Sharad Purnima Pujan and Vrat Katha

Sharad Purnima Pujan and Vrat Katha

शरद पूर्णिमा 2018 शरद पूर्णिमा व्रत कथा व पूजा विधि

पूर्णिमा तिथि हिंदू धर्म में एक खास स्थान रखती है। प्रत्येक मास की पूर्णिमा का अपना अलग महत्व होता है। लेकिन कुछ पूर्णिमा बहुत ही श्रेष्ठ मानी जाती हैं। अश्विन माह की पूर्णिमा उन्हीं में से एक है बल्कि इसे सर्वोत्तम कहा जाता है। अश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इस पूर्णिमा पर रात्रि में जागरण करने व रात भर चांदनी रात में रखी खीर को सुबह भोग लगाने का विशेष रूप से महत्व है। इसलिये इसे कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं। आइये जानते हैं शरद पूर्णिमा का महत्व व व्रत पूजा विधि के बारे में।

पूर्णिमा का महत्व

शरद पूर्णिमा इसलिये इसे कहा जाता है क्योंकि इस समय सुबह और सांय और रात्रि में सर्दी का अहसास होने लगता है। चौमासे यानि भगवान विष्णु जिसमें सो रहे होते हैं वह समय अपने अंतिम चरण में होता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा का चांद अपनी सभी 16 कलाओं से संपूर्ण होकर अपनी किरणों से रात भर अमृत की वर्षा करता है। जो कोई इस रात्रि को खुले आसमान में खीर बनाकर रखता है व प्रात:काल उसका सेवन करता है उसके लिये खीर अमृत के समान होती है। मान्यता तो यह भी है कि चांदनी में रखी यह खीर औषधी का काम भी करती है और कई रोगों को ठीक कर सकती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार शरद पूर्णिमा इसलिये भी महत्व रखती है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। इसलिये शरद व जागर के साथ-साथ इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। लक्ष्मी की कृपा से भी शरद पूर्णिमा जुड़ी है मान्यता है कि माता लक्ष्मी इस रात्रि भ्रमण पर होती हैं और जो उन्हें जागरण करते हुए मिलता है उस पर अपनी कृपा बरसाती हैं।

पूर्णिमा व्रत की कथा

शरद पूर्णिमा की पौराणिक कथा भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोपियों संग महारास रचाने से तो जुड़ी ही है लेकिन इसके महत्व को बताती एक अन्य कथा भी मिलती है जो इस प्रकार है। मान्यतानुसार बहुत समय पहले एक नगर में एक साहुकार रहता था। उसकी दो पुत्रियां थी। दोनों पुत्री पूर्णिमा को उपवास रखती लेकिन छोटी पुत्री हमेशा उस उपवास को अधूरा रखती और दूसरी हमेशा पूरी लगन और श्रद्धा के साथ पूरे व्रत का पालन करती। समयोपरांत दोनों का विवाह हुआ। विवाह के पश्चात बड़ी जो कि पूरी आस्था से उपवास रखती ने बहुत ही सुंदर और स्वस्थ संतान को जन्म दिया जबकि छोटी पुत्री के संतान की बात या तो सिरे नहीं चढ़ती या फिर संतान जन्मी तो वह जीवित नहीं रहती। वह काफी परेशान रहने लगी। उसके साथ-साथ उसके पति भी परेशान रहते। उन्होंने ब्राह्मणों को बुलाकर उसकी कुंडली दिखाई और जानना चाहा कि आखिर उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। विद्वान पंडितों ने बताया कि इसने पूर्णिमा के अधूरे व्रत किये हैं इसलिये इसके साथ ऐसा हो रहा है। तब ब्राह्मणों ने उसे व्रत की विधि बताई व अश्विन मास की पूर्णिमा का उपवास रखने का सुझाव दिया। इस बार उसने विधिपूर्वक व्रत रखा लेकिन इस बार संतान जन्म के पश्चात कुछ दिनों तक ही जीवित रही। उसने मृत शीशु को पीढ़े पर लिटाकर उस पर कपड़ा रख दिया और अपनी बहन को बुला लाई बैठने के लिये उसने वही पीढ़ा उसे दे दिया। बड़ी बहन पीढ़े पर बैठने ही वाली थी उसके कपड़े के छूते ही बच्चे के रोने की आवाज़ आने लगी। उसकी बड़ी बहन को बहुत आश्चर्य हुआ और कहा कि तू अपनी ही संतान को मारने का दोष मुझ पर लगाना चाहती थी। अगर इसे कुछ हो जाता तो। तब छोटी ने कहा कि यह तो पहले से मरा हुआ था आपके प्रताप से ही यह जीवित हुआ है। बस फिर क्या था। पूर्णिमा व्रत की शक्ति का महत्व पूरे नगर में फैल गया और नगर में विधि विधान से हर कोई यह उपवास रखे इसकी राजकीय घोषणा करवाई गई।

