सोमाय स्वाहा। इदं सोमाय न मम।
  • ॐ भूः स्वाहा। इदं अग्नेय न मम।
  • ॐ भुवः स्वाहा। इदं वायवे न मम।
  • ॐ स्वः स्वाहा। इदं सूर्याय न मम।
  • ॐ ब्रह्मणे स्वाहा। इदं ब्रह्मणे न मम।
  • ॐ विष्णवे स्वाहा। इदं विष्णवे न मम।
  • ॐ श्रियै स्वाहा। इदं श्रियै न मम।ॐ षोडश मातृभ्यो स्वाहा। इदं मातृभ्यः न मम॥

नवग्रह के नाम या मंत्र से आहुति दें। गणेशजी की आहुति दें। सप्तशती या नर्वाण मंत्र से जप करें। सप्तशती में प्रत्येक मंत्र के पश्चात स्वाहा का उच्चारण करके आहुति दें।

प्रथम से अंत अध्याय के अंत में पुष्प, सुपारी, पान, कमल गट्टा, लौंग 2 नग, छोटी इलायची 2 नग, गूगल व शहद की आहुति दें तथा पांच बार घी की आहुति दें। यह सब अध्याय के अंत की सामान्य विधि है।

तीसरे अध्याय में गर्ज-गर्ज क्षणं में शहद से आहुति दें। आठवें अध्याय में मुखेन काली इस श्लोक पर रक्त चंदन की आहुति दें। पूरे ग्यारहवें अध्याय की आहुति खीर से दें। इस अध्याय से सर्वाबाधा प्रशमनम्‌ में कालीमिर्च से आहुति दें। नर्वाण मंत्र से 108 आहुति दें।

Bhumi Pujan Samagri List

Bhumi Pujan Samagri List

1.Gangajal water.
2. Leaves of Mango and Pann
3. Flowers, Roli (Kumkum), Rice 1kg,
4. Turmeric powder
5. Betel Nuts 10 pcs
6. Durba grass if found,
7. Kalava (Mauli or Red thread)
8. Coconut with tail,
9. Red Cloth 1 Mtr,
10. Camphor
11. Five types Fruits total 15,
12. Kalash Lotta,
13. Desi Ghee 1/2 Kg,
14. Naag Nagin Joda,
15. Lwang Ilachi ,
16. Jaggery 1/2 kg,
17. Coins
18. Dhoop or incense sticks

Bhumi Pujan Mantra

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपी वा. यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यांतर: शुचिः अति

Om apvitrah pvitro va srvavsthan gatoapi va Yah smaret pudrikakshn sa baahyabynarh suchih Atinilghanshyamn nalinaayata lochnam Smrami pundrikshan ten snato bhwamyham This is regarded as a Mansik Shudhi mantra or mind purification pr

भूमि वंदना मंत्र: समुद्रवसने देवी पर्वतस्तनमंडीते ! विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व

Bhoomi Vandana Mantra: Smudravasne devi parvatstanmandite Visnupatni namstubhy padsparshm kshmsvame

ayer.

Sankalp- Rice grains, flower petals, water are given in the hands of those performing the ritual. They offer it to the Bhoomi while reciting the shlokas.

Devi poojan– The mother goddess is invoked.

Bhoomiabhishinchan– To purify the place, pure water or Ganges water is sprinkled with the help of mango leaves or flowers. Mantras are recited.

Pranpratishtha and poojan-Rice grains and flower petals are sprinkled on the earth by using the right hand. Mantras are recited.

