नक्षत्रों के स्वामी इस प्रकार

नक्षत्रों के स्वामी इस प्रकार हैं नक्षत्र                                             नक्षत्र का स्वामी अश्विनी                                          अश्विनीकुमार भरणी             काल कृत्तिका           अग्नि रोहिणी            ब्रह्मा मृगशिरा           चन्द्रमा...

हथेली बताएगी कि आप किस करियर को चुनेंगे ( Palm will tell you how you choose careers)

हथेली बताएगी कि आप किस करियर को चुनेंगे अपनी हथेली को समझिए। इस पर लिखा है कि आप किस करियर में जा सकते हैं। अगर आप अपनी रेखाओं को ध्यान से देखें तो जान सकते हैं कि भाग्य ने आपके लिए किस तरह का करियर चुना है… 1. प्रशासनिक सेवाएं: निष्कंलक अर्थात् शुद्घ भाग्य रेखा...

जानिए सातमुखी रुद्राक्ष के लाभ और प्रयोग (Know about Rudraksh)

जानिए सातमुखी रुद्राक्ष के लाभ और प्रयोग रुद्राक्ष को भारत में बेहद पवि़त्र माना जाता है। शिव पुराण में रुद्राक्ष के 38 प्रकार बताए गए हैं। इसमें कत्थई रंग के 12 प्रकार के रुद्राक्षों की उत्पति सूर्य के नेत्रों से, श्वेत रंग के 16 प्रकार के रुद्राक्षों की उत्पति चंद्र...

हरिद्रागणेशमन्त्रा:(Haridra Ganpati )

हरिद्रागणेशमन्त्रा: पञ्चान्तको धरासंस्थो विन्दुभूषितमस्तक:  ।     एकाक्षरो     महामन्त्र:  सर्वकामफलप्रद:।।अस्य वसिष्ठ ऋषिर्गायत्रीच्छन्दो हरिद्रागणपतिर्देवता गकारो बीजं लकार: शक्ति: । बीजेनैव षडग्ङकम्।   ऋष्यादि न्यास- इस मन्त्र के ऋषि वशिष्ठ, छन्द गायत्री,...

सर्वप्रथम गणेश का ही पूजन क्यों ?

सर्वप्रथम गणेश का ही पूजन क्यों ?  हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य का आरम्भ करने के पूर्व गणेश जी की पूजा करना आवश्यक माना गया है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता व ऋद्धि-सिद्धि का स्वामी कहा जाता है। इनके स्मरण, ध्यान, जप, आराधना से कामनाओं की पूर्ति होती है व विघ्नों का...