पूर्णिमा व्रत व पूजा विधि

पूर्णिमा ही नहीं किसी भी उपवास या पूजा का लिये सबसे पहले तो आपकी श्रद्धा का होना अति आवश्यक है। सच्चे मन से पूर्णिमा के दिन स्नानादि के पश्चात तांबे अथवा मिट्टी के कलश की स्थापना कर उसे वस्त्र से ढ़कें। तत्पश्चात इस पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। यदि आप समर्थ हैं तो स्वर्णमयी प्रतिमा भी रख सकते हैं। सांयकाल में चंद्रोदय के समय सामर्थ्य अनुसार ही सोने, चांदी या मिट्टी से बने घी के दिये जलायें। 100 दिये जलायें तो बहुत ही उपयुक्त होगा। प्रसाद के लिये घी युक्त खीर बना लें। चांद की चांदनी में इसे रखें। लगभग तीन घंटे के पश्चात माता लक्ष्मी को यह खीर अर्पित करें। सर्वप्रथम किसी योग्य ब्राह्मण या फिर किसी जरुरतमंद अथवा घर के बड़े बुजूर्ग को यह खीर प्रसाद रूप में भोजन करायें। भगवान का भजन कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें। सूर्योदय के समय माता लक्ष्मी की प्रतिमा विद्वान ब्राह्मण को अर्पित करें।

2018 में शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा या कहें कोजागर व्रत अश्विन माह की पूर्णिमा को रखा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष यह तिथि 23-24 अक्तूबर को है।

शरद पूर्णिमा – 23-24 अक्तूबर 2018

चंद्रोदय – 17:14 बजे (23 अक्तूबर 2018)

चंद्रोदय – 17:49 बजे (24 अक्तूबर 2018)

पूर्णिमा तिथि आरंभ – 22:36 बजे (23 अक्तूबर 2018)

पूर्णिमा तिथि समाप्त – 22:14 बजे (24 अक्तूबर 2018)

Navratri Astmi Navmi Pujan in Hindi

Navratri Astmi Navmi Pujan in Hindi

दुर्गा पूजन सामग्री

पंचमेवा, पंच​मिठाई, रूई, कलावा, रोली, सिंदूर, १ नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, 5 सुपारी, लौंग, पान के पत्ते 5 , घी, चौकी, कलश, आम का पल्लव ,समिधा, कमलगट्टे, पंचामृत ( दूध, दही, घी, शहद, शर्करा ), की थाली. कुशा, रक्त चंदन, श्रीखंड चंदन, जौ, ​तिल, सुवर्ण प्र​तिमा 2, आभूषण व श्रृंगार का सामान, फूल माला |

शुद्धि एवं आचमन

आसनी पर  गणपति एवं दुर्गा माता की मूर्ति के सम्मुख बैठ जाएं ( बिना आसन ,चलते-फिरते, पैर फैलाकर पूजन करना निषेध है )| इसके बाद अपने आपको तथाआसन को इस मंत्र से शुद्धि करें

“ॐ अपवित्र : पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि :॥”

इन मंत्रों से अपने ऊपर तथा आसन पर 3-3 बार कुशा या पुष्पादि से छींटें लगायें फिर आचमन करें –