Bhumi Pujan Muhurat 2018

मार्च 2018

03 मार्च 2018 (शनिवार)07:51 से 12:47
15:01 से 19:39
04 मार्च 2018 (रविवार)07:47 से 12:43
26 मार्च 2018 (सोमवार)13:31 से 15:51
31 मार्च 2018 (शनिवार)07:26 से 10:56
13:11 से 18:36

अप्रैल 2018

01 अप्रैल 2018 (रविवार)17:45 से 18:19
02 अप्रैल 2018 (सोमवार)07:18 से 13:03
15:23 से 19:57
05 अप्रैल 2018 (वीरवार)08:41 से 10:37
27 अप्रैल 2018 (शुक्रवार)

 

Shani Dev Vrat and Puja Vidhi in Hindi

Shani Dev Vrat and Puja Vidhi in Hindi

Shani Dev Pujan Vidhi

पूजन सामग्री

शनिदेव की प्रतिमा   पान  लौंग इलायची  गुड़  वस्त्र(काला अथवा नीला)  दूध  दही  घी  मधु  शर्करा  यज्ञोपवीत  तेल  चंदन  तुलसी दल  शमी के पत्ते  दीप  धूप  पुष्पमाला  ऋतुफल  नैवेद्य  जल-पात्र  फूल  चम्मच  कलश  तिल  कुशा  दूर्वा  अक्षत  सुपारी  पान

आचमन

अब पुष्प या चम्मच से तीन बार दाएँ हाथ में जल ले कर मुख को शुद्ध करने के लिये आचमन करें ।
अब “ॐ केशवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर “ॐ नारायणाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
अब “ॐ वासुदेवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर “ॐ हृषिकेशाय नमः” कहते हुए दाएँ हाथ के अंगूठे के से होंठों को दो बार पोंछकर हाथों को धो लें।

पंचोपचार विधि से गणेश जी का धूप, दीप, अक्षत,चंदन तथा नैवेद्य अर्पित कर पूजन करें।

सम्पूर्ण सत्यनारायण व्रत कथा एवं पूजन विधि

शनिदेव का आवाहन मंत्र

आवाहन मंत्र
अष्टम्याम् रेवतीसमन्वितायाम् सौराष्ट्रजातम् कश्यपगोत्रम्
लोहवर्णम् धनुराकृतिम् मण्डलात्पश्चिमाशास्थम्।
पश्चिमाभिमुखम् गृध्रवाहनम् संकरजातिम्
यमाधिदैवतम् प्रजापतिप्रत्याधिदेवतम् शनिमावाह्यामि॥
पुष्प तथा चावल शनिदेव पर अर्पित करें।

शनिदेव का आसन मंत्र

दोनों हाथ जोड़कर रविनंदन शनिदेव को आसन पर विराजमान होने के लिये प्रार्थना करें ।
आसन मंत्र
ऊँ पुरुष एवेदयं सर्व यद्भूतं यच्च भाव्यम।
उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति॥ 

शनिदेव का पाद्य मंत्र

शनिदेव को पैर धोने के लिये जल समर्पित करें तथा निम्न मंत्र का उच्चारण करें ।
पाद्य मंत्र
ऊँ एतावानस्य महिमातोज्यायांश्च पुरूष:।
पादोsस्य वीश्वभूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि॥ 

शनिदेव का अर्घ्य मंत्र

शनिदेव को हाथ धोने के लिये जल समर्पित करें तथा निम्न मंत्र का उच्चारण करें ।
अर्घ्य मंत्र
ऊँ त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुष: पादोस्येहाभवत्पुन:।
ततो हि विष्वडव्यक्रामत्साशनानशनेsअभि॥

शनिदेव का आचमन मंत्र

शनिदेव को आचमन के लिये जल समर्पित करें तथा निम्न मंत्र का उच्चारण करें ।
आचमन मंत्र
ऊँ ततो विराडजायत विराजो अधि पुरुष:।
स जातो अत्यारिच्यत पश्चादभूमिममो पुर:॥