ॐ केशवाय नम: ॐ नारायणाय नम:, ॐ माधवाय नम:, ॐ गो​विन्दाय नम:|

फिर हाथ धोएं, पुन: आसन शुद्धि मंत्र बोलें :-

ॐ पृथ्वी त्वयाधृता लोका देवि त्यवं विष्णुनाधृता।

त्वं च धारयमां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥

इसके पश्चात अनामिका उंगली से अपने मत्थे पर  चंदन लगाते हुए यह मंत्र बोलें

 चन्दनस्य महत्पुण्यम् पवित्रं पापनाशनम्,

आपदां हरते नित्यम् लक्ष्मी तिष्ठतु सर्वदा।

संकल्प

संकल्प में पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें –

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डेभारतवर्षे पुण्य (अपने नगर/गांव का नाम लें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते(वर्तमान संवत), तमेऽब्दे क्रोधी नाम संवत्सरे उत्तरायणे (वर्तमान) ऋतोमहामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे (वर्तमान) मासे (वर्तमान) पक्षे (वर्तमान) तिथौ (वर्तमान) वासरे (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें)सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया- श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्री दुर्गा पूजनं च अहं क​रिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन ​निर्विघ्नतापूर्वक कार्य ​सिद्धयर्थं यथा​मिलितोपचारे गणप​ति पूजनं क​रिष्ये।

दुर्गा पूजन से पहले गणेश पूजन 

हाथ में पुष्प लेकर गणपति का ध्यान करें|और श्लोक पढें

     गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्।

     उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।

आवाहन: हाथ में अक्षत लेकर

     आगच्छ देव देवेश, गौरीपुत्र ​विनायक।

     तवपूजा करोमद्य, अत्रतिष्ठ परमेश्वर॥

ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः इहागच्छ इह तिष्ठ कहकर अक्षत गणेश जी पर चढा़ दें।

हाथ में फूल लेकर-

       ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आसनं समर्पया​मि|

 अर्घा में जल लेकर बोलें –

   ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः अर्घ्यं समर्पया​मि|

 आचमनीय-स्नानीयं-

   ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आचमनीयं समर्पया​मि |

 वस्त्र लेकर-

   ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः वस्त्रं समर्पया​मि|

 यज्ञोपवीत-

   ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः यज्ञोपवीतं समर्पया​मि |

 पुनराचमनीयम्-

    ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः |

रक्त चंदन लगाएं:

     इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः |

श्रीखंड चंदन बोलकर श्रीखंड चंदन लगाएं

 सिन्दूर चढ़ाएं-

     “इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः|

दूर्वा और विल्बपत्र भी गणेश जी को चढ़ाएं|

पूजन के बाद गणेश जी को प्रसाद अर्पित करें:

     ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः इदं नानाविधि नैवेद्यानि समर्पयामि |

मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र-

            शर्करा खण्ड खाद्या​नि द​धि क्षीर घृता​नि च|

       आहारो भक्ष्य भोज्यं गृह्यतां गणनायक।

 प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें-

           इदं आचमनीयं ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः |

 इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें-

          ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः ताम्बूलं समर्पया​मि |

अब फल लेकर गणपति पर चढ़ाएं-

          ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः फलं समर्पया​मि|

            ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः द्रव्य समर्पया​मि|

 अब ​विषम संख्या में दीपक जलाकर ​निराजन करें और भगवान की आरती गायें।

 हाथ में फूल लेकर गणेश जी को अ​र्पित करें, ​फिर तीन प्रद​क्षिणा करें।

दुर्गा पूजन

सबसे पहले माता दुर्गा का ध्यान करें-

     सर्व मंगल मागंल्ये ​शिवे सर्वार्थ सा​धिके ।

     शरण्येत्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ॥

 आवाहन-

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। दुर्गादेवीमावाहया​मि॥

 आसन-

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आसानार्थे पुष्पाणि समर्पया​मि॥

अर्घ्य-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। हस्तयो: अर्घ्यं समर्पया​मि॥

आचमन-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आचमनं समर्पया​मि॥

स्नान-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। स्नानार्थं जलं समर्पया​मि॥

स्नानांग आचमन-

       स्नानान्ते पुनराचमनीयं जलं समर्पया​मि।

पंचामृत स्नान-

      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। पंचामृतस्नानं समर्पया​मि॥

गन्धोदक-स्नान-

      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। गन्धोदकस्नानं समर्पया​मि॥

शुद्धोदक स्नान-

      श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। शुद्धोदकस्नानं समर्पया​मि॥

आचमन-

      शुद्धोदकस्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पया​मि।

वस्त्र-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। वस्त्रं समर्पया​मि ॥ वस्त्रान्ते आचमनीयं जलं समर्पया​मि।

सौभाग्य सू़त्र-

       श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। सौभाग्य सूत्रं समर्पया​मि ॥

चन्दन-

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। चन्दनं समर्पया​मि ॥

ह​रिद्राचूर्ण

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ह​रिद्रां समर्पया​मि ॥

कुंकुम-

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। कुंकुम समर्पया​मि ॥

​सिन्दूर-

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ​सिन्दूरं समर्पया​मि ॥

कज्जल-

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। कज्जलं समर्पया​मि ॥

आभूषण

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आभूषणा​नि समर्पया​मि ॥

पुष्पमाला

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। पुष्पमाला समर्पया​मि ॥

धूप

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। धूपमाघ्रापया​मि॥

दीप

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। दीपं दर्शया​मि॥

नैवेद्य

        श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। नैवेद्यं ​निवेदया​मि॥नैवेद्यान्ते ​त्रिबारं आचमनीय जलं समर्पया​मि।

फल

         श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। फला​नि समर्पया​मि॥

ताम्बूल

          श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। ताम्बूलं समर्पया​मि॥

द​क्षिणा

          श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। द​क्षिणां समर्पया​मि॥

आरती

          श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आरा​र्तिकं समर्पया​मि॥

क्षमा प्रार्थना

न मंत्रं नोयंत्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो

न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः ।

न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं

परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ॥

विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया

विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् ।

तदेतत्क्षतव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे

कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥

पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः सन्ति सरलाः

परं तेषां मध्ये विरलतरलोऽहं तव सुतः ।

मदीयोऽयंत्यागः समुचितमिदं नो तव शिवे

कुपुत्रो जायेत् क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥

जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता

न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया ।

क्षमा प्रार्थना

तथापित्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे

कुपुत्रो जायेत क्वचिदप कुमाता न भवति ॥

परित्यक्तादेवा विविध​विधिसेवाकुलतया

मया पंचाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि ।

इदानीं चेन्मातस्तव कृपा नापि भविता

निरालम्बो लम्बोदर जननि कं यामि शरण् ॥

श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा

निरातंको रंको विहरति चिरं कोटिकनकैः ।

तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं

जनः को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ ॥

क्षमा प्रार्थना

चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो

जटाधारी कण्ठे भुजगपतहारी पशुपतिः ।

कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं

भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम् ॥

न मोक्षस्याकांक्षा भवविभव वांछापिचनमे

न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुनः ।

अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै

मृडाणी रुद्राणी शिवशिव भवानीति जपतः ॥

नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः

किं रूक्षचिंतन परैर्नकृतं वचोभिः ।

श्यामे त्वमेव यदि किंचन मय्यनाथे

धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव ॥

आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं

करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि ।

नैतच्छठत्वं मम भावयेथाः

क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥

क्षमा प्रार्थना

जगदंब विचित्रमत्र किं परिपूर्ण करुणास्ति चिन्मयि ।

अपराधपरंपरावृतं नहि मातासमुपेक्षते सुतम् ॥

मत्समः पातकी नास्तिपापघ्नी त्वत्समा नहि ।

वं ज्ञात्वा महादेवियथायोग्यं तथा कुरु ॥

Navratri siddhi mantra in hindi

Navratri siddhi mantra in hindi

चैत्र नवरात्रि में मां की आराधना अत्यंत फलदायक रहती है। चैत्री देवी साधना में हम मां की पूजन, सप्तशती पाठ एवं उनके रूपों की भक्ति तो करते ही हैं, इसी के साथ नाना प्रकार के मंत्र की सिद्धि भी हम कर उसका हमारे जीवन में व परोपकार के लिए लाभ ले सकते हैं। जब सब तरफ से परेशानी आ जाए, आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक और कई उपाय करने के बाद भी समस्या हल नहीं हो रही हो तो निम्न मंत्रों में किसी भी 1 मंत्र को नवरात्रि में 11 माला रोज करें व बाद में 1 माला रोज करें, आपको फायदा होने लगेगा।