शनिदेव का स्नान मंत्र

शनिदेव को स्नान करायें। शनिदेव को गौदुग्ध, दही,घी, शहद, शर्करा तथा अंत में शुद्ध जल से मंत्रों के उच्चारण के साथ स्नान कराये।
गौदुग्ध स्नान मंत्र
ऊँ पय: पृथिव्यां पय औषधीषु पय दिव्यन्तरिक्षे पयोधा:।
पयस्वती: पयस्वती: प्रदिश: सन्तु मह्यम्॥
दधि स्नान मंत्र
ऊँ दधिक्राव्णो अकारिषं जिष्णोरश्वस्य्।
वाजिन: सुरभि नो मुखाकरत्प्रण आयुSषि तारिषत्।
घृत स्नान मंत्र
ऊँ घृतंघृत पावान: पिबत वसां वसापावान:।
पिबतान्तरिक्षस्य हविरसि स्वाहा दिश: प्रदिश
आदिशो विदिश उद्दिशोदिग्भ्य: स्वाहा।
मधु स्नान मंत्र
ऊँ मधुवाता ऋतायते मधुक्षरन्ति सिंधव:।
माध्वीर्न संत्योषधी:॥ मधुनक्तमुतोषसो 
मधुमत्पार्थिवSरज: । मधुद्यौरस्तु न: पिता॥
मधुमान्नो वनस्पतिर्मधुमांअस्तु सुर्य:।
माध्वीर्गावो भवन्तु न:॥
शर्करा स्नान मंत्र
तपशान्तिकारी शीरा मधुरास्वाद सन्युता।
स्नानार्थं देवदेवेश शर्करेयं प्रदीयते॥
शुद्धोदक स्नान मंत्र
गंगागोदावरी रेवा पयोष्णी यमुना तथा।
सरस्वत्यादि तीर्थानि स्नानार्थं प्रतिगृहृताम॥

शनिदेव का वस्त्र मंत्र

शनिदेव को मंत्रों के उच्चारण के साथ काला वस्त्र समर्पित करें।
वस्त्र मंत्र
वस्त्राणि पट्टकलानि विचित्राणी नवानि च ।
मयानीतान देवेश प्रसन्नोभव शनिदेवम्॥

शनिदेव का यज्ञोपवीत मंत्र

शनिदेव को मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञोपवीत समर्पित करें।
यज्ञोपवीत मंत्र
सौवर्णरजतंताम्रं कार्पासस्य तथैव च।
उपवीतम्म्या दत्तं प्रीत्यर्थं प्रतिगृहृताम॥

तेल

शनिदेव को इस मंत्र के उच्चारण के साथ सरसों अथवा काले तिल का तेल सम्पूर्ण शरीर में लगाने हेतु समर्पित करें।
तेल मंत्र
ऊँ तैलानि सुगन्धीनि द्रव्याणी विविधानिं।
च मया दत्तानि लेपार्थ गृहाण परमेश्वर॥

मधुपर्क

तेल समर्पण के बाद दही और शहद मिलाकर मधुपर्क के रूप में शनिदेव को मंत्रों के उच्चारण के साथ मधुपर्क समर्पित करें।
मधुपर्क मंत्र
दधि मध्वाज्य सन्युक्तं पात्रयुग्मसमन्वितम्।
मधुपर्कग्रहण त्वं वरदो भव शोभत:॥

चंदन

मंत्र उच्चारण के साथ तिलक लगाने के लिये चंदन समर्पित करें।व चंदन मंत्र
सर्वेश्वर जगद्वंद्य दिव्यासन समास्थितं।
गंध गृहाण देवेश चंदनं प्रतिगृहृताम॥

अक्षत

तिलक पर अक्षत लगाने के लिये, मंत्र के उच्चारण के साथ अक्षत समर्पित करें।
अक्षत मंत्र
अक्षतांश्च सुरश्रेष्ठ शुभ्राधूनाश्च निर्मला:।
मयानिवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर्॥

पुष्प तथा माला

शनिदेव को मंत्र उच्चारण के साथ पुष्प तथा माला समर्पित करें।पुष्प गहरे लाल,काले अथवा नीले रंग के हों।
पुष्प मंत्र
माल्यादीनी सुगंधीनि मालत्यादीनी वै प्रभो।
मयाऽऽहतानि पूजार्थ पुष्पाणि प्रतिगृहृताम ॥