Navratri puja mantra in hindi

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।। 

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।। 

  1. ‘ऐं’ बीज मंत्र है वाणी तथा ज्ञान देने वाला है।

‘ह्रीं’ श्री महालक्ष्मी का बीज मंत्र है। ऐश्वर्य, धन देने वाला है।

‘क्लीं’ शत्रुनाशक महाकाली का बीज मंत्र है।

जो भी मुख्य आवश्यकता हो, वह बीज मंत्र के आदि में लगाकर जप करें, जैसे-

Navratri siddhi mantra in hindi

ॐ ह्रीं ऐं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।।

ॐ क्लीं ऐं ह्रीं चामुण्डायै विच्चे।।

गायत्री मंत्र के आदि तथा अंत में निर्दिष्ट बीज मंत्रों का उपयोग 3 बार कर लाभ लिया जा सकता है। ‘श्रीं’ धन के लिए, जैसे ‘श्रीं श्रीं श्रीं ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् श्रीं श्रीं श्रीं।’

पड़वा माता शैलपुत्री का दिन है। उनका मंत्र ‘ॐ शैलपुत्र्ये नम:’ का यथाशक्ति जप कर लाभ लिया जा सकता है, विशेषकर स्त्रियां अपने सौभाग्य वृद्धि के लिए प्रयोग करें।

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Navratri siddhi mantra in hindi

मां कालिका का स्मरण करके ये मंत्र करें।

मंत्र : कालि-कालि महाकालि नमोस्तु,
ते हत हत हन दह दह शूलम,
त्रिशूलेत हुं फट्‍ स्वाहा।।

Foods for Navratri

दही बड़ा विद पनीर-सिंघाड़ा
सामग्री 
पनीर आधा कप, सिंघाड़े का आटा एक कप,1 कप उबले मैश आलू, 1 स्पून अदरक पिसा हुआ, दरदरे पिसे काजू पाव कटोरी, 1 बारीक कटी हरी मिर्च, 2 कप फेंटा दही, सेंधा नमक, शक्कर, जीरा पावडर, अनारदाने अंदाज से व तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में तेल।
विधि 
सबसे पहले पनीर को कद्दूकस करके इसमें आलू, काजू, किशमिश, हरी मिर्च, अदरक व सेंधा नमक मिला लें। उसके छोटे-छोटे गोले बना लें।
अब सिंघाड़े के आटे का घोल बनाएं। बड़ों को इस घोल में डुबोकर गरमा-गरम तेल में सुनहरे तल लें। दही में शक्कर मिला लें। अब एक प्लेट में भल्ला परोस कर दही, जीरा पावडर व अनारदाने से सजाकर पेश करें।

Navratri puja mantra in hindi

“सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”

Navratri siddhi mantra in hindi

धन के लिए मंत्र

“दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”

आकर्षण के लिए मंत्र

“ॐ क्लींग ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती ही सा,
बलादाकृष्य मोहय महामाया प्रयच्छति ”

Ekadashi Calender: Ekadashi fasting days

विपत्ति नाश के लिए मंत्र

“शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”

शक्ति प्राप्ति के लिए मंत्र

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्ति भूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

रक्षा पाने के लिए मंत्र

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥

Hans Yog in Hindi
Hans Yog in Hindi

आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए मंत्र

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

भय नाश के लिए मंत्र

“सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।
भयेभ्याहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

महामारी नाश के लिए मंत्र

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥

सुलक्षणा पत्‍‌नी की प्राप्ति के लिए मंत्र

पत्‍‌नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥

पाप नाश के लिए मंत्र

हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योऽन: सुतानिव॥

भुक्ति-मुक्ति की प्राप्ति के लिए मंत्र

विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

Ashada Navratri 2018, Ashada Navratri 2018, Gupt Navratri 2018 In Hindi

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प्रारंभ : 13 जुलाई  (शुक्रवार) 2018

 समापन : 21 जुलाई  (शनिवार) 2018

13 जुलाई (शुक्रवार) ,2018 :  घट स्थापन एवं माँ शैलपुत्री पूजा

14 जुलाई (शनिवार) 2018 :  माँ ब्रह्मचारिणी पूजा

15 जुलाई (रविवार) 2018 : माँ चंद्रघंटा पूजा

16 जुलाई (सोमवार) 2018:  माँ कुष्मांडा पूजा 

17 जुलाई (मंगलवार) 2018 :  माँ स्कंदमाता पूजा 

18 जुलाई (बुधवार)  2018 : माँ कात्यायनी पूजा

19 जुलाई (बृहस्पतिवार)  2018:  माँ कालरात्रि पूजा 

20 जुलाई (शुक्रवार) 2018 : माँ महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी 