तुलसी

शनिदेव को मंत्र के उच्चारण के साथ श्यामा तुलसी दल समर्पित करें।
तुलसी मंत्र
ऊँ यत्पुरीषं व्यदधु: कतिधाव्यकल्पयन्।
मुखंकिमस्यासत्किम्बाहु किमुरुपादा उच्येते॥
तुलसी हेमरूपां च रत्नरूपाञ्च मञ्जरीम्।
भव मोक्षप्रदा तुभ्यमर्पेयामि हरिप्रियाम्॥

शमी

शनिदेव को मंत्र के उच्चारण के साथशमी वृक्ष के पत्ते समर्पित करें।
शमी मंत्र
शमी शयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी।
धारिण्यर्जुनवाणानां रामस्य प्रियवादिनी॥

धूप

शनिदेव को धूप दिखायें तथा मंत्र का उच्चारण करें।
धूप मंत्र
वनस्पति रसोद्भूतो गन्धाढ्यो गंध उत्तम:।
आघ्रेय: सर्व देवानां धूपोयं प्रतिगृहृताम॥

दीप

शनिदेव को मंत्रों के उच्चारण के साथ दीप समर्पित करें। दीप मंत्र
साज्यं च वर्ति संयुक्तं वह्निना योजितं मया ।
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्य तिमिरापहम्॥

वस्त्र

शनिदेव को मंत्रों के उच्चारण के साथ नैवेद्य(गुड़,चना तथा काले तिल से बने नैवेद्य) समर्पित करें।
नैवेद्य मंत्र
अपूपानि च पक्वानि मण्डकावटकानि च।
पायसं सपमन्नञ्च नैवेद्यम्प्रतिगृहृताम॥

आचमन

आचमन के लिये मंत्र के उच्चारण के साथ जल समर्पित करें।
पानीयं शीतलं शुद्ध गांगेयमहदुत्तनम्।
गृहाण पार्वतीनात तव प्रीत्या प्रकल्पितम्॥

करोद्धर्तन

हाथ धुलने के लिये शनिदेव को जल समर्पित करें।
करोद्धर्तन मंत्र
कर्पूरादीनि द्रव्याणी सुगन्धीनि महेश्वर्।
गृहाण ग्रहाध्यक्षो करोद्धर्तन हेतवे।

फल

शनिदेव को मंत्र के उच्चारण के साथ ऋतुफल समर्पित करें।
फल मंत्र
कूष्माण्डं मातुलिङ्गञ्च नारिकेल फलानि च्।
गृह्णातु सुर्यसुतम् विशिष्टो खेटक प्रिय्॥

ताम्बूल 

पान के पत्ते को पलट कर सुपारी,लौंग,इलायची तथा कुछ मीठा रखकर ताम्बूल बनायें। मुख-शुद्धि के लिये शनिदेव को मंत्र के उच्चारण के साथ ताम्बूल समर्पित करें।
ताम्बूल मंत्र
पूगीफलं मद्दीव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्।
गृहाण देवदेवेश द्राक्षादीन गणेश्वर:॥

दक्षिणा

सामर्थ्यानुसार शनिदेव को दक्षिणा समर्पित करें।
दक्षिणा मंत्र
हिरण्यगर्भगर्भस्यं हेमबीजं समन्वितम्।
पञ्चरत्नं मयादत्तं गृह्यतां लोक वल्लभ:॥

आरती

दिये गये मंत्र से शनिदेव की आरती करें।
आरती मंत्र
अग्निर्ज्योतिरविर्ज्योति ज्योतिर्नारायणोविभु:।
नीराजयानि देवेशं पञ्चदीपे सुरेश्वर॥

पुष्पांजली

दोनों हाथों मे पुष्प लेकर खड़े हो जायें और मंत्र के उच्चारण के साथ पुष्पांजली समर्पित करें।
पुष्पांजलि मंत्र
देवो दैत्येश्वरो वीरो वीरवंद्यो दिवाकर:।
पुष्पांजलि गृहाणेश सर्वेश्वर नमोस्तुते॥

नमस्कार

दोनों हाथों को जोड़कर मंत्र के उच्चारण के साथ शनिदेव को नमस्कार करें।
नमस्कार मंत्र
पार्थिव: पार्थ संपूज्य पार्थद: प्रणत: प्रभु:।
पृथिवीश: पृथातुंद्र: धरणीनायको नम:॥

प्रदक्षिणा

अपने स्थान पर खड़े होकर तीन बार प्रदक्षिणा करें तथा मंत्र का उच्चारण करें।
प्रदक्षिणा मंत्र
यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च।
तान तानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणां पदे-पदे॥

क्षमा प्रार्थना

दोनों हाथों जोड़कर पुजा में हुई भूल के लिये शनिदेव से क्षमा प्रार्थना करें ।
क्षमा प्रार्थना मंत्र
अपराध शतं देव मत्कृतं च दिने दिने। क्षम्यतां पावने देव-देवेश नमोSस्तु ते॥

Parshuram Jayanti 2018 Some Facts About Parshuram

Sri Maha Pratyangira Devi

Sri Maha Pratyangira Devi

Worshipping Prathyangira Amman relieves us from all kinds of dosham, accidents, enemies, diseases, wrath, curses, obstacles, black magic. She bears 8 snakes on her body. Her Potri Malai describes her as “Ashta Nagam Konda Kali Thirisuli”. Those who have Sarpa Dosham or often get scary dreams involving Snakes can worship Prathyangira Devi for instant relief. It is believed that Prathyangira Amman relieves us from Rahu Dosham and Varahi Amman relieves us from Ketu Doshams. Devotees who have experienced her Mahima have shared stories wherein by just spreading her kumkumam around the house or at the entrance of the house acts like a barrier and protects the house and family from Dushta Atma, snakes, and other Visha (poisonous) Jeevangal.

The following are Prathyangira Devi’s favorite foods

1. Panakam (jaggery crushed in pure water, flavored with cardamom, dried ginger) 2. Paruppu-Vellam Payasam (made with Kadalai Paruppu, Paitham Paruppu, Jaggery, Coconut and Pure Milk) 3. Ulundu Vadai 4. Ellu Urundai 5. Red Banana (Chevvazhai Pazham) 6. Pomegranate 7. Dates

The following are Prathyangira Devi’s favorite colors (for sarees)

1. Deep Red (preferred by Shantha Prathyangira & Ugraha Prathyangira) 2. Purple (preferred by Shantha Prathyangira) 3. Yellow (preferred by Shantha Prathyangira) 4. Black (preferred by Ugraha Prathyangira)

The following are special days for pooja for Prathyangira

  • Amavasya
  • Ashtami
  • Sunday
  • Tuesday
  • Friday

Mantra chanted in Sri Maha Prathyangira Homam

Om Ksham Krishna Vasase, Simha Vadhane, Maha Vadhane,Maha Bhairavi, Sarva Shatru Karma Vidhdwamsini,Paramanthra Chetini, Sarva Bhootha Dhamani,Sarva Bhoothaam Pandha Pandha, Sarva Vignyaan Sindhi Sindhi,Sarva Vyadhir Nikrindha Nikrindha, Sarva Dhushtaan Paksha Paksha,Jwala Jihwe, Karaala Vakhtre, Karaala Dhamshtrey,Prathyangire Hreem Swaaha.

Slokam – 1

 Aparaajithaayaicha VidhmaheShatru Nishoodhinyaicha TheemahiThanno Prathyangirayai Prachodhayaath :

Slokam – 2

Ugram Veeram Maha ShakthimJwalantham SarvathomukhamPrathyangira Bheeshanam PathramMrityum Mrithyum Namaamyaham

Slokam – 3

Amma Prathyangira, Devi PrathyangiraSathyam Prathyangira, Sarvam PrathyangiraShozinganalluril Vaazhum PrathyangiraValvinaigal Theerkum Annaiye Prathyangira

Sri Prathyangira Gayatri Mantra

Om Aparajeethaya VidhmaheyPratyangiraya DheemahiThano Ugra Prachodhayaath…Om Pratayangiraya VidhmaheySathrunisoothiniya DheemahiThano Devi Prajothayaath