21 जुलाई (शनिवार ) 2018: माँ सिद्धिदात्री,   नवरात्री पारण

नवरात्रों में माँ भगवती की आराधना दुर्गा सप्तसती से की जाती है

विनियोग 

ॐ अस्य श्री दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र मंत्रस्य, नारायण ऋषि: अनुष्टुप् छ्न्द:

श्री महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वत्यो देवता: श्री दुर्गा प्रीत्यर्थे सप्तश्लोकी दुर्गा पाठे विनियोग: ।

श्लोक 

ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ।।१।।

दुर्गे स्मृता हरसिभीतिमशेष जन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मति मतीव शुभां ददासि
दारिद्र्य दु:ख भय हारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकार करणाय सदार्द्र चित्ता ।।२।।

सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते ।।३।।

Mars Transit

शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे
सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते ।।४।।

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्व शक्ति समन्विते
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते ।।५।।

रोगान शेषा नपहंसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलान भीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन् नराणां
त्वामाश्रिता ह्या श्रयतां प्रयान्ति ।।६।।

सर्वा बाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि
एकमेव त्वया कार्यमस्मद् वैरि विनाशनं ।।७।।

इति सप्तश्लोकी दुर्गास्तोत्र सम्पूर्णा ।।

 

गुप्त नवरात्रि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के इलाकों में खास तौर पर मनाई जाती है। इन नौ दिनों में मां भगवती के गुप्त स्वरूप काली, तारा, बगला, षोडशी, आदि की आराधना की जाएगी। इन दिनों में मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाएगी।

नवरात्र पूजा के लिए हवन सामग्री

नवरात्र पूजा के लिए हवन सामग्री

कूष्माण्ड (पेठा), 15 पान, 15 सुपारी, लौंग 15 जोड़े,छोटी इलायची 15, कमल गट्ठे 15, जायफल 2, मैनफल 2, पीली सरसों, पंच मेवा, सिन्दूर, उड़द मोटा, शहद 50ग्राम, ऋतु फल 5, केले, नारियल 1, गोला 2, गूगल 10ग्राम, लाल कपड़ा, चुन्नी, गिलोय, सराईं 5, आम के पत्ते,सरसों का तेल,कपूर, पंचरंग, केसर, लाल चंदन, सफेद चंदन, सितावर, कत्था, भोजपत्र, काली मिर्च, मिश्री,अनारदाना । सवा पांच सेर सामग्री का प्रमाण : चावल 1.5 किलो, घी एक किलो, जौ 1.5 किलो, तिल 2 किलो, बूरा तथा सामग्री श्रद्धा के अनुसार अगर, तगर, नागर मोथा, बालछड़,छाड़छबीला, कपूर कचरी, भोजपत्र, इन्द जौ, सितावर, सफेद चन्दन प्रत्येक एक रुपये का लेकर सामग्री में मिलावें। आम या ढाक की सूखी लकड़ी 20 किलो। नवग्रह की नौ समिधा (आक, ढाक, कत्था, चिरचिटा, पीपल, गूलर, जांड,दूब, कुशा)।

 

जानिए शिवरात्रि के अचूक उपाय

2018 Chaitra Navratri, Vasanta Navratri Dates

2018 Chaitra Navratri, Vasanta Navratri Dates

Chaitra Navratri 2018 Dates and Goddess Information

Navratri Day Pratipada

नवरात्री तिथियां

March 18, 2018 (Sunday) – Ghatsthapana, Shailputri Puja

Navratri Day 2 Dwitiya

March 19, 2018 (Monday) Gauri Teej, Brahmacharini Puja

Navratri Day 3 Tritiya

March 20, 2018 (Tuesday) – Chandraghanta Puja

Navratri Day 4 (Chaturthi)

March 21, 2018 (Wednesday) – Kushmanda Puja

Navratri Day 5 (Panchami)

March 22, 2018 (Thursday) – Skandamata Puja

Navratri Day 6 (Shashthi)

March 23, 2018 (Friday) – Katyayani Puja

Navratri Day 7 (Saptami)

March 24, 2018 (Saturday) – Kalratri Puja

Navratri Day 8 (Ashtami)

March 25, 2018 (Sunday) – Mahagauri Puja, Ashtami, Rama Navami

Navratri Day 9 (Navami)

March 26, 2018 (Monday) – Navaratri Parana, Siddhidatri Puja

दुर्गा सप्‍तशती

दुर्गा सप्‍तशती

  1. मां दुर्गा का शैल पुत्री रूप, जिनकी उपासना से मनुष्‍य को अन्‍नत शक्तियां प्राप्‍त होती हैं तथा उनके अाध्‍यात्मिक मूलाधार च्रक का शोधन होकर उसे जाग्रत कर सकता है, जिसे कुण्‍डलिनी-जागरण भी कहते है।
  2. मां दुर्गा का ब्रहमचारणी रूप, तपस्‍या का प्रतीक है। इसलिए जो साधक तप करता है, उसे ब्रहमचारणी की पूजा करनी चाहिए।
  3. च्रदघण्‍टा, मां दुर्गा का तीसरा रूप है और मां दुर्गा के इस रूप का ध्‍यान करने से मनुष्‍य को लौकिक शक्तिया प्राप्‍त होती हैं, जिससे मनुष्‍य को सांसारिक कष्‍टों से छुटकारा मिलता है।
  4. मां दुर्गा की चौथी शक्ति का नाम कूष्‍माण्‍डा है और मां के इस रूप का ध्‍यान, पूजन व उपासना करने से साधक को रोगों यानी आधि-व्‍याधि से छुटकारा मिलता है।
  5. माँ जगदम्‍बा के स्‍कन्‍दमाता रूप को भगवान कार्तिकेय की माता माना जाता है, जो सूर्य मण्‍डल की देवी हैं। इसलिए इनके पुजन से साधक तेजस्‍वी और दीर्घायु बनता है।
  6. कात्‍यानी, माँ दुर्गा की छठी शक्ति का नाम है, जिसकी उपासना से मनुष्‍य को धर्म, अर्थ, काम और अन्‍त में मोक्ष, चारों की प्राप्ति होती है। यानी मां के इस रूप की उपासना करने से साधक की सभी मनोकामनाऐं पूरी होती हैं।
  7. मां जगदीश्‍वरी की सातवीं शक्ति का नाम कालरात्रि है, जिसका अर्थ काल यानी मुत्‍यृ है और मां के इस रूप की उपासना मनुष्‍य को मुत्‍यृ के भय से मुक्ति प्रदान करती है तथा मनुष्‍य के ग्रह दोषों का नाश होता है।
  8. आठवी शक्ति के रूप में मां दुर्गा के महागौरी रूप की उपासना की जाती है, जिससे मनुष्‍य में देवी सम्‍पदा और सद्गुणों का विकास होता है और उसे कभी आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पडता।
  9. सिद्धीदात्री, मां दुर्गा की अन्तिम शक्ति का नाम है जो कि नवरात्रि के अन्तिम दिन पूजी जाती हैं और नाम के अनुरूप ही माँ सिद्धीदात्री, मनुष्‍य को समस्‍त प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं जिसके बाद मनुष्‍य को किसी और प्रकार की जरूरत नही रह जाती।

हिन्‍दु धर्म की मान्‍यतानुसार दुर्गा सप्‍तशती में कुल 700 श्लोक हैं जिनकी रचना स्‍वयं ब्रह्मा, विश्‍वामित्र और वशिष्‍ठ द्वारा की गई है और मां दुर्गा के संदर्भ में रचे गए इन 700 श्‍लोकों की वजह से ही इस ग्रंथ का नाम दुर्गा सप्‍तशती है।

Maa Durga Shabar Mantra In Hindi

Maa Durga Shabar Mantra In Hindi

दुर्गा शाबर मन्त्र

“ॐ ह्रीं श्रीं चामुण्डा सिंह-वाहिनी। बीस-हस्ती भगवती, रत्न-मण्डित सोनन की माल। उत्तर-पथ में आप बैठी, हाथ सिद्ध वाचा ऋद्धि-सिद्धि। धन-धान्य देहि देहि, कुरु कुरु स्वाहा।”

विधिः- उक्त मन्त्र का सवा लाख जप कर सिद्ध कर लें। फिर आवश्यकतानुसार श्रद्धा से एक माला जप करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। लक्ष्मी प्राप्त होती है, नौकरी में उन्नति और व्यवसाय में वृद्धि होती है

mahakali beej mantra

क्रीं हूं हूं ह्रीं हूं हूं क्रीं स्वाहा। क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा। नमः ऐं क्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा। नमः आं आं क्रों क्रों फट स्वाहा कालिका हूं। क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा। माँ काली के ये पांच मन्त्र समान रूप से प्रभावशाली हैं। इनमें से प्रत्येक का एक लाख की संख्या में जपकर सिद्ध करने का विधान है।