Maha Shivratri 2018 Puja

Maha Shivratri 2018 Puja

राशि के अनुसार करें भगवान शिव की पूजा

2018 Maha Shivaratri, Puja Muhurt

मेष- इस राशि के स्वामी मंगल देव है, इनके लिए लाल रंग शुभ माना जाता है। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प इस राशि के लोग भगवान शिव को अर्पित करें तो ये व्रत उनके लिए अधिक फलदायी हो जाता है

वृषभ- भगवान शिव के वाहन वृषभ हैं। इस राशि का स्वामी शुक्र को माना जाता है। सफेद रंग इनके लिए शुभ हो सकता है। इस कारण से सफेद चमेली के फूलों से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

मिथुन- इस राशि का स्वामी बुध को माना जाता है। मिथुन राशि के लोगों को भगवान शिव को धतूरा, भांग अर्पित कर सकते हैं। पंचाक्षरी मंत्र ऊं नमः शिवाय का पाठ लाभकारी माना जाता है

कर्क- इस राशि के स्वामी चंद्रमा है जिन्हें भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण कर रखा है। कर्क राशि के जातकों को शिवलिंग का अभिषेक भांग मिश्रित दूध से करना चाहिए।

सिंह- इस राशि के स्वामी सूर्य देव माने जाते हैं। भगवान शिव की आराधना में सिंह राशि के लोगों को कनेर के लाल फूल अर्पित करने चाहिए।

कन्या- इस राशि का स्वामी बुध को माना जाता है। कन्या राशि के लोग भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि सामग्री शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं। ऊं नमः शिवाय का पाठ करना इनके लिए लाभकारी हो सकता है।

तुला- इस राशि का स्वामी शुक्र को माना जाता है। मिश्री युक्त दूध से शिवलिंग का अभिषेक करना लाभकारी हो सकता है

वृश्चिक- इस राशि के स्वामी भौमेय मंगल को माना जाता है। इस राशि के लोगों को गुलाब के फूलों और बिल्वपत्रों की जड़ से करनी चाहिए।

धनु- इस राशि का स्वामी बृहस्तपति देव को माना जाता है। इन्हें पीला रंग प्रिय होता है। धनु राशि के लोगों को पीले फूलों से भगवान शिव का पूजन करना चाहिए।

मकर- इस राशि का स्वामी शनि को माना जाता है। धतूरा, भांग, अष्टगंध आदि से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पार्वतीनाथाय नमः का पाठ करना इस राशि के लोगों के लिए लाभदायक माना जाता है

कुंभ- इस राशि के स्वामी शनि देव हैं। गन्ने के रस से इस राशि के लोगों को शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। धन लाभ की इच्छा करने वाले इस राशि के लोगों को शिवाष्टक का पाठ करना चाहिए।

मीन- इस राशि के स्वामी बृहस्पतिदेव हैं। पंचामृत, पीले रंग के फूलों से इस राशि के लोग भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। 108 बार ऊं नमः शिवाय का पाठ इनके लिए लाभकारी हो सकता है।

How to Make Panchamrit Prasad For Maha Shivratri 2018

How to Make Panchamrit Prasad For Maha Shivratri 2018

The significance of the ingredients of Panchamrut/Panchamrit/Charnamrit

Milk is for the blessing of purity and piousness.

Yogurt is for prosperity and progeny.

Honey is for sweet speech.

Ghee is for victory.

Sugar is for happiness.

Water is for purity.

Method to Make Panchamrut/Panchamrit

Fresh whisked (beaten)  Curd- 500 gram (2 1/2 cup)

Cold Milk – 100 gram(1/2 cup)

Sugar- 50 gram ( 1/4 cup)

Honey – 1 tablespoon

Basil leaves – 8-10

Take milk, honey, curd, ghee, and sugar in a container and mix well. You can also add a few leaves of holy basil. Your Prasad is ready.

2018 Shri Satyanarayan Puja and Katha Dates,Food,Holy Materials

2018 Holika Dahan Timings