बगलामुखी शाबर मंत्र साधना

क्रीं क्रीं फट स्वाहा छह अक्षरों का यह मन्त्र तीनों लोकों को मोहित करने वाला है। सम्मोहन आदि तांत्रिक सिंद्धियों के लिए इस मन्त्र का विशेष रूप से जप किया जाता है। क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जीवन के चारों ध्येयों की आपूर्ति करने में समर्थ है। आठ अक्षरों का यह मन्त्र। उपासना के अंत में इस मन्त्र का जप करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। ऐं नमः क्रीं क्रीं कालिकायै स्वाहा ग्यारह अक्षरों का यह मन्त्र अत्यंत दुर्लभ और सर्वसिंद्धियों को प्रदान करने वाला है। उपरोत्त्क पांच, छह, आठ और ग्यारह अक्षरों के इन मन्त्रों को दो लाख की संख्या में जपने का विधान है। तभी यह मन्त्र सिद्ध होता है।

काली मां दुर्गा का ही एक स्वरुप है। मां दुर्गा के इस महाकाली स्वरुप को देवी के सभी रुपों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। दसमहाविद्याओं में काली का पहला स्थान माना जाता है। दुष्ट, अभिमानी राक्षसों के संहार के लिए मां काली को जाना जाता है। अक्सर काली की साधना सन्यासी या तांत्रिक करते ही करते हैं लेकिन मां काली के कुछ मंत्र ऐसे भी हैं जिनका जाप कर कोई भी साधक अपने जीवन के संकटों को दूर कर सकता है।

22 अक्षरी श्री दक्षिण काली मंत्र 

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥

Magha Gupta Navratri 2018

Magha Gupta Navratri 2018

18th January 2018 (Thursday)

Magha Gupta Navratri is an auspicious 9-day period that is dedicated to worshipping the nine different forms of Goddess Shakti

  • Navratri Day 1: Pratipada – Ghatasthapana and Shailputri Puja
  • Navratri Day 2: Dwitiya – Brahmacharini Puja
  • Navratri Day 3: Tritiya – Chandraghanta Puja
  • Navratri Day 4: Chaturthi – Kushmanda Puja
  • Navratri Day 5: Panchami – Skandamata Puja
  • Navratri Day 6: Sashthi – Katyayani Puja
  • Navratri Day 7: Saptami – Kaal Ratri Puja
  • Navratri Day 8: Ashtami – Mahagauri Puja and Sandhi Puja
  • Navratri Day 9: Navami – Siddhidatri Puja
Sunrise18-Jan-2018 07:14 AM
Sunset18-Jan-2018 18:00 PM
Pratipada Tithi Starts17-Jan-2018 07:47 AM
Pratipada Tithi Ends18-Jan-2018 10:12 AM
Abhijit Muhurat Time12:15 PM – 12:58 PM
Ghatasthapana Muhurta07:14 AM – 10:49 AM

 

Shani Pradosh 2018 Dates

कात्यायनी पूजन Katyani Pujan

कात्यायनी पूजन Katyani Pujan 

कात्यायनी पूजन Katyani Pujan

कात्यायनी

लाल गुलाब

Mantra -मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
 

Prarthana -प्रार्थना

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
 

Stuti -स्तुति  –

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
 

Dhyana -ध्यान

वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्॥
 

Stotra -स्तोत्र

कञ्चनाभां वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखी शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोऽस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम्।
सिंहस्थिताम् पद्महस्तां कात्यायनसुते नमोऽस्तुते॥
परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, कात्यायनसुते नमोऽस्तुते॥
विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्वाचिन्ता, विश्वातीता कात्यायनसुते नमोऽस्तुते॥
कां बीजा, कां जपानन्दकां बीज जप तोषिते।
कां कां बीज जपदासक्ताकां कां सन्तुता॥
कांकारहर्षिणीकां धनदाधनमासना।
कां बीज जपकारिणीकां बीज तप मानसा॥
कां कारिणी कां मन्त्रपूजिताकां बीज धारिणी।
कां कीं कूंकै क: ठ: छ: स्वाहारूपिणी॥

Kavacha -कवच

कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